IIM से पढ़ने और कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़कर एक महिला के लेखक बनने की कहानी

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 ग्लोबल कंपनियों में कई सालों तक ब्रैंड मैनेजमेंट की नौकरी करने के बाद एक समय स्वाति को लगा कि अब वे इस काम को आगे नहीं कर पाएंगी। वह इस नौकरी से ब्रेक लेना चाहती थीं।

स्वाति कौशल और उनकी नई कििताब
स्वाति कौशल और उनकी नई कििताब
 स्वाति ने इस टास्क को स्वीकार कर काम करना शुरू कर दिया, हालांकि उन्हें इस वजह से घबराहट भी हो रही थी। लेकिन धीरे-धीरे लिखते हुए उन्हें आत्मविश्वास आने लगा। 

वह कहती हैं कि कॉर्पोरेट एग्जिक्यूटिव की नौकरी करते-करते यह उनकी शख्सियत का मूलभूत हिस्सा बन गया था। लेकिन उनके दिल के भीतर कहीं न कहीं ये लगता था कि अगर ऐसे ही सोचते रहे तो अपना सपना कभी नहीं पूरा कर पाएंगे। 

देश के सबसे प्रतिष्ठित मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट आईआईएम कोलकाता से पढ़ाई करने के बाद अच्छी सैलरी वाली कॉर्पोरेट नौकरी मिल जाए तो फिर लोग समझते हैं कि उनका करियर सिक्योर हो गया। लेकिन जिन्हें नौकरी की दिनचर्या में ढलना पड़ता है उनके लिए एक समय के बाद यह बोझ लगने लगता है। ग्लोबल कंपनियों में कई सालों तक ब्रैंड मैनेजमेंट की नौकरी करने के बाद एक समय स्वाति को लगा कि अब वे इस काम को आगे नहीं कर पाएंगी। वह इस नौकरी से ब्रेक लेना चाहती थीं। उनके भीतर राइटर बनने का सपना पल रहा था जिसे वे पूरा करना चाहती थीं। लेकिन सिर्फ राइटर बनने के लिए अच्छी-खासी नौकरी को छोड़ना थोड़ा मुश्किल फैसला लग रहा था।

स्वाति ने न केवल अपनी कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ी बल्कि आज बेस्टसेलर्स की लेखकों में भी उनका नाम शुमार किया जाता है। उन्होंने 'पीस ऑफ केक' नाम से एक नॉवेल लिखा जो कि उनकी खुद के पुनर्खोज और अंतर्द्वंदों की दास्तान थी। जब उनसे पूछा गया कि एक सफल करियर से ब्रेक लेकर राइटर बनने का सफर कैसा रहा तो वह कहती हैं कि कॉर्पोरेट एग्जिक्यूटिव की नौकरी करते-करते यह उनकी शख्सियत का मूलभूत हिस्सा बन गया था। लेकिन उनके दिल के भीतर कहीं न कहीं ये लगता था कि अगर ऐसे ही सोचते रहे तो अपना सपना कभी नहीं पूरा कर पाएंगे। इस बात ने उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए प्रेरित किया।

नौकरी छोड़ने के बाद स्वाति को काफी हल्का महसूस होने लगा। ऐसा लगा कि जैसे किसी बंधन से मुक्ति मिल गई है। लेकिन उन्होंने नौकरी अपने जुनून के लिए छोड़ी थी न कि आराम से छुट्टियां बिताने के लिए। लिखना स्वाति का सबसे पंसदीदा शगल रहा है। वह अपनी पूरी जिंदगी लिखने के इर्द-गिर्द ही बिताती रही हैं। शायद यही वजह है कि लेखन कार्य उनकी जिंदगी का सबसे प्रिय पेशा बन गया। वह अपनी कॉर्पोरेट नौकरी के दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि मार्केटिंग डिपार्टमेंट में काम करते हुए भी वे ब्रैंड्स के लिए क्रिएटिव टैग्स और लाइन का इस्तेमाल करती थीं, ताकि ऑडिएंस उससे आसानी से प्रभावित हो जाए।

हालांकि इसी बीच पति की नौकरी की वजह से स्वाति को पूरे परिवार के साथ अमेरिका शिफ्ट होना पड़ गया। यूएस में एक सुबह वे बैठकर अपने पुराने कॉर्पोरेट के दिनों को याद कर रही थीं। उन्होंने उन सारे लम्हों को एक पेन के जरिए कागज पर लिखना शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी यादों को इतने अच्छे से लिखा कि उनकी एक पत्रकार दोस्त ने इसे किताब की शक्ल देने की सलाह दे डाली। स्वाति ने इस टास्क को स्वीकार कर काम करना शुरू कर दिया, हालांकि उन्हें इस वजह से घबराहट भी हो रही थी। लेकिन धीरे-धीरे लिखते हुए उन्हें आत्मविश्वास आने लगा। लेकिन स्वाति की जिंदगी में इसी बीच एक और ट्विस्ट आया। उन्हें अमेरिका में ही एक ऑनलाइन एजुकेशन कंपनी ने अच्छी नौकरी ऑफर कर दी।

इस नौकरी की खास बात यह थी कि यह लिखने-पढ़ने से जुड़ी हुई थी। उन्हें कंपनी में अच्छी पोजिशन मिलने के साथ-साथ सैलरी भी अच्छी-खासी ऑफर की जा रही थी। स्वाति के बच्चे भी इस उम्र में पहुंच गए थे कि खुद को संभाल सकें। इस स्थिति में वह काफी दुविधा में पड़ गईं। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि नौकरी करें या फिर अपने जुनून को आगे बढ़ाते रहें। वह इस द्वंद से कई दिनों तक गुजरती रहीं और आखिर में यह फैसला ले ही लिया कि नौकरी नहीं करनी है। हालांकि उनके दोस्तों ने नौकरी न जॉइन करने पर उन्हें पागल भी कह डाला। स्वाति बताती हैं कि उन्हें लग रहा था कि अगर वो फिर से नौकरी करने लगेंगी तो उनकी किताब कभी नहीं छप पाएगी।

स्वाति ने कहा कि अपने अंतर्बोध के हिसाब से उन्होंने नौकरी न करने का फैसला किया। वह बताती हैं कि उन्हें जुनून के आगे पैसा और सिक्योरिटी सब छोटी चीजें लगती हैं। उन्होंने अपना पहला उपन्यास 'पीस ऑफ केक' पूरा किया और मार्केट में उसे इतना पसंद किया गया कि उसे तीन भाषाओं में अनूदित भी किया जा चुका है और अब तक 6 संस्करण पब्लिश हो चुके हैं। महिलाओं को लेखन की ओर जाने की सलाह देने की बात पर वह कहती हैं कि बिना किसी डर के निर्भीक होकर लिखो और साधारण तरीके से अपनी बात कहने की कोशिश करो। वह कहती हैं कि लेखन रचने की प्रक्रिया है, किसी को नाम हासिल हो जाना तो महज एक संयोग है। उन्होंने 'पीस ऑफ केक' के अलावा, 'अ गर्ल लाइक मी' और 'ड्रॉप डेड' जैसी किताबें लिख चुकी हैं।

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