एक ऐसा एड, जिसे देख कर महसूस होगा घरेलू हिंसा का दर्द

घरेलू हिंसा के दर्द को बयां करते इस ऐड को देख चुके हैं 10 करोड़ से भी ज्यादा लोग।

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बांग्लादेश में इन दिनों घरेलू हिंसा को सामने लाने वाले एक ऐड की काफी चर्चा हो रही है। जिसे घरेलू हिंसा के प्रति जागरुकता फैलाने और इसकी शिकार महिलाओं को सपोर्ट देने के उद्देश्य से ढाका की एक ऐड एजेंसी ने हेयर ऑइल कंपनी 'जुई' के लिए बनाया है। ये ऐड आजकल यूट्यूब से होते हुए लोगों की ज़िंदगी में शामिल हो रहा है, जिसे पूरी दुनिया में अब तक 10 करोड़ से भी ज्यादा लोग देख चुके हैं। इस ऐड के द्वारा औरत की ज़िंदगी के उस कड़वे सच को बयां किया जा रहा है, जिसे वो चुपचाप घुटन भरे बंद कमरे में अकेले जीती है।

बांग्लादेश को भले आप पिछड़ा देश मान लें, लेकिन घरेलू हिंसा के मामले में भारत की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 70 फीसदी महिलाएं किसी न किसी रूप में घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं।

बांग्लादेश के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2011 में 87 प्रतिशत शादीशुदा महिलाएं किसी न किसी तरह घरेलू हिंसा की शिकार बनती हैं।

बांग्लादेश में इन दिनों घरेलू हिंसा को सामने लाने वाले एक ऐड की काफी चर्चा हो रही है। इस ऐड में एक लड़की अपने बाल कटवाने के लिए पार्लर में जाती है। हेयर स्टाइलिस्ट उससे कई तरह से बाल काटने के लिए पूछती है, लेकिन कुर्सी पर बाल कटाने के लिए बैठी लड़की उससे इसे बहुत छोटा करने को कहती है। बाल काटने वाली कहती है, कि मैडम आपके ऊपर तो लंबे बाल काफी अच्छे लगते हैं, फिर आप बालों को इतना छोटा क्यों करा रही हैं? लेकिन लड़की बालों को और छोटा और छोटा कराने की ज़िद पर अड़ी है। लड़की का चेहरा एकदम बुझा हुआ उदास है। ऐड के अंत में लड़की के बाल जब एकदम छोटे हो जाते हैं, तो उसकी आंखों से दर्द के आंसू टपक पड़ते हैं और फिर उसके मुंह से जो शब्द निकलते हैं उसे सुनकर सब चौंक उठते हैं। वह कहती है, 'मेरे बालों को इतना छोटा कर दो, कि कोई इन्हें पकड़ न पाये।'

इस बात के दर्द को वो हर औरत समझेगी जिसने इसे सहा और महसूस किया होगा। जब कोई औरत घरेलू हिंसा का शिकार होती है, तो तकलीफ जितनी उसके शरीर को होती है उससे कहीं ज्यादा बार उसका स्वाभिमान, उसका गुरूर, उसका आत्मविश्वास और उसका भरोसा टूटता है। बांग्लादेश में महिलाओं की स्थिति बहुत खराब है। यदि भयावह आंकड़ों पर गौर करेंगे तो पता चलेगा, कि वहां हर 100 में से 80 महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार होती हैं। इस ऐड के अंत में एक लाइन कही जा रही है कि 'बाल महिलाओं का गौरव होते हैं इसे उनकी कमजोरी मत समझिए।' ऐड को दुनिया भर में 10 करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने देखा है। बांग्लादेश के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2011 में 87 प्रतिशत शादीशुदा महिलाएं किसी न किसी तरह घरेलू हिंसा की शिकार बनती हैं।

क्या है घरेलू हिंसा?

