आखिर क्या वजह थी कि पूजा भट्ट ने कर ली शराब से तौबा!

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'ग़ालिब' छुटी शराब पर अब भी कभी-कभी, पीता हूँ रोज़-ए-अब्र ओ शब-ए-माहताब में' ग़ालिब यह शेर पूरे जमाने को मालूम हो। जाने-माने फिल्म निदेशक महेश भट्ट की बेटी पूजा भट्ट की शराबखोरी से तौबा करने की बात बाद में।

पूजा भट्ट
पूजा भट्ट
पूजा भट्ट ने 21 अगस्त, सोमवार को एक तस्वीर के साथ ट्वीट किया- 'आज शराब छोड़े हुए मुझे आठ महीने हो गए। लंबा रास्ता तय किया है, बाकी की यात्रा करनी है।' 

पिछले साल उन्होंने सार्वजनिक रूप से शराब पीने की अपनी लत का खुलासा किया था। फिर कहने लगीं कि वह शराबखोरी से छुटकारा पाने के लिए प्रयासरत हैं। 

ग़ालिब यह शेर पूरे जमाने को मालूम हो। जाने-माने फिल्म निदेशक महेश भट्ट की बेटी पूजा भट्ट की शराबखोरी से तौबा करने की बात बाद में। आइए, पहले एक ऐसे ही जाने-माने लेखक-पत्रकार रवींद्र कालिया की पियक्कड़ी वह एक जगजाहिर आपबीती जानते हैं, जिसे वर्ष 1997 की एक शाम अपने मन की बात साझा करते हुए उन्होंने लिखी थी- 'भूख कब की मर चुकी है, मगर पीने को जी मचलता है। पीने से तनहाई दूर होती है, मनहूसियत से पिंड छूटता है, रगों में जैसे नया खून दौड़ने लगता है। शरीर की टूटन गायब हो जाती है और नस-नस में स्फूर्ति आ जाती है। एक लंबे अरसे से मैंने जिंदगी का हर दिन शाम के इंतजार में गुजारा है, भोजन के इंतजार में नहीं।'

"अपनी सुविधा के लिए मैंने एक मुहावरा भी गढ़ लिया था- शराबी दो तरह के होते हैं। एक खाते-पीते और दूसरे पीते-पीते। मैं खाता-पीता नहीं, पीता-पीता शख्स था। मगर जिंदगी की हकीकत को जुमलों की गोद में नहीं सुलाया जा सकता। वास्ताविकता जुमलों से कहीं अधिक वजनदार होती है। मेरे जुमले भारी होते जा रहे थे और वजन हल्का। छह फिट का शरीर छप्प न किलो में सिमट कर रह गया था। धीरे-धीरे मेरे हमप्यातला हमनिवाला दोस्तोंल का दायरा इतना वसीह हो गया था कि उसमें वकील भी थे और जज भी। प्राशासनिक अधिकारी थे तो उद्यमी भी, प्रोफेसर थे तो छात्र भी। ये सब दिन ढले के बाद के दोस्त थे। कहा जा सकता है कि पीने-पिलाने वाले दोस्तों का एक अच्छा-खासा कुनबा बन गया था। डॉक्टर ने पूछा था - पहले कितना वजन था? मैं दिमाग पर जोर डाल कर सोचता हूँ, कुछ याद नहीं आता। यकायक मुझे एहसास होता है, मैंने दसियों वर्ष से अपना वजन नहीं लिया, कभी जरूरत ही महसूस न हुई थी। डॉक्टर की जिज्ञासा से यह बात मेरी समझ में आ रही थी कि छह फुटे बदन के लिए छप्पन किलो काफी शर्मनाक है।" बच्चन साहब (अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन) ने कभी कहा था कि बने रहें ये पीने वाले, बनी रहे ये मधुशाला।... तो कालिया साहब, जो अब नहीं रहे, शराब के ऐसे दीवाने थे। अब आइए, एक ताजा सुर्खी पर नजर डालते हैं।

