आईटी उद्योग में महिलाओं को लीडर बने देखना चाहती हैं मनीषा रायसिंघानी

2010 में मनीषा CMU में LogiNext के सह-संस्थापक ध्रुविल से मिलीं, लेकिन 2013 जुलाई में कॉफी पीते-पीते न्यूयॉर्क में लॉजिस्टिक्स कारोबार में समस्याओं और जटिलताओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने जाना कि इन चीजों का समाधान इंटरनेट पर है। अपने मन में इस बात को रखते हुए उन्होंने अमेरिका में अपने पहले उत्पाद पर काम करना शुरू किया। 2014 की शुरुआत में वह अमेरिका से भारत आईं।

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लॉगी नेैक्सट (LogiNext) की सह-संस्थापक मनीषा रायसिंघानी के लिए कार्नेगी मेलॉन विश्वविद्यालय (CMU) में मार्क ज़ुकरबर्ग से मुलाकात जीवन बदल देने वाला था। "मार्क ने अपने सहयोगी शेरिल संद्बेर्ग (Sheryl Sandberg) के बारे में बात की और शेरील का TED talk देखने के बाद, जिसमें उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व के बारे में बताया है, मेरी उत्सुकता बढ़ने लगी।”

मनीषा LogiNext solution में प्रौद्योगिकी और उत्पाद को देखती हैं। बिज़नेस मीटिंग्स, क्लाइंट ब्रीफिंग और नेटवर्किंग कार्यक्रम के समय कई बार लोग सोचते हैं मनीषा की कंपनी के सह-संस्थापक दरअसल प्रौद्योगिकी की जानकारी देते हैं, जिसे मनीषा उन लोगों तक पहुंचाती हैं। लेकिन सच इससे बिलकुल अलग है।

गिन्नी रोमेत्टी, आईबीएम के सीईओ और शेरील संद्बेर्ग – मनीषा इन दो महिलाओं से काफी प्रेरित हुई हैं। एक सह-संस्थापक के रूप में वह खुद को उदाहरण बना कर कुछ करने की कोशिश कर रही हैं।

शुरूआती साल

एक सामान्य परिवार में उनकी परवरिश हुई। सामाजिक और आर्थिक दबाव की कमी ने मनीषा को चुनौतियों से लड़ने और अपना रास्ता बनाने की हिम्मत दी। अपने घर की 'बेटा' माने जाने वाली यह लड़की आगे चलकर पारिवारिक व्यवसाय को लीड करेगी ऐसी उम्मीद की जाती थी। हालांकि, उन्होंने परिवार की उम्मीद से अलग टेक्नोलॉजी को चुना।

मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक करते हुए उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में ‘मास्टेक’ के साथ काम किया। छह महीने कंपनी में जॉब करने के बाद, उन्होंने जाना कि कॉर्पोरेट जॉब में वह जीवनभर काम नहीं कर सकती| 2009 की छंटनी में, वह मास्टेक के सैकड़ों लोगों में से एक थीं|

अपने कॉर्पोरेट कार्यकाल के बाद, मनीषा ने कुछ नया सीखने का मन बनाया। उन्होंने कुछ ऐसा सीखने का फैसला किया जिससे उन्हें टेक्नोलॉजी में मदद मिले। सूचना प्रणाली पद्दति में उन्हें उसका जवाब मिला। और फिर ‘कार्नेगी मेलॉन’ से सूचना प्रणाली में मास्टर की डिग्री ली। उन्होंने iTunes के लिए डाटा विश्लेषक टीम के तौर पर वार्नर भाईयों के साथ काम किया। अपने बिज़नेस की शुरुआत करने से पहले तक उन्होंने अमेरिका में IBM के साथ काम किया।

2010 में मनीषा CMU में LogiNext के सह-संस्थापक ध्रुविल से मिलीं। लेकिन 2013 जुलाई में कॉफी पीते-पीते न्यूयॉर्क में लॉजिस्टिक्स कारोबार में समस्याओं और जटिलताओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने जाना कि इन चीजों का समाधान इंटरनेट पर है। अपने मन में इस बात को रखते हुए उन्होंने अमेरिका में अपने पहले उत्पाद पर काम करना शुरू किया। 2014 की शुरुआत में वह अमेरिका से भारत आईं।

