युद्ध में घायल सैनिकों के सम्मान में अकेले बाइक चलाकर देश भर में लोगों को जागरूक कर रही हैं मित्सु

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गुजरात के सूरत में रहने वाली 23 साल की मित्सु चावड़ा ने अपने राष्ट्रव्यापी सोलो बाइक ट्रिप 'राइड फॉर सोल्जर्स' नाम की एक मुहिम चला रही है।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर
शहीदों के सम्मान में सारा राष्ट्र शीश झुकाता है लेकिन जो सैनिक युद्ध में घायल होकर सेना से बाहर हो जाते हैं उनके प्रति समाज का एक बड़ा तबका उदासीन ही नजर आता है।

मित्सु इसी बारे में जागरूकता फैलाने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सहित छह राज्यों में लगभग 5000 किलोमीटर की यात्रा कर रही हैं।

युद्ध खत्म तो हो जाते हैं लेकिन अपने पीछे छोड़ जाते हैं, एक पक्ष की गर्वीली विजय, कईयों का बलिदान, शहीदों के परिवारोंं की विभीषिका और घायल सैनिक। शहीदों के सम्मान में सारा राष्ट्र शीश झुकाता है लेकिन जो सैनिक युद्ध में घायल होकर सेना से बाहर हो जाते हैं उनके प्रति समाज का एक बड़ा तबका उदासीन ही नजर आता है।

गुजरात के सूरत में रहने वाली 23 साल की मित्सु चावड़ा ने अपने राष्ट्रव्यापी सोलो बाइक ट्रिप 'राइड फॉर सोल्जर्स' नाम की एक मुहिम चला रही है। उन्होंनें 26 नवंबर, 2017 को युद्ध में घायल सैनिकों के लिए जागरूकता पैदा करने के लिए अपनी यात्रा शुरू की। मित्सु कहती हैं, "इन सैनिकों ने मातृभूमि की सेवा करते हुए अपने शरीर के अंगों को गंवा दिया। लेकिन हर चीज खोने के बावजूद ये सैनिक शायद ही उनकी योग्यता और बलिदान की स्वीकार्यता को प्राप्त करते हैं। इसलिए मैंने उनके बारे में जनता के बीच जागरूकता पैदा करने का सोचा।"

मित्सु इसके लिए गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सहित छह राज्यों में लगभग 5000 किलोमीटर की यात्रा कर रही हैं। अपनी यात्रा के दौरान वह स्कूलों, कॉलेजों, क्लबों के दौरे करती हैं और लोगों को संबोधित करती हैं। युद्ध में घायल सैनिकों के त्याग और समर्पण की याद दिलाती हैं। लोगों को शपथ दिलवाती हैं कि वो कभी उनका निरादर नहीं करेंगे। वो कहती हैं कि मैं अपने 25 वें जन्मदिन पर चाहती हूं कि कम से कम मैं देश के 25,000 लोगों के बीच इन सैनिकों के बारे में जागरूकता पैदा कर सकूं।

साभार: न्यूजसीन
साभार: न्यूजसीन

एक बाईकर्स वाली जैकेट पहने हुए, जींस की एक जोड़ी, जूते, दस्ताने, नी कैप और सभी बाइकिंग एक्सेजसरिज, साथ ही बड़े करीने से हेलमेट के अंदर बाँधे गए लंबे बाल, ये सब देखकर कोई भी आसानी से नहीं कह सकता कि वह एक लड़की हैं। मित्सु ने कहा कि उनकी यात्रा के दौरान उन्हें महिलाओं के स्वच्छ शौचालयों की कमी को छोड़कर किसी भी सुरक्षा मुद्दे पर दिक्कत नहीं आई। "कुछ बाईकर्स मुझे एक लड़के के रूप में समझते हैं और मुझे अंडरइस्टीमेट करते हैं। लेकिन बाद में जब वे जानते हैं कि मैं एक लड़की हूं और एक नेक कारण के लिए आगे बढ़ रही हूं तो उन सबने मेरी बहुत मदद की। लोग अब तक बहुत दोस्ताना और सहयोगी रहे हैं। पेट्रोल पंपों और रेस्तरां में लोगों के साथ बातचीत करते हुए मैं एक ब्रेक के लिए रुकती रहती हूं।

एक लेखापरीक्षक की बेटी, मित्सु ने कहा कि उसके माता-पिता ने शुरू में सोलो बाइक यात्रा के विचार का विरोध किया था। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि मैं ये सैनिकों के सम्मान में कर रही हूं। एक बड़े उद्देश्य लिए कर रही हूं। यात्रा के दौरान खराब मौसम और अचानक घटनाओं के कारण उवका मार्ग चार्ट बदलता रहता है। वो बताती हैं कि मैं एक पेशेवर राइडर नहीं हूं लेकिन मेरी यात्रा में मुझे बाइकिंग समुदायों से काफी समर्थन मिला। उन्होंने मुझे आवास और भोजन के लिए मदद की। मैं आज के युवाओं से अनुरोध करती हूं कि वे छोटी चीजों पर अपनी जिंदगी से निराश न हों। कई लोग मोबाइल फोन के लिए आत्महत्या कर रहे हैं या प्रेम प्रसंग पर। जीवन बहुत ही अनमोल है। हम सभी कुछ प्रयासों से दूसरों के जीवन में बदलाव ला सकते हैं।

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