पूजा भट्ट पूजा ने 21 अगस्त, सोमवार को एक तस्वीर के साथ ट्वीट किया- 'आज शराब छोड़े हुए मुझे आठ महीने हो गए। लंबा रास्ता तय किया है, बाकी की यात्रा करनी है।' पिछले साल उन्होंने सार्वजनिक रूप से शराब पीने की अपनी लत का खुलासा किया था। फिर कहने लगीं कि वह शराबखोरी से छुटकारा पाने के लिए प्रयासरत हैं। उसके बाद से आज तक, यानी पिछले आठ महीनों से शराब को छुआ तक नहीं है।

अपने पिता महेश भट्ट के साथ पूजा
अपने पिता महेश भट्ट के साथ पूजा
तेज रफ्तार शहर और तनाव वाला प्रोफेशन हो तो शराब जश्न मनाने और हार को भूलने में मदद करती है। फिल्म हिट होती है तो शैंपेन से नहाते हैं। फिल्म फ्लॉप होती है तो सिंगल माल्ट दर्द कम कर देता है। 

उन्होंने पिछले वर्ष क्रिसमस पर शराब पीना छोड़ा था। अचानक ऐसा क्या हुआ था क्रिसमस पर कि पूजा मन पर इतनी गंभीरता से शराब की बात ले बैठी थीं। दरअसल, उससे पहले किसी दिन उनके और पिता के बीच चैटिंग हुई थी। जो कुछ इस तरह -

पूजा भट्ट - पापा, मेरे लिए दुनिया में आपसे प्यारा कोई नहीं है।
महेश भट्ट- अगर तुम मुझसे प्यार करती हो तो खुद से भी प्यार करो।
पूजा भट्ट - अब मैं अपनी समझ भर बेस्ट करूंगी।

उससे पहले पूजा भट्ट के मन में शराब को लेकर कुछ इस तरह के विचार, सुकून और उथल-पुथल दोनोx मचाया करते थे- 'शराब सुकून देती है। शाम रंगीन बना देती है। तेज रफ्तार शहर और तनाव वाला प्रोफेशन हो तो शराब जश्न मनाने और हार को भूलने में मदद करती है। फिल्म हिट होती है तो शैंपेन से नहाते हैं। फिल्म फ्लॉप होती है तो सिंगल माल्ट दर्द कम कर देता है। मैं एक ऐसे इंसान के घर जन्मी, जिसने कभी कुछ अधूरा नहीं छोड़ा। विरासत में मुझे भी ऐसी हावी हो गई। जब मैं पीने लगी तो बस पीने लगी। बाद में शरीर में कुछ अजीब सी प्रतिक्रिया होने लगी। पीने से भूख बढ़ जाती है। दिमाग अलग ढंग से काम करने लगता है। कोई निर्णय लेने की तीव्रता बढ़ जाती है। जिनके साथ पार्टी कीजिए, वे किसी भी तरह के फैसलों को प्रभावित करने लगते हैं।

जब मैं 45 साल की हुई तो डर लगने लगा कि कहीं इतना पीने से मेरा अंत न हो जाए। मैं और अधिक जीना चाहती थी। मुझे बेहतर जिंदगी की ओर बढ़ना था। उस वक्त मुझे ऐसा नहीं लगा कि जो लड़की फिल्म 'डैडी' में अपने पिता को शराब पीने से रोकती है, उसे कभी न कभी खुद को समझना होगा।' दरअसल, अपने रहन-सहन के घरेलू माहौल में पूजा भट्ट सयानी हुईं। उनके परिवार में शराब-बीयर पीना कोई वैसी बात नहीं मानी जाती थी। 

होश संभालते ही 16 साल की उम्र से वह भी उस वातावरण में घुल-मिल गईं। शराब पीने लगीं। नशा हद फांदने लगा। जब उम्र पैंतालीस की हुई तो एक दिन उन्होंने आदत से बाज आने की ठान ली। मन बना लिया कि अब शराब को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ देना है। अपने इसी निश्चय को उन्होंने पिछले क्रिसमस पर मीडिया से साझा किया, जिसकी खुशी वह आठ महीने बाद अब ट्विटर पर सेलिब्रेट कर रही हैं। 

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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