नौकरी के साथ की कैट की तैयारी, पहली बार में ही हासिल किया 100 पर्सेंटाइल

कैट में पहले प्रयास में ही 100 पर्सेंटाइल हासिल करने वाली छवि गुप्ता...

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मैनेजमेंट करियर चाहने वाले स्टूडेंट्स के लिए कैट (कॉमन ऐडमिशन टेस्ट) सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है। इस साल जनवरी में कैट-2017 के परिणामों की घोषणा हुई। दिल्ली की रहने वाली छवि गुप्ता ने 100 पर्सेंटाइल के साथ टॉप-20 में जगह बनाई। ख़ास बात यह है कि छवि ने सिर्फ़ 7-8 महीनों की मेहनत में यह मुकाम हासिल किया और वह भी अपने पहले ही प्रयास में।

पिछले साल के परिणामों की टॉप-20 लिस्ट में एक भी लड़की शामिल नहीं थी और सभी इंजीनियर्स थे। इस बार जनवरी में परिणाम कुछ अलग रहे। टॉप-20 की लिस्ट में दो लड़कियों ने जगह बनाई और कुछ टॉपर्स तो नॉन-इंजीनियरिंग बैकग्राउंड्स के भी थे।

मैनेजमेंट करियर चाहने वाले स्टूडेंट्स के लिए कैट (कॉमन ऐडमिशन टेस्ट) सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है। इस साल जनवरी में कैट-2017 के परिणामों की घोषणा हुई। दिल्ली की रहने वाली छवि गुप्ता ने 100 पर्सेंटाइल के साथ टॉप-20 में जगह बनाई। ख़ास बात यह है कि छवि ने सिर्फ़ 7-8 महीनों की मेहनत में यह मुकाम हासिल किया और वह भी अपने पहले ही प्रयास में। पिछले साल के परिणामों की टॉप-20 लिस्ट में एक भी लड़की शामिल नहीं थी और सभी इंजीनियर्स थे। इस बार परिणाम कुछ अलग रहे। टॉप-20 की लिस्ट में दो लड़कियों ने जगह बनाई और कुछ टॉपर्स नॉन-इंजीनियरिंग बैकग्राउंड्स के भी थे।

दिल्ली के झंडेवालान इलाके में रहने वालीं छवि गुप्ता के लिए कैट में 100 पर्सेंटाइल एक सरप्राइज़ न्यूज थी। छवि कहती हैं, मेरा पेपर काफी अच्छा हुआ था और मुझे 99.9 पर्सेंटाइल की उम्मीद थी। 100 पर्सेंटाइल लक गेम भी होता है, पेपर कैसा आया है और बाक़ी कैंडिडेट्स ने कैसा परफ़ॉर्म किया है। टॉपर्स में लड़कों और लड़कियों ने अनुपात में इस बड़े अंतर के बारे में छवि ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए कहा था, कि इस अंतर की वजह लड़कियों की प्रतिभा नहीं बल्कि समाज का भेदभाव है। छवि कहती हैं कि हमारे घरों में अगर लड़के पढ़ाई करते हैं तो कोई उनकी पढ़ाई में दखल नहीं देता। जबकि कोई लड़की अगर गंभीरता से पढ़ाई करना भी चाहे तो उसे घर के कामों में लगा दिया जाता है। आमतौर पर लोगों की सोच होती है कि लड़कियों को जब शादी ही करनी है तो वह ज़्यादा पढ़कर क्या करेंगी।

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इस बड़ी सफलता के बाद अब छवि आईआईएम-अहमदाबाद में दाखिला लेना चाहती हैं। आईआईएम की सभी ब्रांचों में पहले साल का करिकुलम एक जैसा ही होता है और दूसरे साल में स्टूडेंट्स को स्पेशलाइजेशन की स्ट्रीम चुननी होती है। छवि कहती हैं कि अभी उन्होंने इस संबंध में कोई फ़ैसला लिया नहीं लिया है।

6वीं क्लास से छवि ने दिल्ली में ही पढ़ाई की है। उनके पिता एनएचएआई में हैं और उनकी मम्मी फार्मासिस्ट हैं। उनकी एक बहन मौलाना आजाद कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं और भाई स्कूल में पढ़ रहा है। छवि बचपन से ही टॉपर रही हैं। छवि बताती हैं, सीबीएसई बोर्ड से पढ़ीं छवि ने 10वीं में 91.2% और 12वीं में 94.4% अंक हासिल किए थे।

छवि ने दिल्ली आईआईटी से बायोटेक्नॉलजी में इंजीनियिंग की डिग्री ली है। कॉलेज से ही उनका प्लेसमेंट नोएडा आधारित कंपनी ओपेरा सॉल्यूशन्स में हुआ। उन्होंने नौकरी करते हुए कैट की तैयारी की। छवि बताती हैं कि नौकरी करते हुए इतनी बड़ी परीक्षा की तैयार करना काफ़ी चुनौतीपूर्ण रहा। हफ़्ते में 5 दिनों तक ऑफ़िस की वजह से वह सिर्फ वीकैंड पर ही अपनी तैयारी को ठीक तरह से वक़्त दे पाती थीं। छवि मानती हैं कि अगर उचित ढंग से फ़ोकस किया जाए तो तैयारी के लिए इतना समय पर्याप्त है।

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मॉक टेस्ट रहा कारगर

छवि ने बताया कि दूसरे प्रतिभागियों से अलग उन्होंने तैयारी के पहले दिन से ही मॉक टेस्ट पर फ़ोकस किया। अगर आज वह सफल हो पाई हैं तो इसके पीछे मॉक टेस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। छवि कहती हैं कि मॉक टेस्ट आपके अंदर से डर को खत्म करता है और आप बेहतर ढंग से परीक्षा की तैयारी कर पाते हैं। किसी भी प्रतिभागी के लिए मॉक टेस्ट देना और समय दर समय टेस्ट के हिसाब से ख़ुद में सुधार करना एक कारगर प्रक्रिया है और यही आपके लिए सफलता का सबब बनती है।

फ़िल्म और नॉवेल का शौक़

छवि ने बताया कि उन्हें फ़िल्में देखने और नॉवेल पढ़ने का बहुत शौक़ है। छवि कहती हैं कि जब भी उनके ऊपर पढ़ाई वगैरह का दबाव ज़्यादा होता जाता था, वह अपने पसंदीदा ऑथर जेफ़री आर्चर की किताबें पढ़ती थीं। धैर्य बनाए रखने और एग्ज़ाम पर पूरी तरह से फ़ोकस कर पाने के लिए वह अपने परिवार को ख़ास धन्यवाद देती हैं।

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