एक किसान के बेटे ने शहर में बना डाला अॉरगेनिक खेत, यूएनडीपी ने किया सम्मानित

किसान के बेटे ने किया ऐसा काम, कि यूनडीपी ने किया सम्मानित...

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बेंगलुरू के आर्य पुदोता केवल 18 साल के हैं। उन्होंने ऑरगेनिक खेती में एक नया बेंचमार्क बनाया है। घर के किचन गार्डन से शुरू हुई उनकी ये खेती आज हजारों लोगों के लिए मिसाल है।

फोटो साभार: thelogicalindian.com
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जब गांव से शहर में आने वाले लोग अपनी पहचान छुपाने लगते हैं और खेती-किसानी से अपने सारे संबंधो से इंकार कर देते हैं, ऐसे समय में बेंगलुरू के आर्य पुदोता शान से खुद को किसान का बेटा कहते हैं।

12वीं में पढ़ने वाले आर्य ने अपनी मां के किचन गार्डन से प्रेरणा लेकर 'My organic farm' नाम से अपना एक यूट्यूब चैनल लॉन्च किया, जिसके जरिए वह लोगों को ऑरगेनिक फार्मिंग के बारे में बताते हैं। आर्य का ये यूट्यूब चैनल दुनिया भर में काफी लोकप्रिय हो रहा है।

'मैं एक किसान का बेटा हूं, मेरे बाप-दादा सब किसानी करते थे। मुझे अपने किसान परिवार से होने पर गर्व है।' ऐसे दौर में जब गांव से शहर में आने वाले लोग अपनी पहचान छुपाने लगते हैं, खेती-किसानी से अपने सारे संबंधो से इंकार कर देते हैं, बेंगलुरू के आर्य पुदोता शान से खुद को किसान का बेटा कहते हैं। आर्य केवल 18 साल के हैं। उन्होंने ऑरगेनिक खेती में एक नया बेंचमार्क सेट कर दिया है। घर के किचन गार्डन से शुरू हुई उनकी ये खेती आज हजारों लोगों के लिए मिसाल है। साल 2015 में आर्य ने यूनाइडेट नेशंस इन्वाइरनमेंट प्रोग्राम की अगुवाई भी की थी। यूएनडीपी ने आर्य को उनके इस प्रेरक काम के लिए सम्मानित भी किया है।

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कैसे आया आर्य को ये शानदार आईडिया

आर्य जब पढ़ाई नहीं कर रहे होते, तो पुदोता लोगों को पढ़ा रहे होते हैं कि ऑरगेनिक सब्जियां कैसे उगाई जाएं। 12वीं में पढ़ने वाले आर्य ने अपनी मां के किचन गार्डन से प्रेरणा लेकर 'My organic farm' नाम से यूट्यूब चैनल लॉन्च किया था, जिसके जरिए वह लोगों को ऑरगेनिक फार्मिंग के बारे में बताते हैं। आर्य का ये यूट्यूब चैनल दुनिया भर में काफी लोकप्रिय हो रहा है। आर्य के इस चैनल के हजारों सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल की सबसे खास बात ये है कि आर्य अपने वीडियो पर आए सवालों का जवाब भी वीडियो बनाकर देते हैं। वो हर एक क्रिया खुद करके समझाते हैं। इससे लोगों की अॉरगेनिक खेती के बारे में समझ तेजी से बढ़ रही है।

आर्य की अपनी वेबसाइट भी है। इस पर्यावरण दिवस से आर्य ने एक किट भी बांटनी शुरू की है, जिसमें इस खेती को शुरू करने के लिए शुरूआती टूल्स मौजूद रहते हैं। इस खेती का एबीसी न जानने वालों के लिए ये किट काफी मददगार साबित हो रही है।

ऑरगेनिक फार्मिंग को प्रमोट करने के लिए आर्य काफी नजदीकी से कर्नाटक और तेलंगाना के वन विभागों के साथ काम कर चुके हैं। आर्य सुबह सैर पर निकलने वाले लोगों को अपने किचन गार्डन में लगाने के लिए टमाटर के 1000 पौधे भी बांट चुके हैं। आर्य इंदिरानगर के नैशनल पब्लिक स्कूल के स्टूडेंट हैं और अपने शौक से अॉरगेनिक फार्मिंग करते हैं। आर्य बताते हैं, 'जब मैं 12 साल का था, मेरी मां ने घर के बगल में 4000 वर्गफुट की जमीन खरीदी। वहां बिल्डिंग खड़ी करने की बजाय उन्होंने वहां किचन गार्डन बनाने का फैसला किया, ताकि हम बिना मिलावट का भोजन खा सकें। जब पड़ोसियों ने देखा तो उन्होंने उनसे सब्जियां खरीदने की इच्छा जतानी शुरू कर दी। ' उस समय आर्य खेती करने में अपनी मां की मदद करते थे और दो साल के भीतर वह पूरी तरह से किचन गार्डन की देखभाल करने लगे हैं।

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क्या होती है ऑर्गैनिक खेती

पूरी तरह से जैविक खादों का इस्तेमाल करके फसल पैदा करना जैविक खेती या ऑर्गेनिक खेती कहलाता है। दुनिया के लिए भले ही यह नई तकनीक हो, लेकिन हमारे देश में हमेशा से परंपरागत रूप से जैविक खाद पर आधारित खेती होती आई है। कम जमीन में, कम लागत में इस तरीके से ज्यादा उत्पादन होता है। यह तरीका फसलों में जरूरी पोषक तत्वों को संरक्षित रखता है और नुकसानदेह कैमिकल्स से दूर रखता है। साथ ही यह पानी भी बचाता है और जमीन को लंबे समय तक उपजाऊ बनाए रखता है। इस तरह ये पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मददगार है।

हालांकि, पिछले कुछ सालों में रासायनिक खादों पर निर्भरता बढ़ने के बाद से जैविक खाद का इस्तेमाल न के बराबर हो गया है। लेकिन जागरूकता बढ़ने से लोग वापस धीरे-धीरे अब ऑरगेनिक खेती की ओर मुड़ रहे हैं।

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