स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, इन 11 गलतियों से बचके…

कुछ गलतियां जो हर रोज़ होती हैं....

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(स्टार्टअप शुरू करने वाला अमूमन हर आंत्रप्रेेन्योर शुरुआती दौर में कुछ गलतियां करता है, वो कौन-कौन सी गलतियां हैं और उनको कैसे ठीक किया जा सकता है, बता रहे हैं फाइंडयोगी के संस्थापक नमन सारावगी)

मैं उन सभी लोगों का गुनहगार हूं। सहयोगियों के साथ काम करने की जगह पर फाइंडयोगी बनाने के 3 साल के दौरान मैंने 20-25 संस्थापकों से बातचीत की, हम लोग एक-दूसरे को हर रोज देखते थे, और कभी-कभार हम दोपहर के खाने के दौरान अपनी समस्याएं भी साझा करते थे। मैं कोई मदद तो नहीं कर पाता था, लेकिन मैंने उन गलतियों पर एक खास तरह का पैटर्न देखा जो हम हर रोज करते हैं। ज्यादातर अन्य संस्थापक मुझसे उम्र में दस साल बड़े थे, उन्होंने अच्छे संस्थानों में पढ़ाई की थी और जानी-पहचानी कंपनियों में नौकरी की थी, इसलिए ये अनुभव या उम्र की बात नहीं है। कई बार ये शायद डर और कई बार ये संभवत: सिर्फ आलसपन है।

यहां एक लिस्ट है, जिसमें सबकुछ व्यवस्थित नहीं है-

फ्लेक्सी टाइमिंग्स – 

हर रोज अपने काम पर कम से कम 10 घंटे रहने की कोशिश करें, खासकर सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक। इससे आप शारीरिक और मानसिक तौर पर सक्रिय और चुस्त रहेंगे। टीम के सदस्यों के साथ आमने-सामने मिलना महत्वपूर्ण है। गैर-पाबंद समय अनुशासनहीनता और प्राथमिकता को ध्यान न देने की निशानी है। अनुशासन से किसी भी चीज पर जीत हासिल की जा सकती है।

नौकरी पर किसी को रखने में ज्यादा वक्त नहीं देना – 

लोग सस्ता हवाई टिकट के लिए एक घंटा खर्च कर देते हैं, लेकिन उसकी जानकारी हासिल करने में थोड़ा भी वक्त नहीं देते जिन्हें उन्होंने नौकरी पर रखा है। याद रखिए, नल से महीने भर तक पानी बहते रहना एकमुश्त खर्च करने की तुलना में काफी महंगा पड़ता है।

कोई कोडिंग नहीं – 

एक संस्थापक के तौर पर आप या तो बनाते हैं या फिर बिक्री करते हैं, किसी और की जरूरत भी नहीं है। पहली बार, युवा संस्थापक आमतौर पर रोज का काम करना पसंद करते हैं और क्लर्किल काम खुद करते हैं और तकनीकी और बिक्री के काम के लिए कर्मचारी रखते हैं। हो सकता है आप इन स्टार्टअप्स के बारे में ज्यादा कुछ न सुना हो क्योंकि ऐसे स्टार्टअप्स लंबे समय तक नहीं टिकते हैं।

अन्य स्टार्टअप्स पर चर्चा करना – 

ये मेरी पसंदीदा चीजों में से एक है, और मैं अभी इससे ऊबा नहीं हूं। दो संस्थापकों की डॉट कॉम पहचान हो सकती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि दोनों एक ही उद्योग के हों। ऐसे में उनकी चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है। इसके बदले उसे अच्छी इस्तेमाल करने वाली चीज बनाने में ध्यान देना चाहिए या फिर किसी समस्या का समाधान करने की कोशिश करनी चाहिए। दूसरे स्टार्टअप्स का क्या हश्र हुआ, आप पर उसका कोई असर नहीं पड़ने वाला है।

एक लोगो बनाने की कोशिश – 

इस स्थिति को देखिए: आपको अभी ये भी पता नहीं कि आपका बनाया प्रोडक्ट बाजार के लिए फिट है भी या नहीं – ऐसे में आप कैसे जानेंगे कि आपका लोगो का क्या संदेश होना चाहिए? विजरॉकेट के लोगो को देखें, अस्पष्ट तरीके से लिखा हुआ है, लेकिन इसमें भी एक कहानी है। वैसे भी उनकी वेबसाइट शुरू होने से पहले से ही उनके पास ग्राहक थे।

