फ्लिपकार्ट और बिन्नी बंसल की कहानी: पल में ख्याति, पल में बुराई

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फ्लिपकार्ट मामले की खबरें धीरे-धीरे हमारे सामने आ रही हैं, लेकिन मैं पूछना चाहती हूं कि हमें किसी को सिंहासन पर बैठाने की जल्दी क्यों होती है और उससे भी जल्दी हम उसे वहां से उतार देते हैं? क्या कोई ऐसा नहीं हो सकता कि हम बीच का कुछ सोचें...

"किसी फैसले के परिणाम चाहे अच्छे हों या खराब, वे मुख्य तौर पर नतीजों से ही जाने जा सकते हैं। और इसलिए जब मैंने सोशल मीडिया पर बिन्नी बंसल के मामले में पारदर्शिता की कमी की बात की तो कई लोग मुझ पर क्रोधित हो गए। कुछ लोगों ने तो यह भी सवाल कर दिया कि एक महिला उद्यमी के नाते बिन्नी का समर्थन कैसे कर सकती हूं।"

हाल ही में फ्लिपकार्ट के फाउंडर और सीईओ बिन्नी बंसल ने अपने ऊपर लगे आरोपों के चलते पद से इस्तीफा दे दिया। उनके जाने के साथ ही इस बात को बल मिला कि हमारे आसपास की स्थिति में बदलाव आ रहा है, हम अब किसी को बहुत जल्दी बहुत अच्छा मानने लगते हैं और उससे भी कम वक्त में उसकी कमियां निकालने लग जाते हैं। फ्लिपकार्ट मामले की खबरें धीरे-धीरे हमारे सामने आ रही हैं, लेकिन मैं पूछना चाहती हूं कि हमें किसी को सिंहासन पर बैठाने की जल्दी क्यों होती है और उससे भी जल्दी हम उसे वहां से उतार देते हैं? क्या कोई ऐसा नहीं हो सकता कि हम बीच का कुछ सोचें, हो सकता है ऐसा करना पूरी तरह से सही न हो, लेकिन शायद कहीं अधिक मानवीय होगा।

बीते सप्ताह मंगलवार तक बिन्नी बंसल भारतीय स्टार्टअप इंडस्ट्री के साथ ही दुनियाभर के लिए एक प्रसिद्ध हस्ती थे। ऐसे लगता है कि अभी कल की बात है जब हम वॉलमार्ट द्वारा फ्लिपकार्ट के अधिग्रहण पर खुशियां मना रहे थे। फ्लिपकार्ट, जिसे सचिन और बि्न्नी बंसल ने साथ में मिलकर एक दशक पहले स्थापित किया था उसके वॉलमार्ट के हाथों चले जाना भारतीय स्टार्टअप इंडस्ट्री की सबसे बड़ी डील थी। यह सचिन और बिन्नी बंसल जैसे दो भारतीय युवाओं के संघर्ष और सफलता की कहानी थी।

हमने शुरू से ही सचिन और बिन्नी बंसल से जुड़ी हर खबर सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर देखी। हमने इन दोनों युवाओं को बड़ी हस्ती बनते देखा। ये सब ऐसा था कि वे कुछ गलत नहीं कर सकते हैं। और पिछले हफ्ते जब बिन्नी बंसल के अचानक फ्लिपकार्ट से चले जाने की खबर आई तो हम सीधे नतीजे पर पहुंच गए। हम बिन्नी पर लगे आरोपों को सही मानने लगे। वैसे ही जैसे हमने उन्हें बिना कुछ सोचे फलक पर बैठा दिया था।

वॉलमार्ट के बयान से तो ये साफ ही है कि बिन्नी पर लगे आरोपों में कोई सत्यता नहीं पाई गई। उनके ऊपर 'गंभीर निजी कदाचार' का आरोप सही नहीं निकला। हालांकि ये बात जरूर सामने आई कि डील के वक्त किसी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में वॉलमार्ट जैसी दुनिया की नामी कंपनी को बिन्नी ने नहीं सही से नहीं बताया।

पारदर्शी माहौल की जरूरत

यह बात सही है कि दुनिया की नामी कंपनियों में पारदर्शिता सर्वोपरि होती है और स्टार्टअप की दुनिया में ऐसा होना भी चाहिए। कई सारे अध्ययनों में भी यह बात सामने आ चुकी है कि पारदर्शी माहौल की निवेशक और स्टेकहोल्डर्स भी तारीफ करते हैं। कई सारे उद्यमी जो सीईओ बने हैं उन्हें पहली बार नेतृत्व करने का मौका मिला है। इनमें से कई लोग खुद के दम पर यहां तक पहुंचे हैं, लेकिन हमें ध्यान देना होगा कि हम सब इंसान हैं और गलतियां इंसानों से ही होती हैं। बिन्नी बंसल पर भी ऐसी ही गलती के आरोप लगे हैं।

