उदास,निराश,हताश लोगों की मदद ने मालति को बनाया दुनिया-भर में मशहूर

लोगों को उनके लक्ष्य तक पहुँचाने में मदद करना ही है मालति का लक्ष्यविपरीत परिस्थितियों में ही मिली नयी सोचअनुभव के आधार पर लिखी किताबें भी खूब बिकींकॉर्पोरेट संस्थाएं भी अब लेने लगी हैं सलाह

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इंसान की ज़िन्दगी में बदलाव होते रहते हैं। परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहती। उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। ख़ुशी , तरक्की , संतुष्टि , कामयाबी के लिए जद्दोजहद लगी रहती है। लेकिन, कई लोग ज़िन्दगी के सफर में लगने वाले कुछ झटकों से टूट जाते हैं। मुश्किलों में उलझ जाते हैं। इन लोगों को आगे का रास्ता आसान नहीं दिखता। निराशा और हताशा उन्हें घेर लेती है। लोग अपने ही बनाये बंधनों में फंस कर रह जाते हैं। लक्ष्य दूर और असाध्य नज़र आता है। लेकिन, अगर ऐसे ही हालत में अगर कोई काबिल और अनुभवी गुरु मिल जाए जो नयी उम्मीद जगती है , हौसले फिर से बुलंद होने लगते हैं। गुरु के मार्ग-दर्शन से ज़िन्दगी को एक नयी दशा-दिशा मिलती है। ख़ास बात तो ये है कि मौजूदा समय में रफ़्तार, चुनौतियों और प्रतिस्प्रधा से भरी ज़िन्दगी में काबिल और सही गुरु की ज़रुरत बेहद बढ़ गयी है।

मालति भोजवानी एक ऐसे ही गुरु की भूमिका निभा रही हैं। दुनिया-भर में लोग अब मालति को "लाइफ कोच" या फिर "ओन्कोलॉजिकल ट्रेनर" के नाम से जानते हैं। मालति हज़ारों लोगों की मदद कर चुकी हैं। उनकी किताबें भी लोगों में काफी लोकप्रिय हैं। निराश , उदास , हताश लोगों की मदद करने और उनका मार्ग-दर्शन करने के अलावा मालति इन दिनों कई इच्छुक लोगों को गुरु-मन्त्र देते हुए उन्हें भी "लाइफ कोच" और "ओन्कोलॉजिकल ट्रेनर" बना रही हैं।

आपको शायद ये जानकार थोड़ा आश्चर्य होगा कि बड़ी कठिनाइयों के दौर से गुज़रते समय ही मालति ने मुश्किलों से दो-चार हो रहे लोगों की मदद करने, उनका हौसला बढ़ने, उनमें फिर से उत्साह और उमंग जगाने के लिए काम करने का फैसला किया।

ये भी दिलचस्प बात है कि मालति के करियर की शुरू बतौर शिक्षक ही हुई थी। मालति ने इंडोनेशिया के एक स्कूल में इंग्लिश पढ़ना शुरू किया था। फिर कुछ दिनों बाद मालति ने फैशन डिजाइनिंग सीखा और हीरे-जेवरातों की बारीकियों को समझने की कोशिश की। इस पढ़ाई के बाद मालति ऑस्ट्रेलिया में परिवार के कारोबार में शामिल हो गयीं। जैसा कि अमूमन हर भारतीय परिवार में होता है, मालति की भी जल्द ही शादी कर दी गयी। शादी के समय मालति ने सुन्दर , उज्जवल और खुशियों से भरी ज़िंदगी के सपने देखे थे। उसे उम्मीद थी कि वो और उसके पति मिलकर सारे सपनों को साकार करेंगे। लेकिन, जैसा सोचा था वैसा नहीं हुआ। कुछ कारणों से पति-पत्नी की रिश्ते में दरार पड़ गयी। २६ साल की उम्र में ही मालति अपने पति से अलग हो गयी।

सब कुछ अचानक बदल गया। ऐसे लगा जैसे हर तरफ मुश्किल ही मुश्किल है। अपनी एक बिटिया के साथ मालति अलग-थलग पड़ गयी थी।

उसे ज़िन्दगी में फिर से शान्ति और उत्साह के लिए कुछ करने की इच्छा सताने लगी।

मालति ने अमेरिका के मशहूर "लाइफ कोच" टॉनी रोब्बिन्स के सेमिनार में शामिल होने का फैसला लिया। इस सेमीनार से मालति ने अपने दुःख-दर्द को भुलाने की शुरुआत की। मालति अब धीरे-धीरे व्यक्तिगत विकास के अलग-अलग पहलुओं को समझने लगी थी। वो व्यक्तिगत विकास और लोगों की मानसिक-मनोवैज्ञानिक परेशानियों को सुलझाने के तौर-तरीकों में दिलचस्पी लेने लगीं। उसने इन विषयों पर अपना शोध शुरू किया । सम्बंधित विषयों पर कोर्स भी किये और डिग्रीयां और सर्टिफिकेट हासिल किये।

