हेल्थ से जुड़े कुछ मिथ कुछ सच

हम भारतीय लोग हेल्थ से जुड़ी चीज़ों के लिए फैक्ट्स पर न जाकर मिथ पर यकीन करते हैं, जबकि हेल्थ इतना संवेदनशील मुद्दा है कि उस पर पहले स्वयं पर एक्सपेरिमेंट करें फिर यकीन करें।

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सेहत विषय ही ऐसा है, कि हमारे बीच कई तरह के मिथ और भ्रम पनपते रहते हैं। कुछ शारीरिक संरचना से जुड़े हुए, तो कुछ बीमारी के लक्षणों से जुड़े हुए। लेकिन दुनिया भर में हो रही शोधों से कई मिथों से परदा हट गया है। जानें कुछ मिथ और उनसे जुड़ी सच्चाईयां...

हम भारतीय लोग हेल्थ से जुड़ी चीज़ों के लिए फैक्ट्स पर न जाकर मिथ पर यकीन करते हैं, जबकि हेल्थ इतना संवेदनशील मुद्दा है कि उस पर पहले स्वयं पर एक्सपेरिमेंट करें फिर यकीन करें। इन्हीं सबको लेकर अक्सर शोध और अध्ययन होते हैं। एक नज़र डालते हैं, हेल्थ से जुड़ी उन शोधों और अध्ययनों पर जो मिथ पर गिरे पर्दे को उठाने का काम करते हैं।

क्या दूध कफ़ बनाता है?

तीन सौ मरीजों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार दो तिहाई मरीजों का मानना था, कि दूध पीने के कारण बलगम या कफ बनता है, लेकिन ये बात वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित नहीं हो पाई है। उपरोक्त अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों को वायरल बुखार था उनमें से कुछ ने स्वेच्छापूर्वक काफी मात्रा में दूध का सेवन किया। दूध पीने वाले मरीजों में से किसी के शरीर में न कफ बना और न ही इस वजह से कंजेशन हुआ।

क्या बीमार ठंड में ज्यादा होते हैं?

ज्यादातर लोगों का मानना है कि ठंडे मौसम में शरीर ज्यादा बीमार होता है, जबकि शोध बताते हैं कि ठंडे मौसम में रोग अपेक्षाकृत कम फैलते हैं। दूसरे ठंडे मौसम में या ठंडी चीज़ों से बीमार लोग कम पड़ते हैं बजाये दूसरी चीज़ों के। हां, यह ज़रूर हो सकता है कि ठंड के मौसम में लोग बाहर कम निकलना पसंद करते हैं और घरों के अंदर ही दुबके रहते हैं, जिसके फलस्वरूप हो सकता है कि वे रोगाणुओं की पकड़ में आ जाएं। लेकिन यह तो किसी अन्य मौसम में भी हो सकता है।

क्या गाजर खाने से आंखों की रोशनी तेज होती है?

यह सही है कि गाजर में भारी मात्रा में विटामिन-ए होता है, जो अच्छी आईसाइट के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। पर इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि इससे आंखों की ताकत बढ़कर एक्स-रे विजन जैसी हो जाएगी। सच्चाई ये है कि इस धारणा को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने जर्मनी की सेनाओं को मूर्ख बनाने के लिए प्रसारित किया था। असल में ब्रिटिश सरकार नहीं चाहती थी कि जर्मनी की सेना यह जाने कि वे उनके आक्रमण से बचने के लिए रडारों को सीमा क्षेत्र में लगा रहे हैं। इसलिए उन्होंने प्रचारित किया कि हम अपने सैनिकों की दृष्टि को तेज बनाने के लिए सीमा-क्षेत्र में गाजर बो रहे हैं। क्योंकि गाजर खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

क्या अंग चंटखाने से होता है आर्थराइटिस?

ऐसा माना जाता है कि उंगलियों या शरीर के अन्य अंगों को चटखाने से आर्थराइटिस हो जाता है, लेकिन आज तक किसी शोध या केस स्टडी में यह बात प्रमाणित नहीं हो सकी है।

क्या रोज शौच न जाना बीमारी है?

यह आधा सच है, कि रौजाना शौच जाना साफ पेट की निशानी है और यदि व्यक्ति रोज शौच नहीं जा रहा है, तो उसे कब्ज या अन्य कोई बीमारी है, क्योंकि अध्ययन बताते हैं, कि एक व्यक्ति यदि हफ्ते में तीन बार भी शौच जाता है तो वह स्वस्थ है।

इसलिए इन सभी भ्रमों को एक तरफ रख कर वो करें, जिससे शरीर स्वस्थ रहता है।

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