प्लास्टिक उद्योग में आठ लाख नौकरियां

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देश के युवाओं के सामने एक ओर तो बेरोजगारी का गंभीर संकट दिखता है, दूसरी तरफ कई ऐसे औद्योगिक क्षेत्र हैं, जहां बड़ी संख्या में रोजगार की संभावनाएं हैं। प्लास्टिक उद्योग में इस वक्त आठ लाख नौकरियां मिलने के अवसर हैं। इसके साथ ही प्रशिक्षित युवा मामूली पूंजी से स्वयं इस उद्योग में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं, रिस्क कम है, आमदनी अथाह। यह लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ का सालाना कारोबार हो चुका है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
इस समय देश में प्लास्टिक उद्योग में लगभग आठ लाख पद रिक्त हैं। ऐसे में इस उद्योग में अल्पशिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए छह माह का कोर्स करने के बाद नौकरी के पर्याप्त अवसर हैं। शोध और अनुसंधान के जरिए प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट कच्चे माल को विभिन्न प्रक्रियाओं के साथ ऐसे प्रोडक्ट्स बनाते हैं।

घटते वन क्षेत्र में विस्तार, प्रदूषण की रोकथाम एवं पेड़ों के संरक्षण संबंधी कानूनों के अस्तित्व में आने के बाद रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़े कार्यकलापों से लेकर फर्नीचर निर्माण, अन्तरिक्ष टेक्नोलॉजी आदि में प्लास्टिक की उपयोगिता दिनोदिन बढ़ती जा रही है। यह छोटा उद्योग रोजगार के काफी अवसर मुहैया करा रहा है। मामूली पूंजी से इस कारोबार में स्टार्टअप इंडिया एवं मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं का लाभ उठाया जा सकता है। इस क्षेत्र में सालाना 10 से 14 फीसदी की दर से वृद्धि हो रही है। इसमें विदेशों से भी लगातार धन का निवेश हो रहा है।

आज प्लास्टिक हर किसी के जीवन की महत्वपूर्ण जरूरत बन चुका है। आम आदमी से लेकर उद्योग जगत तक में प्लास्टिक का प्रयोग अनवरत बढ़ रहा है। इससे प्लास्टिक टेक्नोलॉजी का क्षेत्र व्यापक हो गया है। इसीलिए इस इंडस्ट्री में विशेषज्ञों की मांग भी लगातार बढ़ती जा रही है। यह लगभग साढ़े तीन हजार करोड रुपये का सालाना कारोबार हो गया है। इसमें लाखों लोगों के रोजगार के अवसर हैं। प्लास्टिक टेक्नोलॉजी का कोर्स पूरा कर लेने के बाद कंप्यूटर, इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स में नौकरी प्राप्त की जा सकती है।

सार्वजनिक क्षेत्र में प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट को पेट्रोलियम मंत्रालय, ऑयल ऐंड नेचुरल गैस कमीशन, इंजीनियरिंग संयंत्रों, पेट्रोकेमिकल्स, विभिन्न राज्यों में पॉलिमर्स कॉरर्पोरेशन्स, पेट्रोलियम कंजर्वेशन, रिसर्च असोसिएशन ऑफ इंडिया आदि के अलावा मार्केटिंग और प्रबंधन में करियर के सुअवसर लगातार बने हुए हैं। सरकारी क्षेत्र में प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट की शुरुआती सैलरी लगभग दस हजार रुपये प्रतिमाह होती है। प्राइवेट कंपनियों में शुरुआती स्तर पर 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह या इससे भी अधिक प्राप्त हो सकते हैं। दो-तीन वर्ष के अनुभव के बाद 20 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह आसानी से कमाए जा सकते हैं।

बेरोजगारी की बढ़ती चुनौतियों के बीच यदि आप खुद का रोजगार खड़ा करना चाहते हैं तो अवसरों की कमी नहीं। प्लास्टिक उद्योग महज एक से डेढ़ लाख रुपये की पूंजी से शुरू किया जा सकता है। कच्चे माल की आसान उपलब्धि के साथ प्लास्टिक उद्योग तेजी से विकास करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। कम्पोजिट मटेरियल आटोमोटिव्स, मेडिकल व हेल्थ केयर, स्पोर्ट्स, 3-डी प्रिटिंग तथा प्रोटोटाइपिंग जैसे उद्योगों पर फोकस कर गति देने का प्रयास किया जा रहा है। देश भर में प्लास्टिक उद्योग में रोजगार की बहुत अधिक संभावनाएं हैं।

