नौकरी छोड़कर दो चार्टेड एकाउंटेंट्स ने बनाया कंटेंट क्रिएशन प्लेटफार्म

आज वीडियो कंटेंट और एडवरटाइजिंग तेज़ी से बढ़ रही है।  इस दिशा में सैकड़ों ऐड एजेंसियां और डिजिटल एजेंसियाँ काम कर रही हैं। साथ ही, व्यक्तिगत ग्राहकों के तौर पर भी बाज़ार में अपार संभावनाएँ हैं, जहाँ ज्यादातर लोग आज भी अपने परिवार के लोगों और दोस्तों से मदद लेना पसंद करते हैं। इसी के विस्तार स्वरूप...आहसमनेस दृश्य, संगीत और लेखन में गुणवत्ता लाने के उद्देश्य से शुरू हुआ है। आशीष और शिवानी इस स्टार्टअप के क्रिएटिव हेड हैं। इनके अलावा इनकी टीम में अनुभवी लेखक, एनिमेटर, इलस्ट्रेटर, वीडियोग्राफर, वीडियो एडिटर, संगीतकार और साउंड इंजीनियर हैं। 

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हर संस्थान के पीछे कोई न कोई दिलचस्प कहानी छुपी होती है। किसी के लिए इन कहानियों को बताना आसन होता है तो किसी के लिए खासा मुश्किल। ऐसा इसलिए क्योंकि इन लोगों ने शुरुआती दौर में कठिनाइयों और जटिलताओं का सामना किया होता है तो ये अपनी कामयाबी की कद्र जानते हैं। आज हममें से कई लोग इस ग़लतफ़हमी में रहते हैं कि एक संस्थान को सफल अथवा असफल बनाने की ज़िम्मेदारी उसकी मार्केटिंग टीम पर रहती है। ऐसे लोग ये भूल जाते हैं कि किसी भी संस्था के लिए उचित अवसर और उन अवसरों को भुनाते हुए किये गए काम ही संस्था को सफल बनाते हैं।

अवसर और मेहनत ही के बल पर आहसमनेस जैसा स्टार्टअप अस्तित्व में आया। आहसमनेस, एक रचनात्मक उद्यम है, जिसने आज विचारों, भावनाओं और संचार को कहानी का रूप देते हुए वीडियो और फिल्मों के माध्यम से जनता के समक्ष प्रस्तुत किया।

आहसमनेस के शुरुआत की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। पेशे से केपीएमजी चार्टर्ड एकाउंटेंट्स आशीष चावला और शिवानी कौल के दिमाग में इस विचार की शुरुआत 2014 में हुई मगर इन लोगों ने इसे अमली जामा 2015 में तब पहनाया, जब इनके एक सहकर्मी इनके पास आये जो अपनी बेटी के बर्थडे पर उसे अनोखा और यादगार गिफ्ट देना चाहते थे जो उसे ज़िंदगी भर याद रखे। इसके बाद आशीष और शिवानी ने बच्ची के माता पिता के साथ मिल कर वीडियो के रूप में एक स्टोरी बोर्ड तैयार किया जिसे लोगों द्वारा बहुत पसंद किया गया और सराहा गया।

इसके बाद इन दोनों ने कम्पनी बदल ली, जहाँ आशीष ने जीई नाम की ई कॉमर्स की कम्पनी में काम शुरू कर दिया जबकि शिवानी ने डब्लूएनएस असेंचर में काम करना शुरू कर दिया शिवानी इससे पहले एस्पायर में बतौर कंटेंट हेड काम कर रही थीं। अतः कॉर्पोरेट फाइनेंस वर्ल्ड में 13 साल काम करने के बाद आशीष (35) शिवानी (35) दोनों ने वो किया, जो उनका सपना था, कुछ ऐसा कंटेंट, जिसमें व्यक्ति की ज़िंदगी के ख़ास क्षण जुड़े हो, और इस तरह आहसमनेस अस्तित्व में आया।

आशीष और शिवानी ने कई अलग–अलग लोगों के साथ काम किया जिसमें करोड़पती कॉर्पोरेट से लेकर स्टार्टअप, इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी, वेडिंग प्लानर्स, बच्चे उनके माँ बाप, स्कूल और सोशल ग्रुप सभी शामिल थे।

आशीष बताते हैं कि आहसमनेस की ख़ास बात ये है कि ये एक खास सिद्धांत पर काम करता है। कभी हर व्यक्ति के जीवन में एक हीरो होता था जो आपको हर मूमेंट के लिए शक्ति प्रदान करता है। ये शक्ति सामान्य ऑडियंस और शायद सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित करती है। यही एक नए प्रोडक्ट का निर्माण कर एक ब्रांड को जन्म देती है।

रचनात्मकता का व्यापार

आहसमनेस का मूल उद्देश्य निष्पादन, दृश्य, संगीत और लेखन में गुणवत्ता लाना है। आशीष और शिवानी इस स्टार्टअप के क्रिएटिव हेड हैं। इनके अलावा इनकी टीम में अनुभवी लेखक, एनिमेटर, इलस्ट्रेटर, वीडियोग्राफर, वीडियो एडिटर, संगीतकार और साउंड इंजीनियर हैं। आपको बताते चलें कि आहसमनेस ने कैनन, गोआईबीबो, विओम नेटवर्क्स, मैक्स इंश्योरेंस, इंडीहायर, पर्ल अकैडमी और जीएसके के साथ काम किया है।

