शिक्षा की दुनिया में फर्जीवाड़ा

माफिया राज में जाली छात्र, जाली टीचर, जाली डॉक्टर...

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कहीं एनसीईआरटी किताबों के लिए कालाबाजारी तो कहीं छात्रों के मानदेय में करोड़ों के घोटाले, कहीं शिक्षकों की नियुक्तियों में डिग्री के फर्जीवाड़े तो कहीं यूनिवर्सिटी के अंदर ही सैकड़ों की संख्या में जाली एमबीबीएस सर्टिफिकेट बनाने के रैकेट, पूरे एजुकेशन सिस्टम में ऐसी सड़ांध फैली हुई है कि गंभीर शिकायतों तक पर सुनवाई नहीं। और तो और, प्रिंसिपल के ही घर में बैठकर शिक्षा माफिया नकल के ठेके चला रहे हैं।

पूरे देश में स्कूल-कॉलेजों से लेकर विश्वविद्यालयों तक, पठन-पाठन, प्रतियोगिताओं से लेकर नियुक्तियों तक शिक्षा माफिया राज कर रहे हैं। यह सब बड़े आराम से बेखौफ संगठित स्तर पर हो रहा है। हर आदमी को मालूम है कि विवेक की जड़ पर ही कुल्हाड़ी मारते हुए ज्ञान के मंदिरों में यह सब क्या हो रहा है लेकिन शिक्षा विभाग के सर्वोच्च पदों से लेकर सिस्टम चलाने वाले तक इस माफिया जकड़बंदी को तोड़ने में असफल साबित हो रहे हैं। सवाल उठता है कि जाली सर्टिफिकेट्स वाले छात्र और टीचर से देश के कैसे भविष्य का निर्माण हो रहा है और एग्जाम से अस्पतालों तक मुन्ना भाई एमबीबीएस से मरीज कब तक अपनी जान की खैर मनाएं। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कोई भी राज्य तो ऐसा नहीं, जिसकी चादर में काले दाग-चकत्ते न हों। शिक्षा विभाग में लापरवाही और भ्रष्टाचार हद पर होने से अब तो अजीबोगरीब मामले सामने आ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की बोर्ड परीक्षा में सरकार नकलविहीन परीक्षा कराने का दावा कर रही है लेकिन मुरादाबाद में हाईस्कूल में तीन विषयों में 'फेल' एक छात्रा शिखा इंटर 'पास' कर अब हाईस्कूल की मार्कशीट के लिए गुहार लगाती डोल रही है और उसके परिजन हंगामा कर रहे हैं। हैरानी तो इस बात की है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के परीक्षा फार्म ऑनलाइन भरे जाते हैं, जिसमें हाईस्कूल का मार्कशीट भी सॉफ्टवेयर में दर्ज होता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ही सरकार की नाक के नीचे बिना किसी कैम्पस के इंटरनेशनल नॉन ओलम्पिक यूनिवर्सिटी में पिछले कई सालों से छात्रों को पीएचडी से लेकर स्नातक तक की डिग्रियां बांटी गईं। यह जाली विश्वविद्यालय चलाने वाले एक और फर्जीवाड़ा वर्ल्ड काउंसिल फॉर रेगुलर एंड डिस्टेंस एजुकेशन संस्था के नाम से कर रहे थे। 

हद तो ये रही कि यहां से यूजीसी की तरह स्कूल-कॉलेज, यूनिवर्सिटी चलाने तक के मान्यता-प्रमाणपत्र दिए जाने लगे। सारा फर्जीवाड़ा ऑनलाइन चलता रहा। पांच साल बाद हाल ही में एक शिकायत पर एसटीएफ की नींद खुली तो सात आरोपियों को जेल भेजा गया। उत्तर प्रदेश के ही जिला चंदौली में कुछ दिन पहले बोर्ड परीक्षा के दौरान एक और शर्मनाम मामला प्रकाश में आया। छापा मारने पर पता चला कि कॉलेज से सटे प्रिंसिपल के मकान में ही शरण लिए नकल के ठेकेदार बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाएं तैयार कर रहे थे। प्रिंसिपल के मकान से बड़ी संख्या में जाली उत्तर पुस्तिकाएं और नकद 15 लाख रुपए भी बरामद हुए।