इन सब की वजह से मालति को एहसास हो गया कि कोई और नहीं बल्कि वो खुद ही अपनी समस्याओं को सुलझा सकती है। उसने ठान ली कि वो अब कभी अपने आप को "पीड़िता" नहीं मानेगी। कभी परिस्थितियों के सामने नहीं झुकेगी। खुद को कभी दीन, दुखी या फिर निराश न होने देगी और न ही अपने आप को कभी ऐसा समझेगी।

व्यक्तिगत-विकास के पाठ्यक्रमों की कक्षाओं , सेमिनारों में हिस्सा लेने और बड़े-बड़े लाइफ कोच के भाषण और व्याख्यान सुनने के बाद मालति की ज़िंदगी में बहुत बड़ा बदलाव आया । वो अब बिलकुल अलग महिला थी। उसके जीवन में नया उत्साह था , नयी उमंग थी। नया जोश था और दूसरों के किये कुछ अच्छा करनी की प्रबल इच्छा थी।

मालति ने इंटरनेशनल कोच फेडरेशन में अपना नाम दर्ज़ करवाने में देरी नहीं की। फेडरेशन से लाइफ कोच बनने की ट्रेनिंग ली। इसके बाद मालति ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वैसे शरुआती तीन साल चुनौतियां भरे थे। आर्थिक रूप से भी समस्याएँ उत्पन्न हो रही थीं। लेकिन, मालति अब जीवन को सही ढंग से जीने की कला सीख चुकी थी। उसने अब हार नहीं मानी और लगातार आगे बढ़ती गयी। कुछ लोगों से उसे "कोच" की भूमिका छोड़कर नौकरी करने की सलाह दी थी। चूँकि मालति के इरादे पक्के थे और लक्ष्य तय था वो आगे बढ़ती चली गयी।

मालति की गिनती आज देश के सबसे लोकप्रिय और कामयाब "लाइफ कोचों" में होती है।

मालति ये कहने में कोई हिचक नहीं करती कि लाइफ कोच के रूप में वो किसी की समस्या या परेशानी को दूर नहीं कर सकती बल्कि उसे दूर करने के लिए ज़रूरी प्रेरणा और उत्साह देने और रास्ता दिखाने का काम करती हैं।

एक दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है मालति को "लाइफ कोच" बने हुए। वो अब भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में जाकर भी लोगों को अपनी सलाह दे रही हैं और समस्याओं- परेशानियों से बाहर निकलने के रास्ते बता रही हैं।

एक कामयाब लाइफ कोच होने के साथ-साथ मालति आज एक सफल उद्यमी भी हैं। उन्होंने अब तक ५०० से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षित किया है और नए-नए लोगों को लाइफ कोच बनाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

अपने " मल्टी कोचिंग इंटरनेशनल" नामक वेंचर के ज़रिये मालति इन दिनों सिर्फ एकल व्यक्तियों को ही नहीं बल्कि समूह में भी "जीवन को सही मायने में जीने और खुश रहने" के तरीके बता रही हैं।

मालति की सलाह लेने वाले लोगों में देश के कई नामचीन हस्तियों के अलावा दुनिया की कई मशहूर कंपनियां शामिल हैं। मालति कई कॉर्पोरेट संस्थाओं की सलाहकार बन गयी हैं। उनके ट्रेनिंग प्रोग्राम अब दुनिया-भर में चर्चा का विषय हैं।

वो इंटरनेट पर अपनी वेबसाइट और यूट्यूब जैसे मंचों से भी लोगों की सहायता कर रहीं हैं।

उनकी किताबें " डोंट थिंक ऑफ़ ए ब्लू बॉल " और " थैंकफुलनेस अप्रीशिएशन ग्रेटिट्यूड" दुनिया-भर में पढ़ी जा रही हैं।

अपने अनुभव के आधार पर लिखा लेख "सेवन रिकवरी स्टेप्स टू गेट ओवर ब्रेक अप " भी लोगों को शिक्षा देने वाला है।

भगवान में विश्वास रखने वाली मालति का नया फैसला है कि वो अबसे महिलाओं पर अधिक ध्यान देंगी।

इस बात में दो राय नहीं है कि मालति की यात्रा से भी लोग बहुत कुछ खूब-ब-खुद सीख सकते हैं। मालति ने व्यक्तिगत विकास के लिए अनूठे और सफल ट्रेनिंग प्रोग्राम और उनके तौर-तराके इजात किये हैं। इन प्रोग्राम्स का मूल मकसद लोगों को उनके व्यक्तिगत लक्ष्यों का निर्धारण करने और फिर उन्हें हासिल करने में उनकी मदद करना है।

एक समय परिस्थितियों के आगे झुकने वाली इस महिला ने किस तरह से खुद को परेशानियों से बाहर लाया और किस तरह दूसरों को परेशानियों से निजात दिलाने में सहायक बनी, वाकई कामयाबी की एक बढ़िया मिसाल है।

२२ साल की अपनी बेटी से भी प्रेरणा लेने वाली मालति ज़िन्दगी में खुश और संतुष्ट रहने में लोगों की मदद करते हुए इन-दिनों दुनियाभर में खूब नाम कमा रही हैं।

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