इनकी टीम को क्लाइंट से जानकारी प्राप्त करनी होती है कि इन्हें क्या करना है उसके बाद इनकी टीम एक क्रिएटिव स्क्रिप्ट तैयार करती है जिसमें कहानी, कविता और लिरिक भी रहती है। इस तरह ये अपने क्लाइंट के विचार को अमली जामा पहनाते हैं और वो करके दिखाते हैं, जिसकी व्यक्ति ने अपने दिमाग में केवल कल्पना की होती है।

टीम अपनी तरफ़ से हर संभव कोशिश करती है कि उन्हें अपने ग्राहक को क्या देना है। आपको बता दें कि इसमें एनीमेशन, लाइव शूट इत्यादि सभी चीज़ें शामिल रहती हैं। इन सब के बाद टीम ओरिजिनल म्यूजिक का निर्माण करती है ताकि ये और क्लाइंट दोनों एक दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़ जाएं। ज्ञात हो की संस्था की पहली प्राथमिकता अपने क्लाइंट से जुड़ना है। 

आशीष बताते हैं कि “हमारा उद्देश्य अपने ग्राहक के दिमाग में वो भाव पैदा करना है, जिसे वो हमेशा याद रखे और कभी भूल न पाए। ”

आशीष बताते हैं, “अपने शुरुआती दिनों में संस्था के लिए ये बेहद मुश्किल काम था कि वो अपने क्लाइंट को अपनी टीम की रचनात्मकता और उनके द्वारा किये जा रहे काम से अवगत करा सके। चाहे कॉन्सेप्ट के लिए ओरिजिनल संगीत की बात हो या फिर स्टोरीलाइन की विजुअल से लेकर सही एनीमेशन तक दर्शाने में इन्हें काफ़ी मेहनत करनी पड़ी। साथ में बाज़ार में मौजूद अन्य प्रतिभागी भी इनके लिए एक बड़ी चुनौती थे।

परीस्थितियों को बदलने के लिए किये गए प्रयास

हालांकि, उन्होंने महसूस किया कि ऐसी पेशेवर एजेंसी को खोजना बड़ा मुश्किल है जो कॉर्पोरेट और अलग–अलग कंपनियों के लिए इन्हें संगीत आधारित वीडियो सामग्री उपलब्ध करा सके। शुरुआती दिनों में ऐसा करने में इन्हें बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर संगीतकार अलग होकर काम करते थे साथ ही वीडियो और एनीमेशन प्रोडक्शन हाउस भी अलग ही होकर काम करते थे। इनके विपरीत आहसमनेस एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म था जहाँ एक ही जगह पर सब काम होता था। यहाँ कोर आईडिया, स्क्रिप्ट, गीत सब एक ही स्थान पर जमा किये जाते थे। अतः इन्होंने अपना सारा फोकस कॉर्पोरेट की तरफ़ किया और उन्हें अपनी तरफ़ खींचा। इससे इन्हें बड़ा फायदा हुआ और इनकी पहुँच ज्यादा लोगों तक गयी।

टीम ने अपने रेविन्यू के बारे में कुछ नहीं बताया, मगर इतना है कि ये लाभ में चल रहे हैं। जहाँ कॉर्पोरेट के लिए इनका शुल्क 2 लाख रुपए हैं और अब ये टीम टीवी प्रचार में भी काम करती है, जहाँ ये कॉर्पोरेट से 50 लाख रुपए और किसी व्यक्ति विशेष से एक प्रोजेक्ट के लिए 50,000 से 70,000 रुपये तक लेती है।  

आशीष के अनुसार, आज आहसमनेस का प्रमुख लक्ष्य स्कूलों में अपनी पकड़ मजबूत करना है, जहाँ ये मनोरंजक तरीके से किस्से, कहानियों को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत कर सकें।

बात अगर बाज़ार की हो तो आज वीडियो कंटेंट और एडवरटाइजिंग तेज़ी से बढ़ रही है। जहाँ आज इस दिशा में सैकड़ों ऐड एजेंसियां और डिजिटल एजेंसियाँ काम कर रही हैं। साथ ही, व्यक्तिगत ग्राहकों के तौर पर भी बाज़ार में अपार संभावनाएँ हैं, जहाँ ज्यादातर लोग आज भी अपने परिवार के लोगों और दोस्तों से मदद लेना पसंद करते हैं।

सिस्को की एक रिपोर्ट के अनुसार 2017 तक दुनिया का 70 प्रतिशत मोबाइल इंटरनेट ट्रैफिक वीडियो में बनाया जायगा और भारत के संदर्भ में 2017 तक ये 1.8 एक्साबाईट प्रति माह होगा। साथ ही आज यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म में ऑनलाइन वीडियो की पहुँच 100 से 120 मिलियन है।

मूल- सिंधु कश्यप

अनुवादक -बिलाल एम जाफ़री   

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