इस समय देश में प्लास्टिक उद्योग में लगभग आठ लाख पद रिक्त हैं। ऐसे में इस उद्योग में अल्पशिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए छह माह का कोर्स करने के बाद नौकरी के पर्याप्त अवसर हैं। शोध और अनुसंधान के जरिए प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट कच्चे माल को विभिन्न प्रक्रियाओं के साथ ऐसे प्रोडक्ट्स बनाते हैं। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनिय¨रग एंड टेक्नोलॉजी (सीपेट) छह माह के छह तरह के हुनरमंद कोर्स करवाता है। आठवीं, दसवीं व बारहवीं और आईटीआई पास बेरोजगार अपनी दिलचस्पी और योग्यता के हिसाब से कोर्स कर सकते हैं।

इस समय प्लास्टिक उद्योग में इन कोर्सों की इतनी जबरदस्त मांग है कि प्रशिक्षु बेरोजगारों की प्लेसमेंट शत-प्रतिशत है और नौकरी की पक्की गारंटी है। प्लास्टिक उद्योग के क्षेत्र में अपने कारोबार अथवा नौकरी के लिए तरह-तरह के कोर्स हैं, जैसे - बीटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी, एमटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा/पीजी डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा/पीजी डिप्लोमा इन प्लास्टिक मोल्ड डिजाइन, पीजी डिप्लोमा इन प्लास्टिक प्रोसेसिंग ऐंड टेस्टिंग आदि।

इस तरह की तकनीकी पढ़ाई दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, दिल्ली गोविंद वल्लभपंत पॉलिटेक्निक, मुंबई इंडियन प्लास्टिक इंस्टीट्यूट, कानपुर हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अन्ना यूनिवर्सिटी, संत लोंगोवाल इंडस्ट्री ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी, गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, कोटा (राजस्थान) आदि में हो रही है। बीटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में प्रवेश पाने के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथमेटिक्स विषयों के साथ 10+2 में कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी है।

स्वयं का उद्यम खड़ा करने की दृष्टि से एक अध्ययन के मुताबिक देश में करीब 70 प्रतिशत पेट बोतलों की रिसाइकिलिंग हो रही है। सालाना नौ सौ किलो टन पेट बोतलों का देश में ही उत्पादन हो रहा है। रिसाइकिलिंग की 65 प्रतिशत प्रक्रिया पंजीकृत सुविधाओं से पूरी होती है जबकि 15 प्रतिशत की रिसाइकिलिंग असंगठित क्षेत्र में हो रही है। इसके अलावा 10 प्रतिशत का आम लोग घरों में पुन: इस्तेमाल कर रहे हैं। प्लास्टिक भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अनिवार्य अंग है। प्लास्टिक का प्रयोग पैकेजिंग, मूलभूत संरचना, प्रसंस्कृत खाद्य तथा उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों में हो रहा है।

भारतीय प्लास्टिक उद्योग में 25000 से भी अधिक इकाइयाँ शामिल हैं, जिनमें से 10 से 15 प्रतिशत को मध्यम स्तर की इकाइयों और शेष अन्य को लघु स्तर की इकाइयों के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से लगभग तैंतीस लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। प्लास्टिक प्रसंस्करण क्षेत्र की संस्थापित क्षमता चक्रवृद्धि वार्षिक दर से लगभग बारह हजार किलो टन हो चुकी है। इससे सरकार को प्रतिवर्ष लगभग छह हजार नौ सौ करोड़ का राजस्व प्राप्त हो रहा है।

हमारे देश में चार तरह के प्लास्टिक उद्योग सक्रिय हैं, पोलिमर्स, संसाधित प्लास्टिक, उपकरण विनिर्माता और रिसाइक्लिंग इकाइयाँ। प्लास्टिक उद्योग में कम लागत में श्रमिक तथा अधिक मात्रा में रिसाइक्लि प्लास्टिक भी असानी से उपलब्ध हो जाता है। भारत के साथ प्लास्टिक उत्पादों का व्यापार करने वाले शीर्ष 10 साझेदार देशों में यूएसए, यूएई, इटली, यूके, बेल्जियम, जर्मनी, सिंगापुर, साउदी अरब, चीन, हांगकांग आदि हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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