माटुंगा बना देश का पहला महिला संचालित रेलवे स्टेशन

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महिला सशक्तीकरण की दिशा में कदम उठाते हुए सेंट्रल रेलवे ने माटुंगा स्टेशन पर सभी पदों पर महिला कर्मचारियों को नियुक्त कर दिया है। माटुंगा सेंट्रल रेलवे पहला ऐसा स्टेशन होगा, जिसमें सिर्फ महिलाकर्मी ही काम करती हों। इससे पहले जयपुर का मेट्रो स्टेशन श्यामनगर महिलाओं द्वारा संचालित स्टेशन है।

माटुंगा रेलवे स्टेशन को एक प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे कई अन्य स्टेशनों पर भी लागू किया जायेगा।

पिछले दो हफ्तों से माटुंगा रेलवे स्टेशन पर सिर्फ महिलाएं काम कर रही हैं। कुल 30 कर्मचारियों में 11 बुकिंग क्लर्क, 5 आरपीएफ कर्मचारी, 7 टिकट चेकर्स स्टेशन प्रबंधक ममता कुलकर्णी की निगरानी में काम कर रही हैं। ये महिलाएं 24 घंटे स्टेशन का काम कर रही हैं।

आज की महिलाएं हर क्षेत्र में नाम कमा रहीं हैं। पहले जिन क्षेत्रों में पुरुषों का ही दबदबा माना जाता था, अब वहां महिलाएं भी कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। समाज की सोच बदल रही है। महिला सशक्तीकरण की दिशा में कदम उठाते हुए सेंट्रल रेलवे ने माटुंगा स्टेशन पर सभी पदों पर महिला कर्मचारियों को नियुक्त कर दिया। माटुंगा सेंट्रल रेलवे पहला ऐसा स्टेशन होगा, जिसमें सिर्फ महिलाकर्मी ही काम करती हों। इससे पहले जयपुर का मेट्रो स्टेशन श्यामनगर महिलाओं द्वारा संचालित स्टेशन है।

उत्साह में हैं सारी महिलाएं

महिलाएं पिछले दो हफ्ते से यहां सभी काम कर रही हैं। कुल 30 कर्मचारियों में 11 बुकिंग क्लर्क, 5 आरपीएफ कर्मचारी, 7 टिकट चेकर्स स्टेशन प्रबंधक ममता कुलकर्णी की निगरानी में काम कर रही हैं। ये महिलाएं 24 घंटे स्टेशन का काम कर रही हैं। कुलकर्णी ने कहा कि 'अपने 25 साल के करिअर में मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं केवल महिला कर्मचारियों के साथ भी काम करूंगी। यह जादू की तरह लगता है।' कुलकर्णी 1992 में महली महिला स्टेशन मास्टर बनी थी। उन्होंने कहा कि 'हम परिवार की तरह काम करती हैं। इसमें जिम्मेदारी और सहयोग की भावना भी होती है। शुरू में कुछ परेशानी आई लेकिन अब सब कुछ सामान्य है।'

अनोखी पहल के कर्ता-धर्ता

उल्लेखनीय है कि महिलाओं को सशक्त करने के लिए यह अनूठा कदम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक डी.के. शर्मा ने उठाया है। उनके मुताबिक, 'मध्य रेलवे में हमारी महिलाओं को सशक्त बनाने में इससे अच्छा कोई तरीका नहीं है और यह विशेष स्टेशन इस बारे में सब कुछ कह रहा है। हमारे कुछ पैसेंजर्स रिजर्वेशन सेंटर और उपनगरीय ट्रेनों में टिकटिंग सिस्टम पूरी तरह महिलाओं द्वारा संभाले जाते हैं। इसके बाद फैसला लिया गया कि एक पूरा स्टेशन महिलाओं को सौंपा जाना चाहिए।'

कहा जा रहा है कि इस स्टेशन को एक प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो कई अन्य स्टेशनों पर भी इसे लागू किया जा सकता है। वहीं इस फैसले के बाद महिला कर्मचारी बेहद खुश हैं।

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