बड़े-बड़ों को हैरत में डाल देती हैं गीता और कुरान को कंठस्थ करने वाली ये लड़की

'गीता गर्ल' मरियम सिद्दीकी इसलिए फैला रही हैं गीता और कुरान का संदेश...

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गीता के कुल 18 अध्यायों के 700 श्लोक, साथ में कुरान के भी कुल 114 अध्यायों के 320,015 शब्द कंठस्थ कर लेना सचमुच हैरतअंगेज है लेकिन हमारे देश के महंगी फीस और चमक-दमक भरे आधुनिक स्कूलों से नहीं, बल्कि संसाधनहीन पाठशालों से ऐसे होनहारों का उदय हो रहा है। ऐसी ही होनहार हैं रिदा, मरियम, कुलसुम, सोनम जैसी मासूम। रिदा ने तो जन्मांध होने के बावजूद यह कमाल कर दिखाया है।

पीएम मोदी के साथ मरियम और उसके पैरेंट्स
पीएम मोदी के साथ मरियम और उसके पैरेंट्स
 गीता का एक-एक श्लोक याद रख पाना विद्वान बड़े-बुजुर्गों के लिए भी आसान नहीं होता है। 'गीता गर्ल' मरियम सिद्दीकी का कहना है कि गीता और कुरान का संदेश फैलाकर सामाजिक सद्भाव कायम करना ही उसके जीवन का अब पहला उद्देश्य है। 

चमक-दमक और महंगी फीस वाले आधुनिक स्कूलों की पढ़ाई मैकाले की शिक्षा व्यवस्था में जिस तरह के नागरिक तैयार कर रही है, हर अभिभावक को पता होगा लेकिन देश की संसाधन हीन पाठशालाओं से ऐसे मेधावी बच्चे निकलेंगे, जानकर यकीन नहीं होता है। इतना ही नहीं, विलक्षण प्रतिभाओं के धनी इन होनहार बच्चों ने हमारे देश की समरस गंगा-यमुनी संस्कृति को भी आप्लावित किया है। किसी मुस्लिम बच्चे को पूरी गीता कंठस्थ है तो किसी हिंदू बच्चे को कुरान की समस्त आयतें।

उल्लेखनीय है कि श्रीमद्भगवत गीता में कुल 18 अध्याय, 700 श्लोक हैं और कुरान में कुल 114 अध्याय, 320,015 शब्द हैं। विगत वर्ष ग्वालियर (म.प्र.) की रहने वाली सातवीं क्लास की मरियम को बारह साल की उम्र में ही गीता के समस्त श्लोक और कुरान की आयतें कंठस्थ हो गईं। मथुरा के इस्कॉन की प्रतियोगिता में फर्स्ट आने पर मरियम को 'गीता गर्ल' के खिताब से नवाजा जा चुका है। छपरा (बिहार) के डीपीएस की छह साल की छात्रा कृष्णप्रिया ढाईसाल की उम्र से वेदमंत्रों, उपनिषदों का उच्चारण करने लगी। पिछले साल से वह रामचरित मानस की दोहा-चौपाइयां के साथ प्रवचन भी कर रही है। उसे गीता के समस्त सात सौ श्लोक याद हैं। साथ ही मोमेंटम, एसिलेरेशन, वेलोसिटी, बल, कार्य, पावर, एनर्जी, प्रकाश आदि से जुड़े नियम भी कंठाग्र हैं।

अलीगढ़ (उ.प्र.) में देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी मदरसा-ए-चाचा नेहरू चला रही हैं। इस स्कूल में अब हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों के छात्र एक साथ कुरान-गीता का पाठ कर रहे हैं। सलमा अंसारी कहती हैं कि कुरान कंठस्थ कराने का मकसद बच्चों को स्मार्ट बनाना है। हिब्ज से दिमाग तेज होता है। अल्लाह और ओम् के उच्चारण से शरीर को बेशुमार ऑक्सीजन मिलती है। अभी दो दिन पूर्व उत्तराखंड में नौ वर्षीय जैद हसन ने कुरान कंठस्थ (हिफ्ज) करने का रिकॉर्ड बनाया है। जैद को सहारनपुर में आयोजित उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की कुरान कंठस्थ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान मिला है।

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इन होनहार बच्चों की कामयाबी पर खुशी लेकिन कुछ वर्ष पूर्व लंदन के कुरान याद करने की कट्टरता संबंधी एक वाकये को यादकर अफसोस भी होना लाजिमी है। लंदन के कार्डिफ क्राउन कोर्ट में भारतीय स्नातक महिला सारा के केस की सुनवाई के दौरान पता चला कि कुरान की आयतें नहीं याद करने पर उसने अपने बेटे यासीन के साथ ‘कुत्ते जैसा’ व्यवहार किया। एक दिन वह बेटे को तब तक पीटती रही, जबतक कि वह बेहोश होकर फर्श पर गिर नहीं गया। बाद में उसने दम तोड़ दिया। ज्यूरी को बताया गया कि सारा दंपति ने कुरान कंठस्थ करने के लिए यसीन को एक स्थानीय मस्जिद में दाखिला कराया था।