टेक्नोलॉजी में महिलाएँ

अपने अनुभव के आधार पर मनीषा कहती है,  “टेक्नोलॉजी में बहुत कम महिलाएं हैं। 10वीं कक्षा तक, मेरा विश्वास है कि लड़कों और लड़कियों का अनुपात ठीक था लेकिन जब मैंने 11वीं और 12वीं तक साइंस स्ट्रीम ली तो यह कम हो गया और कॉलेज में तो और भी कम हो गया। यह स्कूल में लगभग 40 प्रतिशत, 30 प्रतिशत स्नातक में और कार्नेगी मेलॉन में 20 प्रतिशत की दर से कम हो गया।”

मनीषा कहती हैं - “बहुत ही कम महिलाएं बी 2 बी और लॉजिस्टिक्स में हैं। वह थोड़ा पेचीदा ज़रूर है, लेकिन मुझे इसमे काम करने में मज़ा आता है।”

लॉजिस्टिक्स कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ मीटिंग में अकेली महिला होने के नाते चुनौती से अधिक निराशा होती हैं, जब वह देखती हैं कि पर्याप्त महिलाएं इस क्षेत्र में नही हैं। वह एक लीडर और उद्यमी होने के नाते पुरुष और महिला टीम के बीच संतुलन बनाने को एक चुनौती मानती हैं। वह कहती हैं,

“हमने देखा है कि ज्यादातर कार्य स्थलों, विशेष रूप से शुरूआती दौर में पुरुष प्रभावी रहे हैं। मुझे लगता है जिसका प्राथमिक कारण है कि अधिकतर स्टार्टअप पुरुषों के द्वारा किया जाता है और महिलाओं को दूसरी महिला लीडर से समर्थन नही मिलता है। LogiNext में, हम अपनी मौजूदा महिला टीम के सदस्यों को कल के लीडर बनाना चाहते हैं। और संभवतः वे अपना स्वयं का स्टार्टअप शुरू करे।”

वह कहती हैं, "मैं लेबल से मुक्त हूँ और मैं खुश हूँ कि मेरी टीम ने मुझे नेतृत्व के रूप पसंद किया न की बॉस के रूप में।”

मनीषा टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट के माध्यम से लगातार नवीनीकरण में ध्यान देती हैं। उनका लक्ष्य टीम को व्यावसायिक और व्यक्तिगत विकास के हर मौके के लिए सक्षम बनाना है। वह कहती है,

“हम न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि विश्व स्तर पर, सबसे अच्छे तकनीक प्रतिभाओं को लेने की योजना बना रहे हैं। हमने देखा हैं कि बहुत से भारतीय पश्चिमी देशों से वापस भारत में काम करने के लिए, विशेष रूप से स्टार्टअप के लिए आ रहे हैं। हमने अनुभव किया कि अमेरिका से भारत आने वाली प्रतिभाओं से हम जल्दी और आसानी से संपर्क करने में सक्षम हैं।”

मनीषा अपने द्वारा बनाये गये डाटा को महत्व देती हैं और यही चीज़ उन्हें बनाये रखती हैं। उनका परिवार उनके उद्यमशीलता के प्रयासों में उनका समर्थन करता है। वह कहती हैं,

“तीन बुद्धिमान पुरुषों (मेरे सह-संस्थापक ध्रुविल संघवी, हमारे निवेशक संजय मेहता और हमारे सलाहकार मार्क देसंतिस) जिन्होंने मुझे लगातार नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया है। उतार-चढ़ाव भरे साल में जो हमने हासिल किया, उससे मेरा विश्वास और दृढ़ हुआ है।”

मनीषा का वर्तमान और भविष्य का लक्ष्य एक ही है – भारत में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन इंडस्ट्री और अन्य उभरते बाजारों के काम करने के तरीकों में बदलाव लाना है।

मूल कहानी लेखिका - तनवी दुबे

अनुवाद – भगवंत सिंह छिलवाल