किसान आत्महत्या न करें, इस मुहिम में जुटे हैं 20 साल के युवा किसान विनायक

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किसानों की आत्महत्या की खबरें इतनी आम हो चुकी हैं कि पढ़ने वालों को इससे कोई फर्क तक नहीं पड़ता। लेकिन सच्चाई तो यह है कि आत्महत्या करने वाला किसान ही अपनी जान नहीं देता, बल्कि उसके साथ तिल-तिलकर ताउम्र मरता है उसका पूरा परिवार। यह तकलीफ परिवार के लिए अभिशाप बन जाती है। जीते मरते, जागते सोते एक दु:स्वप्न की तरह। किसानों की तकलीफ किसानों से ज्यादा कौन समझ सकता है, यही वजह है कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर में रहने वाले 20 साल के विनायक चंद्रकांत हेगाणा ने भले ही एग्रीकल्चर में बीएससी की पढ़ाई पूरी की हो, लेकिन उनका पेशा खेती ही है। विनायक ये बात अच्छी तरह से जानते हैं कि किसानों को किन परिस्थितियों में मौत को गले लगाना पड़ता है। इसलिए वो महाराष्ट्र के संकटग्रस्त इलाकों में जाकर किसानों को ढांढस बंधा रहे हैं, उनको मौत से गले लगाने के लिए रोक रहे हैं। विनायक उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं कि आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं है। इस काम को वो अकेले नहीं कर रहे हैं। बल्कि उनके साथ 3 हजार युवाओं की एक टीम है, जो सभी छात्र हैं। खास बात ये है कि उनकी इस टीम में आधे से ज्यादा लड़कियां हैं।


विनायक चन्द्रकांत हेगाणा ने अपनी स्कूली पढ़ाई कोल्हापुर के सरकारी स्कूल से पूरी की। उनके पिता किसान हैं लिहाजा बचपन से ही उनका रूझान खेती की तरफ था। उन्हें पढ़ाई के दौरान छुट्टियों में जब कभी समय मिलता वो खेती में अपने पिता का हाथ बंटाते। इस वजह से वो किसानों की परेशानियों को काफी करीब से जानते थे। करीब 2 साल पहले उन्होंने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया और उन जगहों में किसान जिस हालत में रह रहे हैं उसे देखकर उनका मन बहुत दुखी हुआ। जिसके बाद विनायक ने किसानों की समस्या का समाधान करने के उद्देश्य से ‘शिवार संसद’ नाम से एक संस्था का गठन किया। इसमें उन्होने उन लोगों को साथ जोड़ा जो युवा हैं।


विनायक जब अपनी संस्था के काम के सिलसिले में किसानों से मिल रहे थे तब करीब 75 किसानों के समूह ने उनसे कहा कि राज्य में पहले भी सूखा और बाढ़ आते रहे हैं लेकिन उस समय कोई किसान आत्महत्या नहीं करता था, लेकिन आज हालात बदल गये हैं। विनायक के मुताबिक पहले लोग आपस में मिलजुल कर रहते थे और अपनी समस्याएं एक दूसरे के साथ बांटते थे। ऐसे में उनकी कई समस्याओं का समाधान आपस में मिल बैठकर हो जाता था। आज के हालात में किसानों में आपस में मुकाबला बढ़ गया है। वो लोग पहले की तुलना में एक दूसरे से ज्यादा बात भी नहीं करते हैं। ऐसे में जब सूखा और बाढ़ की वजह से उनकी फसल बर्बाद हो जाती है और किसान पर बैंकों और साहूकारों का कर्ज चुकाने को लेकर दवाब बढ़ता है तो वो आत्महत्या कर लेता है। इस दौरान उसके घर वाले भी सोचते हैं कि किसान कुछ नहीं कर रहा है ऐसे में किसान अपने को अकेला पाता है।


अभिनेता सायाजी शिंदे के साथ विनायक चंद्रकांत हेगाणा
अभिनेता सायाजी शिंदे के साथ विनायक चंद्रकांत हेगाणा

विनायक कहते हैं कि ऐसे हालात में किसान को सहारा देने की जरूरत होती है, उसमें हिम्मत जगानी होती है और उसे प्यार से समझाना पड़ता है कि कैसे विपरीत हालात का सामना किया जा सकता है। विनायक अब तक कई किसानों की काउंसलिंग कर उन्हें आत्महत्या करने से रोक चुके हैं।


विनायक का कहना है, 

“सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रहीं है लेकिन प्रचार की कमी के कारण उन योजनाओं का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा है। किसानों के लिए अकेले महाराष्ट्र में ही 3.5 लाख एनजीओ काम कर रहे हैं बावजूद इसके किसानों तक उनका हक नहीं पहुंच पा रहा है। जिन परिवारों में किसानों ने आत्महत्या की है, सरकार और दूसरी संस्थाओं ने पैसे से उसकी मदद की है। लोकिन उन परिवारों की हालत कुछ समय बाद फिर वैसी ही हो जाती है।" 

विनायक का मानना है कि हमें किसानों के परिवारों की पैसे के अलावा रोजगार को बढ़ाने में मदद करनी चाहिए।


विनायक बड़ी साफगोई से कहते हैं कि किसानों की आर्थिक मदद करने के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं हम उनसे सिर्फ संवाद के माध्यम से ही जुड़े हैं। विनायक और उनकी टीम गांव गांव घूम कर पता लगाती है कि किस किसान की हालत ज्यादा खराब है इसके लिए वो सरपंच और ग्राम प्रधान की भी मदद लेते हैं। विनायक किसानों से कहते हैं, 

“हम आपके बच्चों की तरह हैं क्या कोई मां बाप बच्चों को ऐसे अकेले छोड़कर जा सकता है। हम उन्हें समझाते हैं कि आत्महत्या किसी समस्या का कोई समाधान नहीं है। बल्कि समस्याओं से लड़कर ही उनसे पार पाया जा सकता है।”


किसानों की ज्यादा से ज्यादा मदद हो सके इसके लिए विनायक ने अपने संगठन के नाम से एक वेबसाइट भी बनाई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग किसानों की मदद के लिए आगे आ सकें। वेबसाइट को बनाने में विनायक ने अपने कॉलेज के प्रोफेसर कबीर खाराडे से मदद ली कोल्हापुर के शिवाजी यूनिवर्सिटी में कम्प्यूटर साइंस के प्रोफेसर हैं। किसानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कबीर खाराडे ने ‘शिवार संसद’ नाम से वेबासइट बनाई है। इस वैबसाइट के जरिये विनायक किसानों के लिए फंड जुटाते हैं। साथ ही वो लोगों से अपील करते हैं कि वो किसानों से प्यार के दो मीठे शब्द बोल कर उनमें हिम्मत जुटाएं जिससे कि वो आत्महत्या करने की ना सोचें।

वेबसाइट - www.shivarsansad.com


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I would like to quote myself as ‘a writer by chance’, as fate wants me to write. Now, writing has become my passion, my child, my engagement, and my contentment. Worked as a freelance writer in gathering social and youth oriented real stories.

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