पचहत्तर पैसे के शैंपू बनाने से की थी शुरुआत, आज खड़ी कर ली 1600 करोड़ की कंपनी

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बचपन में पिता चल बसे। भाई से अनबन रहने लगी। न कोई नौकरी, न रोजगार, जिंदगी कैसे कटे। तो सीके रंगनाथन तमिलनाडु के एक छोटे से कस्बे से घर-परिवार छोड़ बेहतर भविष्य की तलाश में निकल पड़े। कामयाबी मिली। उनका सस्ता शैम्पू भारत ही नहीं, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मलेशिया, सिंगापुर तक सप्लाई होने लगा। आज कंपनी का सालाना टर्नओवर सोलह सौ करोड़ है। वह आईपीओ लाने जा रहे हैं।

सीके रंगनाथन (फोटो साभार- द वीकेंड लीडर)
सीके रंगनाथन (फोटो साभार- द वीकेंड लीडर)
सफल लोग सबकी परवाह करते हैं। उनका यह लिहाज भी उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। कुछ लोग सफलता के सिर्फ सपने देखते हैं जबकि सफल होने वाले पहले जागते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं। सीके रंगनाथन ने ऐसा ही किया। अब उनका शैम्पू हिट हो चुका है। 

कामयाबी का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत और हुनर कभी न कभी जरूर रंग लाता है। आज सेलिब्रेटी बन चुकी तमाम हस्तियों ने इस सच को साबित कर दिखाया है। सीके रंगनाथन उन्ही में एक हैं। जिंदगी में फिट और कामयाब होना है तो मेहनत तो करनी पड़ेगी। दरअसल, आधुनिक जीवनशैली ने लोगों को इतना आरामतलब बना दिया है कि अब पैदल चलने से भी कतराने लगे हैं। सोचिए, कि शाहरूख़ ख़ान उन फ़िल्मों से स्टार बने, जिन्हें लोगों ने छोड़ दिया था। इस बात से यह तो साबित हो जाता है कि उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से उन किरदारों को भी यादगार बना दिया, जिन्हें निभाने से लोग कतराते रहे थे।

अभी हाल ही में बॉलिवुड के निर्माता-निर्देशक करण जौहर ने अपने प्रॉडक्शन की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'धड़क' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान कहा था कि श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर और शाहिद कपूर के भाई ईशान आज इस स्टेज पर नेपोटिजम के सहारे नहीं, बल्कि अपनी कड़ी मेहनत के बल पर यहां तक पहुंचे हैं। बिग बी अमिताभ बच्चन भी ट्विट करते रहते हैं कि बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलता। चुरू (राजस्थान) के एक गरीब किसान परिवार में पैदा हुए जिस देवेन्द्र झांझरिया को बचपन में करंट का झटका लगने के बाद डॉक्टरों ने उनके मां-बाप को बताया था कि वह अब वह हाथ से कोई काम नहीं कर सकता, उन्हें ही खेल के जुनून ने ओलम्पिक में स्वर्ण पदक दिला दिया।

सीके रंगनाथन की मेहनत के जुनून की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जिसके पास जीवन-दृष्टि होती है, वैसी ही उसे अपने कार्यों में सफलता-असफलता मिलती है। सीके रंगनाथन के बिजनेस की कामयाबी तो दुनिया जान चुकी है, लेकिन ये कम ही को पता होगा कि मंजिल तक पहुंचने में उन्हें कितनी तरह की मशक्कत से कदम-कदम पर दो-चार होना पड़ा। इस समय वह केविनकेयर कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 1600 करोड़ रुपए है।

अब आइए जानते हैं, सीके रंगनाथन के संघर्ष की दास्तान। उनका जन्म तमिलनाडु के एक छोटे से कस्बे में हुआ। जब वह बाईस साल के थे, रोजी-रोजगार के चक्कर में घर छोड़कर बेहतर जिंदगी की तलाश में निकल पड़े। सिर पर बिजनेस, कारोबार का भी जुनून सवार था, जेब में पंद्रह हजार रुपए भी थे, सो, सोचा, कहीं ठीकठाक नौकरी नहीं मिली तो खुद का कोई काम-धंधा ही शुरू कर लेंगे, लेकिन अब अपने कदम पीछे नहीं लौटने देंगे। बचपन में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई। इसके बाद घर का माहौल बिगड़ने लगा। भाई से हर बात पर विवाद-तकरार की नौबत। घर छोड़ने के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने रहने का इंतजाम किया। ढाई सौ रुपए मासिक किराए पर एक कमरा लिया। एक केरोसिन स्टोव और साइकिल खरीदी। खाना स्वयं बनाने खाने लगे।

