मुंबई के श्रवण कुमार हैं डॉ उदय मोदी

‘श्रवण टिफ़िन सेवा’ द्वारा मुंबई के 200 वरिष्ठ नागरिकों में मुफ्त भोजन पहुंचाने वाले डॉ उदय मोदी आज के वो श्रवण कुमार हैं, जो सिर्फ अपने मां-बाप का नहीं बल्कि 200 लोगों की भूख का खयाल रख रहे हैं।

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‘श्रवण टिफ़िन सेवा’ द्वारा मुम्बई के मीरा भायंदर इलाके में करीब 200 वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त भोजन मुहैया कराया जाता है। इस 'सेवा' के पीछे पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ उदय मोदी नाम के व्यक्ति है। इसकी शुरुआत उनके अस्पताल के पास एक वृद्ध दंपति के लिए खाना पकाने से हुई थी, जो खुद के लिए खाना बनाने में असमर्थ थे।

डॉ. उदय मोदी
डॉ. उदय मोदी
मुंबई के आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ. उदय मोदी को ज़रूरतमंद लोगों के लिए भोजन का इंतज़ाम करते 10 साल हो चुके हैं और वर्तमान में, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहायता से वे उन बुजुर्गों की चिकित्सा संबंधी देखभाल भी कर रहे हैं। 

एक घटना को याद करते हुए डॉ उदय मोदी बताते हैं, कि

"एक बार, एक वृद्ध आदमी अपनी पत्नी के लिए कुछ दवाइयों के लिए मेरे पास आया, उनकी पत्नी लकवे का शिकार हुयी थी और मुझे ये जानकर बहुत हैरानी हुई कि इस बुजुर्ग जोड़े को उनके बच्चों द्वारा छोड़ दिया गया था और उनके लिए भोजन बनाने वाला भी कोई नहीं था। तभी से मैंने इस तरह के अकेले और असहाय बुजर्गों की मदद करने का फैसला किया।"

कुछ दिनों तक इस जोड़ी को भोजन उपलब्ध कराने के बाद, उनकी पत्नी ने उन्हें इसी तरह के और लोगों का पता लगाने और उन लोगों की भी मदद करने का आग्रह किया, जो इस बुजुर्ग जोड़ी जैसे ही पीड़ित हों। शुरुआत में जब वे उन ग्यारह लोगों के भोजन का इंतजाम कर रहे थे, जो स्वयं से अपने लिए भोजन जुटा पाने में सक्षम नहीं थे, तब उनकी पत्नी ही खाना बनाया करती थीं और अब करीब 200 लोगों के लिए रोजाना भोजन तैयार करने के लिए चार कुक नियुक्त किए गए हैं।

"तीन दशक पहले की बात है, जब लोगों के पास अधिक पैसे नहीं हुआ करते थे, उस समय उदय मोदी के पिता अपने इलाके में निर्माण श्रमिकों को मुफ्त में चप्पल बांटा करते थे।"

मधुमेह और गैर-मधुमेह के लोगों के लिए भोजन अलग-अलग तैयार किया जाता है, और भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लोगों तक भेजने से पहले डॉ उदय खुद रोजाना भोजन का स्वाद चखते हैं। उनका मानना ​​है, कि उन्होंने अपने पिता से ज़रूरतमंद लोगों की मदद करना सीखा है। तीन दशक पहले की बात है, जब लोगों के पास अधिक पैसे नहीं हुआ करते थे, उस समय उदय मोदी के पिता अपने इलाके में निर्माण श्रमिकों को मुफ्त में चप्पल बांटा करते थे। डॉ. उदय कहते हैं,

"मेरे पिता डाकघर में काम करते थे और उनकी आय बहुत अधिक नहीं थी। फिर भी वो कुछ कुछ पैसे जरूर बचा लिया करते थे। मैं 1987 की बात कर रहा हूं, उस दौरान बहुत सारे निर्माण कार्य चल रहे थे। उसमें काम करने वाले अधिकतर श्रमिक नंगे पैर ही काम करते थे। वे अलग-अलग नाप के चप्पल खरीद कर उन मज़दूरों में बाँट दिया करते थे। उन चप्पलों को पहनने के बाद उन मज़दूरों के चेहरे पर दिखाई देने वाली खुशी मेरे ह्रदय को छू लेती थी।"

डॉ उदय को लोगों के लिए भोजन का इंतज़ाम करते 10 साल हो चुके हैं और वर्तमान में कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहायता से वे उन बुजुर्गों की चिकित्सा सम्बन्धी देखभाल भी कर रहे हैं। हालांकि कुछ प्रायोजक इस कार्य में उनकी मदद कर रहे हैं, लेकिन ये मदद उन सभी लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए अपने खाली समय में वे टेलीविज़न धारावाहिकों में भी काम करते हैं और अपने इस अभिनय से प्राप्त पैसे को वे अधिक से अधिक लोगों की मदद करने में लगा देते हैं।

डॉ उदय का सपना एक दिन एक वृद्धाश्रम शुरू करने का है। एक ऐसा स्थान जहाँ बुजुर्गों और विकलांगों के लिए मुफ्त आश्रय का भी प्रबंध हो।

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