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अभी कल ही मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले की तरह मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में तो ऐसे संगीन जुर्म का खुलासा हुआ, कि पूरा शिक्षा जगत ही हिल गया। यहां के मुन्नाभाई रैकेट ने प्रति छात्र डेढ़ लाख, कुल लगभग चार करोड़ रुपए की उगाही कर एमबीबीएस डॉक्टरी के छह सौ जाली सर्टिफिकेट जारी कर दिए। धड़ल्ले से यह कर्मकांड सन् 2014 से चल रहा था। वे जाली डॉक्टर तैनात भी हो चुके हैं। अब सोचिए कि ऐसे डॉक्टर मरीजों की जान के दोस्त हुए या दुश्मन! इस तरह पासआउट हुए मुन्ना भाइयों को अब एसटीएफ तलाश कर रही है। बिजनौर के शाहपुर का कविराज इस रैकेट का सरगना है। 

यूनिवर्सिटी से जुड़े डिग्री कॉलेजों में विभिन्न परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं भी ये गिरोह छात्रों से 10-20 हजार रुपये लेकर बदलवा देता है। एसटीएफ आईजी अमिताभ यश के मुताबिक विश्वविद्यालय के कर्मचारी ठगराज कविराज को सादा कॉपियां उपलब्ध करा देते थे। उसका नेटवर्क हरियाणा तक फैला हुआ है। ये सादा कॉपियां रैकेट के एक सदस्य की एमबीबीएस छात्रा बेटी मुन्नाभाइयों को उपलब्ध कराती थी। इस छात्रा का हरियाणवी पिता संदीप फरार हो चुका है। कितने बड़े पैमाने पर यह फर्जीवाड़ा चल रहा था, इसका पता इस बात से चलता है कि इस विश्वविद्यालय से दो सरकारी और तीन प्राइवेट, कुल पांच मेडिकल कॉलेज सम्बद्ध हैं।

पटना (बिहार) में इन दिनों निजी विश्‍वविद्यालयों की डिग्रियों का घोटाला चर्चा में है। यहां शिक्षा माफिया सिस्‍टम के भीतर गहरी पैठ बना चुके हैं। लखनऊ की तरह यहां का रॉयल इंस्‍टीच्‍यूट और मौलाना मजहरूल हक इंस्‍टीच्‍यूट के संचालक पैसे लेकर देश के विभिन्‍न भागों में प्राइवेट विश्वविद्यालयों की पैरा मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ, बीएड आदि की जाली डिग्रियां बेंच रहे थे। संचालक को दबोच कर मामले की जांच की जा रही है। इसमें पटना विश्‍वविद्यालय की भी मिलीभगत पाई गई है।

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गौरतलब है कि बिहार में पैसे के बल पर नाम और जन्मतिथि बदलकर छात्र इंटरमीडिएट बोर्ड की परीक्षा तक टॉप कर जा रहे हैं। अभी कुछ ही रोज पहले राज्य के पूर्णिया क्षेत्र में 47 शिक्षकों के प्रमाणपत्र जांच के लिए भेजे गए तो उनमें से 29 शिक्षकों के प्रमाणपत्र जाली पाए गए। ये जाली प्रमाणपत्र पुणे (महाराष्ट्र) के शिक्षा माफिया ने बिहार के शिक्षा माफिया को सौंपे थे। यद्यपि पुणे के माफिया ने इससे साफ इनकार कर दिया है। हिमाचल प्रदेश में तो प्रारंभिक शिक्षा विभाग के चम्बा उपनिदेशालय की कुछ दिन पूर्व जारी शिक्षक सूची में दोबारा एक मृत अध्यापक का नाम घोषित कर दिया गया। सूची में शामिल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल गोला में कार्यरत रहा ये अध्यापक बुद्धि सिंह डेढ़ साल पहले मर चुका है। 

इस समय हरियाणा में दसवीं, बारहवीं की ओपन बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं, जिनमें लगातार जाली परीक्षार्थी पकड़े जा रहे हैं। ऐसे कई छात्र पुलिस के हवाले हो चुके हैं। पंजाब में के सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली एनसीईआरटी की किताबों की कमी के नाम पर कमीशन और कालाबाजारी का खेल चल रहा है। हरिद्वार (उत्तराखंड) में अभी इसी सप्ताह तीन शिक्षकों सौकेन्द्र कुमार, पूनम सिंह उर्फ पूनम धीमान और विमल कुमार के बीएड की जाली डिग्री के मामले पकड़े गए हैं। ये डिग्री उत्तर प्रदेश के गोरखपुर विश्वविद्यालय से जारी दर्शाई गई है। विश्वविद्यालय की जांच में ही इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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