इस तरह दिल में कुछ कर गुजरने की ठान चुके रंगनाथन को लाख स्ट्रगल के बावजूद कोई मन की नौकरी तो मिली नहीं, आखिरकार वह अपना हुनर और किस्मत आजमाने में जुट गए। सन् 1983 में उन्हीं दिनो उनकी नजर शैंपू के एक ऐड पर पड़ी। कुछ पैसे तो उनके पास बचे ही हुए थे, इधर-उधर से थोड़े-बहुत और पैसे जुटाकर चिक ब्रैंड के नाम से सात एमएल का मात्र पचहत्तर पैसे वाला शैंपू बनाने लगे। सस्ता शैंपू लोगों को आकर्षित करने लगा। धीरे-धीरे उनका ब्रॉन्ड काफी पॉपुलर हो चला। दक्षिण भारत में लोग उन्हें जानने लगे तो शैंपू उत्तर भारत में भी बिकने लगा। और एक दिन उनके जुनून, मेहनत और वक्त ने इस तरह साथ दिया कि उनका शैंपू श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मलेशिया, सिंगापुर तक शैंपू सप्लाई होने लगा। आज वह चिक शैंपू बनाने वाली कंपनी 'केवनिकेयर प्राइवेट लिमिटेड' के मालिक हैं। उनकी कंपनी शैंपू के अलावा डेयरी, बेवरेज और सलून के बिजनेस में भी कर रही है। उनकी कंपनी में आज चार हजार से ज्यादा लोग नौकरी कर रहे हैं।

आदमी को जिंदगी में कामयाबी हासिल करने के लिए कुछ भी करना पड़ता है। दिल में कुछ करने का जुनून है तो दुनिया की कोई ताकत अमीर बनने से नहीं रोक सकती है। हर इंसान अपने जीवन में कामयाबी पाना चाहता है। इसके लिए उसको तरह-तरह के स्ट्रगल करने पड़ते हैं। सफलता पाने के लिए एक लक्ष्य होना जरूरी है, जो अपने लक्ष्य पर लगातार जुटे रहते हैं, वे कभी असफल नहीं होते हैं। सफलता सबको चाहिए लेकिन सफलता हर किसी को नहीं मिलती है। सफल होना कोई बच्चों का खेल नहीं है। अर्जुन की तरह चित्त केवल लक्ष्य पर केन्द्रित रहे तो एकाग्रता सफलता दिला ही देती है।

सफल लोग सबकी परवाह करते हैं। उनका यह लिहाज भी उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। कुछ लोग सफलता के सिर्फ सपने देखते हैं जबकि सफल होने वाले पहले जागते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं। सीके रंगनाथन ने ऐसा ही किया। अब उनका शैम्पू हिट हो चुका है। एक नामी ब्रांड बन गया है। अब तो शैम्पू मार्केट की सभी कंपनियों ने सैशे में भी माल बेचने का मॉडल अपना लिया है। कंपनी के ब्रांड्स-केविनकेयर के शैम्पू ब्रांड्स में चिक, नाईल है। फेयरनेस क्रीम ब्रांड फेयरएवर और डियोडरेंट एंड टाक में स्पिन्ज ब्रांड है। वर्ष 2017-18 में कंपनी का कुल टर्नओवर 1600 करोड़ रुपए हो चुका है। इससे पहले कंपनी का टर्नओवर 1300 करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी का लक्ष्य 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर का है। तो, उसी सफलता का परिणाम है कि आज उनकी कंपनी केविनकेयर आईपीओ लाने की तैयारी में है। उन्होंने सन् 2020 तक आईपीओ लाने का लक्ष्य रखा है। बताते हैं कि ये आईपीओ का साइज पांच सौ करोड़ से एक हजार करोड़ रुपए तक का हो सकता है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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