"अगर आप किसी चीज़ में अच्छे हो तो उसे कभी मुफ्त में मत करो”

छोटे बुटीक और दुकानों के लिए खुले लेजीशोपरडॉटकॉम के ऑनलाइन दरवाजे

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लेजीशोपरडॉटकॉम (lazyshopr.com) के संस्थापक हितेश अग्रवाल अपने उद्योग को “प्रीमियम परिधानों की विंडो शोपिंग” के रूप में परिभाषित करते हैं। उनकी वेबसाइट छोटे स्तर के बुटीकों और दुकानों के लिए ऑनलाइन मंच उपलब्ध कराती है। हितेश बताते हैं 

“लेजीशोपरडॉटकॉम मेड-टू-ऑर्डर श्रेणी के परिधानों के संग्रह को विस्तार के साथ दिखाता है।”

हितेश कोलकाता में रहते हैं। जून 2014 में स्वंय का काम शुरू करने से पहले वे बैंक विश्लेषक का कार्य करते थे। वह कहते हैं 

“नए विचार हमेशा मेरे दिमाग में चलते रहते थे लेकिन मैंने कभी अपनी कॉरपोरेट जॉब छोड़ कर जोख़िम उठाने का साहस नहीं किया।”

बदलाव तब हुआ जब उनके दोस्त गौरव झुनझुनवाला (सह-संस्थापक) ने अपनी जॉब छोड़ दी। उस समय को याद करते हुए हितेश बताते हैं कि “उस दौरान मैंने गौरव से लेजीशोपरडॉटकॉम के विचार, उसकी क्षमता और उसको लेकर मेरे सामने आ रही तकनीकी चुनौतियों पर चर्चा की।” इसके बाद गौरव ने हितेश के साथ काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद दोनों को साथ में काम करने की सहूलियत का एहसास हुआ और तब वो एक टीम थी।

जल्द ही इस जोड़ी ने अपने पहले कर्मचारी देबर्घया को नौकरी पर रखा, जो अब यूआई व यूएक्स (UI/UX) डेवलपमेंट और ग्राफ़िक डिजाइनिंग देखते हैं। हितेश ग्राहक, मार्केटिंग व फाइनेंस और गौरव उत्पाद के विकास और गुणवत्ता बढाने में कार्य करते हैं।

लेजीशोपरडॉटकॉम का मूल लक्ष्य ख़रीदारी के अनुभव को सरल करना है। अपनी बहन को दुल्हन के कपड़ों की ख़रीदारी के लिए परेशान होते देख, हितेश ने उन्हें ऑनलाइन शॉपिंग के विकल्प के बारे में पूछा। बहुत से लोगों की तरह उनकी बहन ने भी कहा कि वो बिना ट्राय किये महंगे कपड़े लेने से डर रही है। इस बात ने हितेश के अंदर गूँज पैदा कर दी, वो ई-कॉमर्स और ऑफलाइन ख़रीदारी के अंतर को पूरा करने के बारे में सोचने लगे।

बाज़ार तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत में डिजाइनर वस्त्र उद्योग सालाना 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ अगले तीन सालों में 66 बिलियन यूएस डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है। बहुत से डिज़ाइनर उद्यमियों ने अपने ब्रैंड शुरू कर दिये हैं और कई शुरू करने की प्रक्रिया में हैं।

अब तक लेजीशोपरडॉटकॉम कोलकाता में 10 बुटीक से साथ साझेदारी में है। अपना विस्तार करने के लिए अगले कुछ महीनों में अन्य शहरों में बुटीकों से भागीदारी बढ़ाने की कम्पनी की योजना है। शुरुआत में दुकानों को लेजीशोपरडॉटकॉम का महत्व समझाना मुश्किल काम था। हितेश बताते हैं 

“उनमे से कई लोगों को यह समझने में परेशानी हुई कि हम ई-कॉमर्स मंच नहीं हैं। डिज़ाइनर्स को यह समझाने में बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।”

जब इनकी टीम ग्राहकों (बुटीक और दुकान) से मिलती है तो उन्हें फोटोशूट और उनकी वेबसाइट देखने के लिए तिमाही या सालाना सबस्क्रिप्शन का प्रस्ताव देती है। लेजीशोपरडॉटकॉम स्टोर का विश्लेषण करने की सेवा भी देती है, जिससे स्टोर को ग्राहक की वरीयता और सुझावों के बारे में पता चलता है।

टीम की माने तो इस समय उनका कोई प्रतियोगी नहीं है। जिन्होंने इसी तरह का उद्यम शुरू किया था वो अब ई-कॉमर्स की ओर मुड़ गए हैं। यह बताता है कि ऑनलाइन सामान बेचना स्टोर खोलने के मुकाबले कितना फायदेमंद है। यह इस टीम के लिए चुनौती है लेकिन “लेजीशोपरडॉटकॉम” को खुद पर भरोसा है। हितेश भविष्य की योजनाओं के बारे में बाताते हुए कहते हैं 

“अपने बढ़ते विस्तार के साथ हम इस साल के अंत तक करोड़ों में आय जुटाने का लक्ष्य बना रहे हैं। अगले साल की शुरुआत में रेडी-मेड कपड़ों के एक मॉडल को टेस्ट करने की योजना है। अगर वह सफल होता है तो हमारे विस्तार का क्षेत्र और बड़ा हो जायेगा।”

लेजीशोपरडॉटकॉम ने शुरूआती दौर में मुफ्त सेवायें दी। “इसने हमारे लिए वित्तीय मुश्किलें शुरू कर दी।” हितेश कहते हैं 

“हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने विचार को लागू करने की थी और इसमें हम बचाव की हालत में ज्यादा थे। हमने साहस जुटाया और मॉडल को बदला। नए मॉडल के लिए स्टोर्स को सब्सक्रिप्शन के लिये कुछ नाम मात्र का मूल्य देने की जरुरत थी। इसने हमारे लिए काम किया। हमने पाया कि स्टोर्स हमारे साथ भागीदार बनने में अधिक रुचि रखते हैं, हमारी ऑर्डर बुक भरनी शुरू हो गयी।”

हितेश की एक कॉर्पोरेटर से संस्थापक तक की यात्रा बहुत बड़ी सीख है। वह कहते हैं “मेरा मानना है कि किसी स्टार्टअप की सबसे बड़ी बेवकूफी मुफ्त में सेवा देना है। पैसे को पहले दिन से ही व्यवसाय में शामिल रखिये। यह हमेशा आपके पक्ष में कार्य करेगा।”