कश्मीरी छात्रों के सपनों को 'राइज़' देने की कोशिश

- इंजीनियरिंग की तैयारी कराने में जुटा राइज़ इंस्टीट्यूट। - 100 से ज्यादा छात्र कर रहे हैं इंजीनियरिंग की तैयारी। - राइज़ के माध्यम से मुबीन कर रहे हैं घाटी में शिक्षा के स्तर को उठाने की पहल।

0

कश्मीर जितना अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है उतनी ही वहां समस्याएं भी हैं। यह खूबसूरत घाटी बेरोजगारी और कई तरह के अभावों का सामना कर रही है जिसमें शिक्षा की कमी और शिक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी प्रमुख है। ऐसे में यहां के उन युवाओं की भूमिका अहम हो जाती है जो घाटी से हैं और अपना भविष्य बेहतर कर चुके हैं। वे चाहें तो घाटी की छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे ही एक युवा हैं मुबीन मौसदी। मुबीन मौसदी का इंस्टीट्यूट 'राइज़' घाटी के कई छात्रों को आईआईटी में प्रवेश के लिए जेईई की परीक्षा की तैयारी कराता है।

मुबीन ने आईआईटी मुंबई से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और अब अपने इंस्टीट्यूट राइज़ की बदौलत वो कश्मीर के युवाओं के सपने को पूरा करने में उनकी मदद करना चाहते हैं। मुबीन कश्मीर में बदलाव लाना चाहते हैं और शिक्षा के बल पर यहां के युवाओं का भविष्य संवारना चाहते हैं।

राइज़ कश्मीर के श्री नगर में स्थित है। यह संस्था इंजीनियरिंग करने के इच्छुक छात्रों को जरूरी सलाह मशविरा देती है साथ ही जेईई की परिक्षाओं की तैयारी भी कराती है। संस्थान का उद्देश्य कश्मीरी युवाओं को उच्च शिक्षा पाने में उनकी मदद करना है। इंस्टीट्यूट छात्रों को सभी जरूरी सूत्र बताता है जिसके प्रयोग से वो परीक्षा में सफल हो सकें। फिलहाल ये लोग जेईई मेन्स, एडवांस और बिट सेट की तैयारी करा रहे हैं। साथ ही राज्य स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए भी कोचिंग दे रहे हैं। इसके अलावा ये लोग कुछ स्कूलों में जाकर भी काम करते हैं ताकि वहां शिक्षा सुचारु रूप से चल सके।

मुबीन मौसदी
मुबीन मौसदी

मुबीन ने सन 2011 में मुंबई आईआईटी से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। उसके बाद मुबीन ने एक साल तक गुडग़ांव में सेल्स और मार्किटिंग कंसल्टेंसी फर्म में काम किया। एक साल के काम के बाद उन्हें लगा कि उन्होंने कुछ भी ऐसा नहीं किया जिससे वे संतुष्ट हों। रोज एक ही तरह का काम करते करते मुबीन बोर होने लगे थे। इसलिए एक साल के बाद ही उन्होंने नौकरी छोड़ दी और जम्मू कश्मीर लौट आए। इरादा था यहां के बच्चों के लिए कुछ करने का। कश्मीर में जो शिक्षा का स्तर है वह बहुत ही कमजोर है। जिस पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। यहां के शिक्षा के स्तर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के सबसे होनहार छात्र भी भारत के टॉप कॉलेजों में प्रवेश नहीं ले पाते हैं। जिसका कारण शिक्षा के स्तर का कमतर होना और शिक्षा के प्रति लोगों में जागरुकता की कमी है। जो छात्र शिक्षा के प्रति जागरूक हैं उन्हें कोई अच्छा गाइड करने वाला नहीं होता। जिस कारण शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा के बावजूद वे कुछ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। मुबीन जब आईआईटी मुंबई में पढ़ रहे थे तब उनकी कक्षा में वे अकेले छात्र थे जो कश्मीर से थे। इसका कारण मुबीन बताते हैं कि उनकी शिक्षा भारत के कई शहरों में हुई। मुबीन मानते हैं कि यदि वे पूरी तरह से कश्मीर में ही पढ़े होते तो आईआईटी में उनका प्रवेश संभव नहीं था। एक महीने की योजना के बाद अक्तूबर 2012 में मुबीन ने राइज़ इंस्टीट्यूट की नीव रखी। शुरुआत में मुबीन सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते थे। लेकिन सरकार की तरफ से कोई सहयोग न मिलने की वजह से मुबीन ने खुद ही इंस्टीट्यूट चलाने की पहल की।