और चूंकि बिन्नी ने जांच के बाद इस्तीफा दे दिया तो ऐसी चीजें सामने निकलकर आईं होंगी जिससे बिन्नी को इस्तीफा देना पड़ा हो। इंडस्ट्री के कई सारे लोगों ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप जगत ऐसी चीजों से बच सकता था और बिन्नी बंसल को ऐसे मौके पर अपने विवेक का परिचय देना चाहिए था।

साफ-साफ कहूं तो मुझे लगता है कि जल्दबाजी में कुछ निर्णय ले लेना थोड़ी सी ज्यादती होगी। इस बात से मुझे एनी ड्यूक की किताब Thinking in Bets: Making Smarter Decisions When You Don't Have All the Facts की याद आ गई। एनी ने अपनी उस किताब में इन्हीं सब चीजों के बारे में बात की है। वे कहती हैं कि हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे कई फैसले लेते हैं जिनके बारे में हमें पूरी जानकारी नहीं होती। और ये सिर्फ आम इंसानों की बात नहीं है, बड़ी- बड़ी हस्तियां (जिसमें बिन्नी भी शामिल हैं) रोज ऐसे फेसले लेते हैं जिनमें उन्हें नहीं पता होता कि उसके परिणाम क्या होंगे। उन्हें हमेशा लगता है कि उनके फैसलों का नतीजा अच्छा ही आएगा। जबकि दुनिया कितनी अनिश्चितताओं से भरी है।

इसका मतलब यह है कि या तो किसी फैसले के परिणाम चाहे अच्छे हों या खराब, वे मुख्य तौर पर नतीजों से ही जाने जा सकते हैं। और इसलिए जब मैंने सोशल मीडिया पर बिन्नी बंसल के मामले में पारदर्शिता की कमी की बात की तो कई लोग मुझ पर क्रोधित हो गए। कुछ लोगों ने तो यह भी सवाल कर दिया कि एक महिला उद्यमी के नाते बिन्नी का समर्थन कैसे कर सकती हूं।

लेकिन ये सारी बातें किसी एक इंसान का पक्ष लेने या उसका समर्थन करने के लिए नहीं हैं। ये हम सब के लिए सोचने वाली बात है। ये सारी बातें इसलिए हैं कि हम बिना पूरी कहानी जाने अपना फैसला सुना देते हैं। हम जानते हैं कि हमारा नजरिया कैसा है और उस नजरिये में भी खामी हो सकती है, लेकिन फिर भी हम ऐसा करते हैं। ऐसा सिर्फ किसी एक चीज के लिए नहीं है, दरअसल हममें से कई परफेक्ट नहीं है, न ही कोई स्थिति परफेक्ट होती है।

यही कारण है कि, मैं निर्णय लेने के लिए बहुत जल्दी निर्णय लेने से बचना चाहता हूं। क्योंकि, अंत में, हमें याद रखना होगा कि यहां तक कि हमारे सबसे मनाए गए आंकड़े भी मानव हैं। कि वे भी अपने फैसलों में गलती करते हैं जब उनके पास वांछित परिणाम की ओर अपने कार्यों को मार्गदर्शन करने के लिए सभी तथ्य नहीं होते हैं।

इसीलिए मैं बहुत जल्दी फैसले ले लेने और अपना नजरिया बना लेने से बचती हूं। क्योंकि आखिर में हम सभी को ये मानना पड़ेगा कि हम सब एक इंसान ही हैं और कोई भी कभी भी गलती कर सकता है। इसलिए अब जब फ्लिपकार्ट से जुड़ी खबरें अभी हमारे सामने आनी बाकी हैं मैं आप सभी से यही कहूंगी कि ऐसा मत कीजिए। किसी को तुरंत ताज पहना देना और पल भर में उसे वहां से गिरा देना शायद अच्छा नहीं है। क्या कोई ऐसी बीच की जगह नहीं हो सकती जहां हम भले अधूरे रहें, लेकिन इंसान बने रहें। मैं आपको रूमी की कही उस बात के साथ छोड़ जाना चाहती हूं कि, 'यहाँ से बहुत दूर सही और गलत के पार एक मैदान है, मैं वहाँ मिलूँगा तुझे।'

-इसे अंग्रेजी में भी पढ़ें

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