यह सिर्फ डिजाइन नहीं अमर-प्रेम है, जिसे रोज़ पल्लवित करती हैं 'पल्लवी'

"मेरे अनुभवों ने मुझे सिखाया है कि डिजाइन आपकी प्रेरणा का एक स्रोत है और वास्तव में आप के कार्यकलापों का प्रतिबिंब भी. तो मेरे लिए डिजाइन एक स्रोत और परिणाम भी है."

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"हर एक उद्यमी का जीवन चुनौतियों भरा होता है; वो हर रोज आपके दरवाजे पर दस्तक देती है. किसी बड़ी चुनौती या समस्या से पूरी तरह से बचने के लिए इन दैनिक चुनौतियों से ठीक से निबटना आवश्यक है." ‘पल्लवी बुटीक ज्वेल्स’ की संस्थापक पल्लवी फोले कहती हैं.

पल्लवी फोले
पल्लवी फोले

बैंगलौर स्थित, पल्लवी का बुटीक उनके और उनकी टीम के लिए उनकी रचनात्मक ऊर्जा का प्रवाह, उनके नए डिजाइन और विचारों को आकार देने के एक डिजाइन स्टूडियो से बढ़ कर है. वो और उनकी टीम अपने ग्राहकों और अंतराष्ट्रीय व्यापार के लिए डिजायन अनुकूलन पर काम करती है. साथ ही उनका स्टूडियो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के लिए आभूषण डिजाइन भी तैयार करता है.

पल्लवी को यदि कभी काम से फुर्सत मिल पाती है तो वो NIFT या GIA जैसे संस्थानों में एक अतिथि संकाय या एक जूरी सदस्य होकर खुश होती हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डिजाइन कॉलेजों के लिए पाठ्यक्रम भी तैयार किया है. 

"मेरा मानना है कि डिजाइन किसी भी व्यापार की मुख्य शक्तियों में से एक होता है. मैं ने जिन पाठ्यक्रमों को विकसित किया है, मेरा प्रयास इसके कोर में रचनात्मकता लाने और इसे बढ़ाने का रहा है."

एक 4 साल की उम्र से ही पल्लवी को स्केच बनाने में मजा आता था और उन्होंने कई प्रतियोगिताओं भी जीती थीं. उनकी सबसे खास यादों में से एक उनकी दादी हैं जो कैंसर के तीसरे चरण से गुजर रही थीं और उनकी कीमोथेरेपी भी चल रही थी इसके बावजूद भी वह पल्लवी के स्कूल आया करती थी. "वह मेरे पुरस्कार लेते समय मेरे साथ होती थी और उनकी ये भावना आज भी मेरी प्रेरणा है"

पल्लवी ने शेरवुड कॉलेज, नैनीताल में अध्ययन किया जहाँ उन्हें कला के प्रति अपने प्यार का आभास हुआ. "हम पहाड़ियों में सैर के लिए जाया करते थे, और मुझे बैठ कर स्केच बनाना अच्छा लगता था. इस प्रकार से प्रकृति मेरा विचार बन गयी, और यह आज भी मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है."

उन्होंने 1997-2000 में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान ( NIFT), नई दिल्ली से एसेसरी डिजाइन में स्नातक की उपाधि हासिल की और "तनिष्क" के साथ काम करना शुरू किया. और लगभग एक दशक तक वह उनके साथ रहीं.

पल्लवी का मानना है कि अपने अनुभव अपने काम के लिए प्रेरणा का प्राथमिक स्रोत हैं: "मेरे अनुभवों ने मुझे सिखाया है कि डिजाइन आपकी प्रेरणा का एक स्रोत है और वास्तव में आप के कार्यकलापों का प्रतिबिंब भी. तो मेरे लिए डिजाइन एक स्रोत और परिणाम भी है."