मुबीन को इस इंस्टीट्यूट को खड़ा करने में कई तरह की मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा। सबसे बड़ी चुनौती मुबीन के सामने लोगों को कोचिंग के लिए जागरूक करने की थी। इसके लिए मुबीन ने कुछ स्थानीय अखबारों में लेख लिखे साथ ही वे कुछ स्कूलों में भी गए और वहां सेमिनार आयोजित किए। जिसमें उन्होंने छात्रों को बताया कि वे भविष्य में संभावनाओं को कैसे पैदा कर सकते हैं। मुबीन की शुरुआत ठीक रही और शुरु में दस बच्चों ने उनके कोचिंग सेंटर में प्रवेश लिया।

मुबीन के सामने जो एक और बड़ी दिक्कत थी वह थी यहां के अभिभावकों और बच्चों को न्यूनतम सुविधाओं में रहने की आदत सी पड़ गई है इसलिए वे अपने लिए कोई बड़ा गोल सेट ही नहीं करते। न ही यहां के माता-पिता ही अपने बच्चों से कोई बड़ी अपेक्षा रखते हैं। मुबीन का लक्ष्य अब इसी सोच को बदलना था। उन्हें बच्चों को एक अच्छे व शानदार भविष्य के सपने दिखाने थे और साथ ही यह भी यकीन दिलाना था कि यह सपने पूरे हो सकते हैं। आप इन्हें पूरा कर सकते हो, बस जरूरत मेहनत और लगन की है।

इसके अलावा छोटी-मोटी दिक्कतों का सामना मुबीन को लगातार करना पड़ रहा था। सितंबर 2014 में आई बाड़ से इन्हें बहुत नुक्सान हुआ। इनके इंस्टीट्यूट का ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह से पानी में डूब गया। इसके अलावा इनके पास लाइब्रेरी में लगभग चार हजार किताबें थीं जिसमें से केवल दो सौ किताबें ही बचाई जा सकीं। बाकी सब पानी में खराब हो गईं।

मुबीन ने जब अपने इंस्टीट्यूट की शुरुआत की उस समय मुबीन के साथ तनुज बोझवानी ने इस कार्य की योजना बनाने में उनकी बहुत मदद की।

अभी तक इंस्टीट्यूट 100 से अधिक छात्रों को कोचिंग दे चुका है। और कश्मीर घाटी में आईआईटी के प्रति जो जागरुकता बढ़ रही है उसके चलते अब ज्यादा से ज्यादा छात्र इनके इंस्टीट्यूट से जुड़ रहे हैं।

मुबीन ने शुरुआती दिनों में अपनी बचत से इस इंस्टीट्यूट को चलाया लेकिन जैसे-जैसे छात्र इससे जुडऩे लगे तो मुबीन को इसे चलाने में कुछ मदद मिलने लगी। साथ ही धीरे-धीरे मुनाफा भी होने लगा।

मुबीन चाहते हैं कि उनके इंस्टीट्यूट के ज्यादा से ज्यादा बच्चे आईआईटी परीक्षा पास करें। और कश्मीर के लिए वे कुछ रोल मॉडल इन छात्रों के रूप में प्रस्तुत कर सकें। इससे न केवल इंस्टीट्यूट को बल्कि पूरे कश्मीर को फायदा होगा।

आने वाले समय में यह इंस्टीट्यूट बच्चों को टेबलेट भी देने की योजना बना रहा है। इन्होंने एक एप्लीकेशन भी तैयार की है जोकि छात्रों को परीक्षा की तैयारी करने में मदद करती है। इन टेबलेट में यह एप्लीकेशन पहले से इंस्टाल होगी। कई बार राजनीतिक अस्थिरता और तनाव की वजह से इंस्टीट्यूट को कई दिनों तक बंद भी करना पड़ता है ऐसे में यह एप्लीकेशन बच्चों को घर पर पढऩे में मदद करेगी।

मुबीन ने कश्मीर में ही एक स्कूल के साथ भी पार्टनरशिप की है जहां वे टीचर्स के साथ काम कर रहे हैं ताकि शिक्षा के स्तर को सुधारा जा सके। मुबीन अपने इंस्टीट्यूट राइज़ को इस ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं जहां बच्चों को बहुत अच्छी तरह से गाइडेंस मिले और वे अपने भविष्य के लिए जो सपने देखते हैं उसे पूरा करने में राइज़ उनकी मदद कर सके। साथ ही वे आने वाले समय में सरकार से भी मदद की अपेक्षा रखते हैं।