101 साल के बीएचयू के इतिहास की पहली महिला प्रॉक्टर रोयाना सिंह से मिलिये

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 रोयना सिंह का नाम बीएचयू में हुये एक हिंसक आंदोलन के बाद सामने आया। जिसने एक शताब्दी पूरी कर रहे विश्वविद्यालय को हिलाकर रख दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय को महसूस हुआ कि उसे एक महिला को अपनी सुरक्षा संबंधी गतिविधियों का प्रमुख नियुक्त करना चाहिये।

रोयना सिंह (फाइल फोटो)
रोयना सिंह (फाइल फोटो)
रोयना बीएचयू के शरीर संरचना विभाग से 2007 से जुड़ी हैं और फिलहाल वो एक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। रोयना की जिंदगी में भी कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन वे हमेशा अडिग रहीं और बहादुरी से अपना जीवन आगे बढ़ाती रहीं।

विश्वविद्यालय में हुए हालिया विवाद पर उन्होंने कहा कि छात्रों और प्रशासन के बीच फिर से वैसा ही रिश्ता कायम हो जाएगा। इसके लिए वे मेहनत भी कर रही हैं।

बीएचयू में एक छात्रा से मॉलेस्टेशन के मामले के बाद कैंपस में हुई पुलिस हिंसा के बाद बीएचयू की पहली महिला प्रॉक्टर का कार्यभार संभालने वाली रोयना सिंह का विश्वास है कि कड़ी मेहनत और ईमानदारी से जीनियस जैसी बुद्धिमत्ता को भी चुनौती दी जा सकती है। रोयना सिंह का नाम बीएचयू में हुये एक हिंसक आंदोलन के बाद सामने आया। जिसने एक शताब्दी पूरी कर रहे विश्वविद्यालय को हिलाकर रख दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय को महसूस हुआ कि उसे एक महिला को अपनी सुरक्षा संबंधी गतिविधियों का प्रमुख नियुक्त करना चाहिये।

रोयना का जन्म फ्रांस में 1972 में हुआ और उनका ये नाम एक समुद्र किनारे बसे टाउन रोयन के नाम पर रखा गया। दरअसल यहीं पर उनके माता-पिता काम करते थे। रोयना सिंह आज बीएचयू की पहली महिला प्रॉक्टर हैं और मानती हैं कि कड़ी मेहनत और ईमानदारी को हर जगह सम्मान मिलता है। वे इस बात का विस्तार करते हुये कहती हैं, जीनियस लोग समाज में अपना स्थान बना लेते हैं पर ईमानदारी एक साधारण इंसान को भी एक जीनियस से टक्कर लेने का मौका देती है।

रोयना बीएचयू के शरीर संरचना विभाग से 2007 से जुड़ी हैं और फिलहाल वो एक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। रोयना की जिंदगी में भी कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन वे हमेशा अडिग रहीं और बहादुरी से अपना जीवन आगे बढ़ाती रहीं। उनकी एक छोटी बहन थी जिसका देहांत 1994 में हो गया। इसके तीन साल बाद ही उनके पिता इंद्रा सेन भी चल बसे। यह दोहरी मुसीबत तब आई जब रोयना गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं। एक साल बाद ही उन्होंने शिव प्रकाश से शादी कर ली। शिव प्रकाश उनके फेलो थे और इंटर्नशिप खत्म कर रहे थे। उस वक्त रोयना की उम्र सिर्फ 23 साल थी। वे बताती हैं कि शादी करना काफी सहज था और इससे उन्हें कभी कोई दिक्कत नहीं आई।

अभी हाल ही में बीएचयू में हुए छात्र आंदोलन के मुद्दे पर रोयना बताती हैं कि जब उन्हें तत्कालीन वीसी ने पहली बार तलब किया था तब भी उन्होंने वीसी से पूछा था, क्या आपको मुझपर विश्वास है?

रोयना जानती हैं कि उनकी प्रॉक्टर के रूप में नियुक्ति के वक्त विश्वविद्यालय के हालात अच्छे नहीं थे। पर वह कहती हैं कि मेरी क्षमताओं पर आजतक किसी ने शक नहीं किया। इस साल 24 सितंबर की रात, छात्रों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया, जिनपर लाठीचार्ज हुआ उनमें लड़कियां भी थीं, जो विश्वविद्यालय परिसर में बेहतर सुरक्षा की मांग कर रही थीं। जबकि बर्बरता अपने आप में चौंकाने वाली थी। और एक बात ये भी है कि ये सब प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में हो रहा था। वह भी उनके वहां पहुंचने के कुछ ही घंटों के अंदर।

इस घटना ने देश को अचंभित कर दिया था। इसके बाद तत्कालीन चीफ प्रॉक्टर ओ.एन. सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था। और रोयना सिंह को हिंसा के चार दिन बाद नया प्रॉक्टर नियुक्त कर दिया गया था। उनसे पहले इस पद पर 31 पुरुष रह चुके हैं।

कुछ लोगों ने बीएचयू प्रशासन के इस कदम को अपनी छवि बचाने का एक प्रयास माना था। पर इस पर रोयना सिंह कहती हैं, 'पितृसत्तात्मक संस्कृति के चलते हम एक महिला को ऊंचे प्रशासनिक पदों पर होने के बारे में सोच भी नहीं पाते। ज्यादा शिक्षा और जानकारी के साथ, यह संक्रमण धीरे-धीरे खत्म होगा और मैं उसकी पहल करने वालों में से हूं।'

इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की प्रोफसर रोयना कहती हैं कि उन्हें अपनी मां चंद्र प्रभा को याद कर शक्ति मिलती है जो वर्तमान में 77 साल की हैं और एक टिश्यू कल्चरिस्ट रही हैं। रोयना कहती हैं कि उनकी मां एक मजबूत औरत हैं और उन पर अपनी मां का बहुत प्रभाव पड़ा है। रोयना बीएचयू के महिला शिकायत विभाग की अध्यक्ष भी हैं। कभी उनके पास एनाटमी डिपार्टमेंट का चार्ज हुआ करता था। वे अपनी मां के साथ ही अपनी सफलता का श्रेय अपने पति को भी देती हैं। वे कहती हैं कि दोनों ने मिलकर जिंदगी को खूबसूरत बनाया है। विश्वविद्यालय में हुए हालिया विवाद पर उन्होंने कहा कि छात्रों और प्रशासन के बीच फिर से वैसा ही रिश्ता कायम हो जाएगा। इसके लिए वे मेहनत भी कर रही हैं।

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