लड़कियों या महिलाओं को कमजोर मानकर किसी भी प्रकार का कष्ट देना, उनका अपमान करना, दहेज के लिए प्रताड़ित करना या बेवजह ताने देते रहना, गाली देना, जबरन शारीरिक संबंध बनाना या उसपर जबरन अपनी मर्जी थोपना घरेलू हिंसा की श्रेणी में आता है। इसके अलावा घर में लड़कियों के साथ भेदभाव करना उन्हें लड़की होने की वजह से कैद करना और मानसिक प्रताड़ना देना भी घरेलू हिंसा के दायरे में आता है।

बांग्लादेश को भले आप पिछड़ा देश मान लें, लेकिन घरेलू हिंसा के मामले में भारत के हालात भी बहुत अच्छे नहीं हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सत्तर फीसदी महिलाएं किसी न किसी रूप में इसकी शिकार बनती हैं। 'स्त्री' जिसे भारत में पूजने की बात कही जाती है, जिसे सृष्टि की जननी माना जाता है, हमारा पितृसत्तात्मक समाज उसे कमजोर और पुरुषों से कमतर मानते हुए छोटी-छोटी चीजों पर बंदिश लगाता है उन्हें उलाहना देता रहता है। कभी दहेज के लिए तो कभी लड़का न पैदा करने के लिए उन्हें मारा-पीटा जाता है और कभी-कभी तो जलाकर मार भी दिया जाता है। महिलाओं पर हाथ उठाने वाले पुरुष हमेशा यही समझते हैं, कि औरत कमजोर है, इसीलिए वे उस पर अपना हक जमाने लगते हैं। ऐसे में औरत असहाय महसूस करने लगती है। उसे लगता है कि इस समाज में उसका कोई वजूद ही नहीं है और सबसे दुखद बात तो ये है कि हमारा पढ़ा लिखा समाज भी इससे अलग नहीं है। पढ़े लिखे लोग भी महिलाओं पर बंदिश लगाते हैं उनके साथ मारपीट करते हैं। उसका शोषण करते हैं। इस ऐड में महिलाओं को सबल महसूस कराने की कोशिश की गई है और असहाय महसूस करने पर ऐड के अंत में एक हेल्पलाइन नंबर भी दिया गया है, जहां कॉल कर उन्हें मदद मिल सकेगी।

भारत में घरेलू हिंसा को रोकने के लिए कानून तो बने हैं, लेकिन महिलाएं अक्सर घर और रिश्ते को बचाने की चाह में सब सहती रहती हैं और कभी इसकी शिकायत नहीं करतीं। जबकि हर स्त्री को अपने आत्मसम्मान और स्वाभिमान के लिए चाहिए कि वो इसके खिलाफ न केवल बोले, बल्कि जरूरत पड़ने पर कानून का भी सहारा ले।

घरेलू हिंसा सिर्फ ससुराल में या शादी के बाद ही नहीं होती, बल्कि लड़कियों को संस्कार के नाम पर घर की चाहारदीवारी में कैद करके रख देना भी घरेलू हिंसा है। लड़कियों की पढ़ाई रोक दी जाती है या फिर उन्हें पड़ने के लिए बाहर नहीं भेजा जाता। ऐसा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि हमारे समाज में लड़की और लड़के में फर्क किया जाता है। उन्हें लड़कों से कमतर समझा जाता है। इसके साथ ही लड़कों की परवरिश ऐसे की जाती है, कि वे हमेशा अपनी बहनों को दबाकर रखते हैं। अगर लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही लड़कों को लड़कियों का सम्मान करने और उन्हें बराबर समझने की बात सिखाई जाये तो शायद हो सकता है कि किसी लड़की को सिर्फ इस वजह से अपने बाल न छोटे कराने पड़ें।

घरेलू हिंसा के प्रति जागरूकता फैलाने और इसकी शिकार महिलाओं को सपोर्ट देने के उद्देश्य से इस ऐड को ढाका की एक एजेंसी ने हेयर ऑइल कंपनी 'जुई' के लिए बनाया है। यूट्यूब के सौजन्य से पूरा एड यहां देखें...

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