केबल टीवी स्टार्टअप ने इलाहाबाद के संतोष गुप्ता को बना दिया करोड़पति

केबल टीवी स्टार्टअप में सालाना 10 करोड़ से भी ज्यादा टर्नओवर के साथ इलाहाबाद के संतोष गुप्ता मिसाल बन गए हैं...

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जुनून हो तो किसी भी काम की महारत व्यक्ति को फर्श से अर्श पर पहुंचा सकती है। इलाहाबाद के संतोष गुप्ता के केबल टीवी स्टार्टअप की तो कुछ ऐसी ही दास्तान है। कभी वह नौकरी के लिए भटकते रहे, आज रोजी में ऐसी बरक्कत कि सालाना दस करोड़ उनका टर्नओवर है और एक दिन मुख्यमंत्री तक से उन्हें सम्मानित होने का भी अवसर मिला।

संतोष गुप्ता
संतोष गुप्ता
बढ़ते-बढ़ते इस काम से उन्हें ऐसी सफलता मिली कि एक दिन उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री जोगी आदित्यनाथ और गायिका अल्का याज्ञिक के साथ भी वक्त बिताने का अवसर मिला। आज पैसा और शोहरत दोनो उनके पास है।

केबल टीवी स्टार्टअप में सालाना 10 करोड़ से भी ज्यादा टर्नओवर के साथ इलाहाबाद के संतोष गुप्ता मिसाल बन गए हैं। यद्यपि इस काम में चुनौतियां भी कुछ कम नहीं हैं। एक तरफ केबल टीवी के जरिये केंद्र सरकार 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को सस्ती इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराने की तैयारी में है। टेलीकॉम नियामक ट्राई की इस सिफारिश पर दूरसंचार मंत्रालय भी सक्रिय हो गया है। यह कदम तेज गति का इंटरनेट ब्रॉडबैंड माध्यम से बिना किसी अतिरिक्त खर्च के आमजन तक पहुंचाने के लिए है। इसके लागू होने पर धीमे और महंगे वायरलेस डेटा चलन पर अंकुश लगने की संभावना है। मौजूदा समय में देश में 93 फीसदी लोग इंटरनेट वायरलेस यानी वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं जबकि महज सात प्रतिशत लोग ब्रॉडबैंड यानी तारों के माध्यम से यह सेवा लेते हैं।

दुनिया भर में ब्रॉडबैंड का इतना खराब प्रतिशत किसी और देश में नहीं है। ट्राई की सिफारिशें मानने से तीन स्तर पर खर्च बचेगा। पहला केबल बिछाने, दूसरा ब्रॉडबैंड स्थापित करने और तीसरा ऑपरेटिंग का, जिसका लाभ सीधे उपभोक्ता को होगा। स्टार्टअप में इस चैलेंज के साथ ही दूसरी तरफ रिलायंस इंडस्ट्री की टेलिकॉम सेक्टर में दमदार एंट्री के बाद अब कंपनी केबल टेलिविजन कारोबार में उतरने जा रही है। रिलायंस इंडस्ट्री देश की बड़ी केबल नेटवर्क कंपनी DEN नेटवर्क का अधिग्रहण करने जा रही है। यह डील 2000-2200 करोड़ रुपए में होने की संभावना है। रिलायंस इंडस्ट्री ने इस डील से न तो इंकार किया है और न ही हामी भरी है। रिलायंस इंडस्ट्री अगर नेटवर्क का अधिग्रहण कर लेती है तो देश में केबल टेलिविजन कारोबार पर भी उसकी पकड़ हो जाएगी। कंपनी अपने जियो फोन के जरिए देशभर में पहले ही टेलिविजन के लिए डिजिटल सेवा शुरू करने के बारे में घोषणा कर चुकी है। कंपनी होम ब्राडबैंड और केबल टेलिविजन सेवा को शुरू करने पर काम कर रही है।

इन चुनौतियों के बीच इलाहाबाद के संतोष गुप्ता के केबल नेटवर्क बिछाने के स्टार्टअप की बेमिसाल सफलता की कहानी ही कुछ और है। शहर के सिविल लाइंस में रहने वाले संतोष गुप्ता के पिता हीरालाल गुप्ता रेलवे में सुपरवाइजर थे और मां फूलकली गृहिणी। पढ़ाई में अव्वल रहे संतोष के 12वीं पास करते ही 1995 में एनडीए का फॉर्म भरा और एग्जाम भी निकाल लिया था, उनको ट्रेनिंग के लिए भी कॉल कर लिया गया, लेकिन किन्हीं वजहों से उनका नाम प्रतीक्षा सूची में चला गया। इसके बाद पढ़ाई से उनका मन हट गया लेकिन घरवालों के दबाव के कारण अगले साल इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में बीकॉम में एडमिशन ले लिया। वहां भी कुछ अच्छा नहीं रहा। वह परीक्षा देने ही नहीं गए। इससे उनका एक साल और बेकार गया। अगले साल डिस्टेंस से ग्रेजुएशन किया। इसी दौरान उनके दिमाग में एक बात आई कि वह क्यों न खुद का कोई काम शुरू करें।