तर्कों को अधूरा छोड़ना ग़लत – 

तर्क अच्छे होते हैं। उन्हें अधूरा कभी न छोड़ें। अधिक से अधिक डेटा जमा करें और फिर फैसला करें। हर अधूरी बहस की वजह से किसी प्रोडक्ट पर काम करने के लिए कई दिन लग सकते हैं। अगर दो लोग आपस में तर्क करने में आरामदेह महसूस नहीं करते हों तो उन्हें एक ही टीम में नहीं रहनी चाहिए।

ग्राहक शोध के लिए फेसबुक की खाक छानना – 

फेसबुक छेद वाला खरगोश के घर की तरह है। ऐसे लोगों पर घंटों बर्बाद न करें जिन्हें आप जानते तक नहीं। सिर्फ 10 डॉलर का एक विज्ञापन चलाएं और अपनी अवधारणा की जांच करें।

सबकुछ लिख नहीं दे रहे हैं – 

यह मैनेजमेंट 101 है। निर्देशों को लिखकर दें। मौखिक निर्देशों का लोगों तक पहुंचने में मुश्किल हो सकती है और इससे विवाद हो सकता है। जब आप कुछ नया बना रहे हों और आपकी सोच पूरी तरह तैयार भी न हो, तब लिखने से आपकी सोच को संरचना मिल सकती है।

मील के पत्थर नहीं वक्त के मुताबिक काम करना – 

आप ये कभी न कहें कि “हमलोग छह महीने में फंड एकत्र कर लेंगे।” ये कहना शुरू करें, “हमलोग तब फंड इकट्ठा करेंगे जब हम X मील का पत्थर हासिल कर लेंगे, इससे हमें Y मील का पत्थर हासिल करने में मदद मिलेगी।” और फिर आप उस एक मील के पत्थर की ओर ध्यान रखकर काम करना शुरू कर दें। इससे आपको ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। अपने फंडरेजिंग के लिए ये कहना छोड़ दें कि क्रिसमस की छुट्टियों के बाद फंड इकट्ठा करेंगे, या फिर ये परेशानी खत्म होने के बाद फंड जमा करेंगे या फिर पिछला निवेशक मना करेगा तब फंड इकट्ठा करने के लिए अगली कोशिश करेंगे। इसके इतर निवेश के लिए एक साथ कई लोगों से बात करना ठीक है और जब आपको एक से ज्यादा निवेशकों से सकारात्मक जवाब मिलने लगे तो कुछ निवेशकों को बड़ी विनम्रता के साथ मना कर दें।

स्टार्टअप तरह के लोगों को नौकरी पर रखें – 

एंजेलिस्ट या गिथब पर प्रोफाइल होना किसी बात का सबूत नहीं है। स्टार्टअप का उत्साही होना कोई हुनर नहीं है। आपके पास लोगों को प्रशिक्षण देने का वक्त नहीं है। ऐसे लोगों को नौकरी पर रखें जो आपके काम को पूरा कर सके। बड़ी कंपनियों में लोगों को नौकरी पर रखने की संस्कृति की नकल न करें – वो लोग पहले से ही जमीनी स्तर से ऊपर उठ चुके हैं।

बिना किसी वजह के सलाह को सुनना – 

आपको दूसरे स्टार्टअप के बारे में उतनी ही जानकारी मिलेगी जितनी आपको कोई निवेशक या दूसरा संस्थापक सदस्य बताएगा। अगर ये जानकारी आपतक किसी पत्रकार के माध्यम से आ रही है तो इसकी पूरी संभावना है कि ये मीडिया में ध्यान आकर्षित करने लिए किया गया हो। जो चीज उनके लिए काम कर रहा हो, वो आपके लिए कारगर नहीं होगा। अगर आप उसका हिस्सा नहीं हो तो आपको खबर की जानकारी नहीं होगी। इसलिए कहानियों को गौर से सुने और अपने जरूरत के मुताबिक उस पर आगे बढ़ें।


लेखक--नमन सारावगी

अनुवाद-साहिल