उनके लिए एक नए डिजाइन के संग्रह का निर्माण एक डुबकी लगाने जैसा है: 

"एक नई दुनिया में ऐसी डुबकी जिसे कि अनुभव किया जा सके, जो डिजाइनर की दृष्टि का प्रतिबिम्ब हो. तो मेरे जीवन में हर अनुभव मेरे डिजाइन के प्रेरणास्त्रोत को प्रभावित करता है. मुझे यात्रा करने में आनंद आता है जिस से मुझे नए संस्कृतियों का अनुभव, कला को देखने, इतिहास का अध्ययन करने, प्रकृति को समझने और अपने जीवन को करामाती, कायाकल्प और समृद्ध बनाने में मदद मिलती है.”

पल्लवी के प्रयासों को पहचान मिली है और साल दर साल उनके डिजायनों ने कई पुरस्कार जीतें हैं. प्रतिष्ठित "NID बिजनेस वर्ल्ड अवार्ड" की "बेस्ट एसेसरी डिजायन" की श्रेणी में इनके "आम्र" नाम के संग्रह को पुरस्कृत किया गया है. इस संग्रह के लिए पल्लवी ने समकालीन भारतीय महिलाओं के लिए आम के मूल भाव को नए सिरे से परिभाषित और उसका आधुनिकीकरण किया है.

पल्लवी का मानना है कि कला को लिंग के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता: 

"महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको अपना काम पता है और अगर आप इसे अच्छे से कर रहें हो तो बाकी सब कुछ स्वयं अच्छा होता है. मैं ज्यादातर भारतीय शहरों जहां मैं काम करती हूँ, वहां ऐसे व्यक्ति के लिए, जिसे अपना काम अच्छे से आता है, काफी सम्मान और आदर देखा है वह स्त्री हैं या पुरुष इस से को फर्क नहीं पड़ता है.”

पल्लवी ऑरलैंडो ओर्लांदिनी के काम से बहुत प्रेरित है और वह उनके द्वारा तैयार किये गए कुछ वास्तुयों पर मास्टर कारीगरों के साथ काम करने में बहुत देती हैं.

पल्लवी मानती हैं कि जहाँ महिला उद्यमी होने कि वजह से उन्हें कुछ समस्याओं का सामना कराना पड़ता है तो वहीँ इसके कुछ लाभ भी है. वो महसूस करती हैं कि चुनौतियों के बावजूद महत्वपूर्ण यह है यह ध्यान केंद्रित रखा जाय और सभी के कल्याण का ध्यान रखा जाये, फिर सभी नकारात्मक चीजें भी सकारत्मक हो जाती हैं.

तीन तत्व उनके जीवन का अभिन्न अंग हैं. पहला- उनका निरंतर विश्वास कि यह पल भी गुजर जाएगा. दूसरा- उनके जीवन में अनुशासन. उस बोर्डिंग स्कूल का धन्यवाद जहाँ उन्होंने समय की पाबन्दी और स्वस्थ्य खान-पान की आदत सीखीं. 

"मेरे पिता 63 साल के हैं और रोज एक घंटे तक दौड़ लगाते हैं, वो एक मैराथन धावक रहे हैं. वह कहते हैं कि आप अनुशासित रूप से रोज जो करेंगें उसे आप जीवव भर आसानी से करते रहेगें.मैं उनके जीवन से प्रेरणा लेती हूँ."

तीसरा- उनके परिवार और करीबी मित्रों का प्रेम जो कि उनके सम्बल के मज़बूत स्तम्भ हैं. 

"नील, मेरे पति सदैव मेरे लिए उपलब्ध हैं. मैंने हमेशा उनके काम की प्रशंसा की है और मैं उनकी विनम्रता से प्यार करती हूँ. मेरी बेटी निया मेरे लिए निरंतर प्रेरणा स्रोत है, उसे स्टूडियो में रहना और मेरी डिजायन टीम का हिस्सा कहलाना अच्छा लगता है. सप्ताहांत में, वह मेरे साथ स्टूडियो में रहती है."

वह हर रोज अपने डिजायनों को सपनो जैसा संजोती है, सवांरती है और यह डिजाइन के प्रति उनका अमर-प्रेम है जो उन्हें सदैव प्रेरित रखता है.


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