इन्वेस्टमेंट बैंकर की जॉब छोड़कर इस युवा ने शुरू की टिफिन सर्विस

कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ 29 साल के गुरमीत कोचर ने शुरू किया टिफिन बिजनेस...

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 रेस्टोरेंट से जुड़े बिजनेस को साधना मुश्किल माना जाता है। क्योंकि छोटी सी गलती भी आपकी सारी मेहनत पर पानी फेर सकती है। लेकिन मुंबई में रहने वाले 29 साल के गुरमीत कोचर अपनी कॉर्पोरेट वाली नौकरी छोड़कर टिफिन के बिजनेस में सफलता अर्जित कर रहे हैं।

गुरमीत 
गुरमीत 
गुरमीत का हमेशा से स्टार्टअप शुरू करने का मन करता था, लेकिन कभी रिस्क लेने की हिम्मत नहीं हुई। वह अपनी कॉमर्स की पढ़ाई करने के बाद 20 साल की ही उम्र में 'एडलवेस कैपिटल' नाम की कंपनी में बतौर इन्वेस्टमेंट बैंकर नौकरी करने लगे। 

रेस्टोरेंट या टिफिन सर्विस जैसे खाने-पीने का बिजनेस शुरू करना काफी मुश्किल माना जाता है। इसे उन बिजनेसों में गिना जाता है जिसमें असफल होने की संभावना अधिक होती है। लेकिन इसमें होने वाले फायदे को देखकर लोग रेस्टोरेंट या स्टॉल लगाना शुरू करते हैं। मगर अक्सर देखा जाता है कि अधिककर खाने-पीने के बिजनेस छह महीने या साल भर में ही बंद हो जाते हैं। रेस्टोरेंट से जुड़े बिजनेस को साधना मुश्किल माना जाता है। क्योंकि छोटी सी गलती भी आपकी सारी मेहनत पर पानी फेर सकती है। लेकिन मुंबई में रहने वाले 29 साल के गुरमीत कोचर अपनी कॉर्पोरेट वाली नौकरी छोड़कर टिफिन के बिजनेस में सफलता अर्जित कर रहे हैं। हम आपको आज उनकी सफलता का राज बताने वाले हैं।

गुरमीत का हमेशा से स्टार्ट अप शुरू करने का मन करता था, लेकिन कभी रिस्क लेने की हिम्मत नहीं हुई। वह अपनी कॉमर्स की पढ़ाई करने के बाद 20 साल की ही उम्र में 'एडलवेस कैपिटल' नाम की कंपनी में बतौर इन्वेस्टमेंट बैंकर नौकरी करने लगे। यहां कुछ दिनों तक काम करने के बाद वह स्टैंडर्ड चार्टड जैसे नामी बैंक में गए। वहां काम करने के दौरान गुरमीत अपने घर से लंच ले जाते थे। एक बार उनके सहकर्मी को उनकी टिफिन का खाना इतना पसंद आया कि उसने अपनी एक महीने की पूरी सैलरी देने की बात कर दी। इस वाकये ने गुरमीत को घर जैसा खाना टिफिन में परोसने की प्रेरणा दे डाली।

गुरमीत ने अपनी नौकरी छोड़ दी और स्पाइसबॉक्स (SpiceBox) नाम से स्टार्ट अप शुरू कर दिया। गुरमीत बिजनेस वाली फैमिली से संबंध रखते हैं। उनके दादा देश विभाजन के वक्त अपने परिवार को लेकर मुंबई में आ बसे थे। बाद में उन्होंने यहां बिजनेस की शुरुआत की। गुरमीत ने भी नौकरी छोड़कर बिजनेस में भविष्य बनाने का फैसला किया। मुंबई जैसे शहर में रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों से आकर रहने वालों की अच्छी खासी तादाद है। इसमें से काफी लोग ऐसे होते हैं जो अकेले रहते हैं और अकेले रहने वाले लोगों के लिए अपने लिये खाना बनाना न तो किफायती होता है और न ही आसान।

इसके अलावा बाहर का खाना इतना अच्छा नहीं होता कि रोज रोज उसे खाया जा सके। इन्हीं सब बातों को सोचकर गुरमीत को लगा कि अगर लोगों को घर जैसा खाना उपलब्ध कराया जाए तो कितना अच्छा रहे। लेकिन गुरमीत ने टिफिन के रेट पर भी काफी ध्यान दिया। क्योंकि टिफिन सर्विस लगवाने वाले लोगों को पैसों का भी ध्यान रखना पड़ता है और वे खाने पर अधिक पैसे नहीं खर्च कर पाते। यह 2011 का वक्त था, उस वक्त स्मार्टफोन के जरिए खाना ऑर्डर करने की टेक्नोलॉजी नहीं पहुंची थी। गुरमीत ने किसी तरह अपनी वेबसाइट बनाई और शुरू में अपनी सेडान कार से ही खाने का टिफिन डिलिवर करने पहुंच गए।

गुरमीत बताते हैं, 'मैंने शुरू के छह महीने तक हर रोज 55 टिफिन डिलिवर किए। मैं खुद जाकर टिफिन की डिलिवरी करता था तो मुझे ग्राहकों से बात करने का मौका मिलता था। उससे मुझे पता चलता था कि कहां कमी है और उसे कैसे बेहतर किया जा सकता है।' छह महीने के बाद गुरमीत ने मुंबई के डब्बावाला असोसिएशन से डील कर ली। गुरमीत अपने फैमिली में बिजनेस का माहौल तो शुरू से देखते चले आ रहे थे लेकिन वो बताते हैं कि खाने का बिजनेस बाकी बिजनेस से काफी अलग होता है। शुरू के तीन महीने के बाद ही गुरमीत का कुक बिना बताए छोड़कर चला गया। उस वक्त उनकी मां ने खाना बनाने में मदद की। 100 लोगों के लिए अचानक से खाना तैयार करना आसान नहीं था।

लेकिन गुरमीत ने किसी भी हालत में खाने की क्वॉलिटी से समझौता नहीं किया। वह कहते हैं, 'मैं इस बिजनेस में काफी खुश हूं और इसे कभी नहीं छोड़ूंगा। मेरा मानना है कि जो भी अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं उन्हें अपने मुताबिक छोटे से शुरुआत करनी चाहिए। इससे काफी चीजें समझ में आती हैं। आपका देखने का नजरिया अलग हो जाता है और एक नई सीख मिलती है।' गुरमीत इस साल दिसंबर तक अपना बिजनेस बेंगलुरू और पुणे जैसे शहरों में भी बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने फूडपांडा, जोमैटो और स्विगी के जैसे ऑन डिमांड फूड ऑर्डर की सर्विस भी शुरू की है।

गुरमीत को इस बिजनेस में पांच साल हो गए हैं और आज वे हर रोज 1,000 टिफिन डिलिवर करते हैं। एक मील की कीमत 125 रुपये होती है जिसमें डिलिवरी चार्ज जुड़ा होता है। उन्हें फ्रेशमेन्यू और स्विगी से सी सीरीज की फंडिंग मिली है। उनके बिजनेस में इस साल लगभग 35 लाख का निवेश हुआ है। गुरमीत को इस बिजनेस में काफी लाभ मिला है, लेकिन वे बताते हैं कि कई सारे स्टार्ट अप अच्छी शुरुआत के बाद बंद हो गए या उन्हें किसी दूसरी कंपनी ने खरीद लिया। इसलिए खाने के बिजनेस में हर रोज नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

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