याद्दाश्त की दृष्टि से गीता और कुरान में जटिलता का अंतर है। श्लोकों को स्मृति में रखना कठिन होता है, जबकि कुरान सहजता से कंठस्थ हो जाता है। पूरी कुरान कंठस्थ कर डालने वाला एक ऐसा ही प्रतिभाशाली छात्रा हैं मेड़ता सिटी (राजस्थान) की नौ साल की कुलसुम रिजवी लेकिन मेरठ (उ.प्र.) की नेत्रहीन आठ वर्षीय मुस्लिम बच्ची रिदा जेहरा को तो वाकई कोई भी स्नेह से दुलराना चाहेगा। उसकी कामयाबी कमाल की है। नेत्रहीन होते हुए भी उसने मात्र आठ साल की उम्र में अपने कठिन जातीय संस्कारों में होने के बावजूद हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ गीता को पूरी तरह कंठस्थ कर लिया। 

रिदा जेहरा मेरठ शहर के जागृति विहार ब्रजमोहन ब्लाइंड स्कूल में पढ़ रही है। उसने गीता ब्रेल माध्यम से पढ़ी। उन्हीं दिनो रिदा की नन्ही उम्र में एक सुखद संयोग बना। चिन्मयी मिशन ने गीता के पंद्रहवें अध्याय पर स्कूल में एक प्रतियोगिता प्रायोजित की, जिसमें रईस हैदर की इस मासूम परी रिदा ने मुंहजबानी श्लोक पढ़ सुनाए। कमाल की बात तो ये है कि रिदा को गीता ही नहीं, कुरान भी कंठस्थ है। परिजन बताते हैं कि उसे दोनो धर्मों में एक समान आस्था है।

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एक ऐसी ही कुशाग्र छात्रा है सात-आठ साल की वाराणसी (उ.प्र.) की सोनम। उसे गीता के 18 अध्यायों के समस्त सात सौ श्लोक कंठस्थ हैं। सोनम बनारस के सुंदरपुर मोहल्ले में रह रहे कोचिंग टीचर सदाबृज पटेल की पुत्री है। चौथी क्लास की इस बच्ची की प्रतिभा से चमकत्कृत होकर काशी के विद्वत समाज ने उसे 'गीता गर्ल' नाम से समादृत किया है। 

इतना ही नहीं, सोनम को अंग्रेजी में लिखी गीता प्रेस की गीता के भी अठारहो अध्याय याद हैं। उसके ज्ञान पर मुग्ध स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहते हैं कि अब तक बारह-चौदह साल के ऐसे कुछ बच्चे तो नजर आए थे लेकिन सात साल में ही गीता कंठस्थ कर लेना आश्चर्यजनक है। यह तो स्वयं सिद्धा विदुषी है।

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ध्यातव्य है कि गीता का एक-एक श्लोक याद रख पाना विद्वान बड़े-बुजुर्गों के लिए भी आसान नहीं होता है। 'गीता गर्ल' मरियम सिद्दीकी का कहना है कि गीता और कुरान का संदेश फैलाकर सामाजिक सद्भाव कायम करना ही उसके जीवन का अब पहला उद्देश्य है। गीता और कुरान, दोनों में लगभग एक ही तरह की बातें लिखी हुई हैं। दोनों में कई एक समानताएं हैं। दोनों ग्रंथों के रचनाकाल और परिस्थितियों में कोई सामंजस्य तो नहीं है लेकिन दोनों की शिक्षाएं एक समान हैं। सच तो यह है कि दोनों ग्रंथों की मूल भावनाओं में कोई अंतर नहीं है। दोनों में प्रेम, सहिष्णुता, सद्कर्मों और दूसरों की भलाई पर जोर दिया गया है। सृष्टि के बारे में दोनों धर्मग्रंथों का मत एक है। जहां दुनियाभर में धर्म के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैं, सांप्रदायिक तनाव फैलाया जा रहा है, मरियम ने अपने कुशाग्र हुनर से सांप्रदायिक सद्भाव का अद्भुत संदेश दिया है।

मरियम के पिता आसिफ सिद्दीकी बताते हैं कि जब वह आठ साल की थी, एकदिन उसने उनसे पूछा कि अब्‍बा ये हिंदू क्‍या होता है? वह अगले दिन बाजार से गीता खरीद लाए। उसके बाद घर में पड़ी कुरान और गीता, दोनो पुस्तकें उन्होंने मरियम को थमाकर बोले- जिस दिन ये दोनो किताबें पूरी पढ़ लोगी, धर्म का मतलब तुम्हे समझ में आ जाएगा। उसे अपने पिता से किए प्रश्न का उत्तर जानने में चार साल लगे जरूर, लेकिन उसने दोनो धर्मग्रंथों को कंठस्थ कर लिया। आज उसकी प्रतिभा के बड़े-बड़े विद्वान लोहा मानते हैं। दुखद यह है कि जहां कई एक मुस्लिम बच्चों को गीता कंठस्थ है, हिंदू समुदाय का आज तक कोई ऐसा होनहार बच्चा सामने नहीं आ सका है, जिसे पूरी कुरान कंठस्थ हो। इसकी वजह भाषाई कठिनाई हो सकती है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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