दिक्कत ये थी कि उनके पास न इतना पैसा था कि उससे कोई काम-धंधा शुरू कर सकें, न उन्हें किसी तरह व्यापार-कारोबार का अनुभव। उनके परिजन चाहते थे कि वह कोई सरकारी नौकरी करें। वह मंशा तो पूरी होने से रही। अब उन्हें एक ही रास्ता सूझ रहा था कि पहले वह कोई ऐसा काम सीखें, उसमें अनुभव लें, फिर पैसे जुटाएं, उसके बाद खुद का बिजनेस शुरू करें। नब्बे के दशक में उन दिनो टीवी का बूम आया हुआ था। घर-घर केबल टीवी का जाल बिछना शुरू हो गया था।

संतोष गुप्ता के मन में अपने बिजनेस का जुनून पहले से था ही, उन्होंने इसी काम में अपना भविष्य आजमाने के लिए स्टार्टअप शुरू किया। पहले धीरे-धीरे उसके बारे में सारी जानकारियां इकट्ठी कीं। उससे सम्बंधित व्यावहारिक दिक्कतों को जाना-समझा और तीन-तीन सौ रुपए लेकर घर-घर टीवी प्रसारण के लिए केबल बिछाने के काम में जुट गए। इससे पहले उन्हें इस काम में भी घर वालों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। घर वाले नहीं चाहते थे कि वह कोई ऐसा काम करें। घर वालों को उसमें कई तरह की खामियां नजर आती थीं लेकिन संतोष उससे तनिक भी विचलित होने की बजाए सीढ़ी उठाकर खुद लोगों के दरवाजों पर दस्तक देने लगे। एक-एक कर लोग उनके साथ जुड़ते चले गए। उन्हे अपने काम में मजा आने लगा और पैसा भी। बढ़ते-बढ़ते इस काम से उन्हें ऐसी सफलता मिली कि एक दिन उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री जोगी आदित्यनाथ और गायिका अल्का याज्ञिक के साथ भी वक्त बिताने का अवसर मिला। आज पैसा और शोहरत दोनो उनके पास है। यद्यपि उन्हें केबल टीवी नेटवर्क बिछाने में स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप का भी सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने अपने स्टार्टअप को बुलंदियों पर पहुंचा दिया। आज उनके इस काम में सालाना 10 करोड़ से भी ज्यादा का टर्नओवर है।

शहर में इधर, जब से केबल टीवी का डिजिटलाइजेशन शुरू हुआ है। मल्टी नेशनल कंपनियों और ऑपरेटर्स के बीच खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। डेन और हैथवे जैसी मल्टी नेशनल कंपनियों की मनमानी जारी है। केबल ऑपरेटर्स से वह स्पो‌र्ट्स और मूवी चैनल्स के बदले में बढ़ा हुए शुल्क की लगातार मांग कर रही हैं। इसी के चलते शहर में हजारों कनेक्शन आए दिन बंद कर दिए जा रहे हैं। कंपनियों का कहना है कि स्पो‌र्ट्स और मूवी चैनल की एवज में पब्लिक से प्रति कनेक्शन तीस से पचास रुपए एक्स्ट्रा वसूले जाएं।

केबल ऑपरेटर्स उनकी इस मांग को लेकर राजी नहीं हैं। उनका कहना है कि पहले ही पब्लिक से सौ की जगह प्रति माह डेढ़ सौ रुपए वसूला जा रहा है। इसमें अतिरिक्त एमाउंट बढ़ा दिए जाने से दिक्कत हो सकती है। आपसी लड़ाई का असर शहर के कई हिस्सों में देखा गया है। कई एक केबल ऑपरेटरों ने तो बीस से तीस रुपए बढ़ाकर वसूली भी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि स्पो‌र्ट्स चैनल के पैकेज के लिए अलग से तीस रुपए जमा करने पड़ रहे हैं। इस मनमानी से बचने के लिए केबल ऑपरेटर्स चाहकर भी अपने को नहीं बचा पा रहे हैं। ऑपरेटर खुद को दूसरे नेटवर्क से अपनी मर्जी से जुड़ नहीं सकते। ऐसा करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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