आप स्टार्ट अप हैं? ऐसे करें निवेशक की तलाश, इन बातों का रखें ख्याल...

निवेशक से कैसे करें बातचीत? ... बातचीत में किन बातों का रखें ध्यान? ... किन हालात में करें निवेशक की तलाश? ...

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देश में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है जिनकी सोच होती है दूसरों के लिए काम ना कर अपना अलग मुकाम बनाना। अपनी सोच के दम पर, अपनी मेहनत के सहारे। यही वजह है कि स्टार्टअप वो जरिया है जिसको करने से ना सिर्फ समाज के सामने नई चीज आती है, बल्कि उस इंसान को भी पता चल जाता है कि वो कितने पानी में है। तभी तो कुछ स्टार्ट अप आसमान की बुलंदियों को छुते हैं, तो कुछ जमींदोज हो जाते हैं। किसी भी स्टार्ट अप के लिए निवेशक बहुत जरूरी होता है तो कई बार उससे खतरा भी बढ़ जाता है। पिछले दिनों आईआईटी मुंबई के दो पूर्व छात्रों को अपने स्टार्ट अप में निवेश के लिए इंतजार था निवेशक की हां। इसके लिए वो सभी तैयारियां भी कर चुके थे लेकिन अंतिम समय में जब निवेशक ने उनसे कहा कि ‘समय के साथ खतरा बढ़ गया है इसलिए वो भविष्य में निवेश की संभावना को टटोलेंगे’ तो वो गंभीर संकट में आ गए।

इससे पहले निवेशक ने उनको निवेश का पक्का आश्वासन दिया था। जिसको देखते हुए उन्होने मार्केटिंग की योजनाएं भी तैयार कर ली थी, नये लोगों की नई नियुक्ति की। इतना ही नहीं, टी-शर्ट बनाने के लिए उन्होने कई ऑर्डर भी ले लिये। बस अब इन लोगों को जरूरत थी निवेश की। अंतिम समय में जिस तरीके से निवेशक ने अपने हाथ खींच लिये इससे इनकी स्थिति और खराब हो गई। कहने की जरूरत नहीं है कि ये लोग काफी नाराज और निराश थे। क्योंकि इन लोगों ने संभावित निवेश को देखते हुए कई योजनाएं बनाई थीं। बावजूद इस घटना ने दोनों आईआईटी के पूर्व छात्रों को एक सबक दिया।

इन छात्रों को पहला सबक मिला कि हमेशा अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए गंभीरता से सोचना चाहिए। क्या आप कंपनी के विस्तार से खुश हैं जिसमें आपको पर्याप्त लाभ मिल रहा हो और आपका पूर्ण नियत्रंण हो। तो कभी भी निवेश की संभावना को ना टटोले, ऐसा ना सोचें कि दूसरे ऐसा कर रहे हैं इसलिए हमकों भी ऐसा करना चाहिए। लेकिन जब कोई निवेश की वजह से लक्ष्य हासिल ना कर पा रहा हो तभी उसको इस बारे में विचार करना चाहिए।

दूसरा सबक ये है कि निवेशक की तलाश करना अपने काम का ही हिस्सा होती है। कई बार हम लोग निवेशक की तलाश में इतना लग जाते हैं कि हमारा ध्यान अपने कारोबार से हट जाता है। क्योंकि निवेशक की तलाश करने में काफी वक्त और ऊर्जा बर्बाद होती है। जिसे हम कारोबार के विकास में भी लगा सकते हैं। अगर कहीं पर दो संस्थापक हों तो एक को निवेशक की तलाश करनी चाहिए और दूसरे को अपने कारोबार पर ध्यान लगाना चाहिए। क्योंकि कई बार निवेश मिलता भी है तो कई बार निराशा हाथ लगती है, लेकिन स्थायी कारोबार आपको दौड़ में बनाये रखता है।

तीसरा सबक ये है कि कई बार निवेशक से ये विश्वास मिल जाता है कि वो निवेश के लिये तैयार है। जिसके बाद हम दूसरे निवेशकों की तलाश करना बंद कर दते हैं और अपना समय योजनाओं को बनाने और कारोबार को बढ़ाने के लिये पैसा किस तरह खर्च किया जाये इस पर लगा देते हैं। इसके अलावा सिर्फ निवेशक के आश्वासन पर हम अपना ध्यान कारोबार पर कम लगाते हैं और ये सोचते हैं कि जब पैसा आएगा तो जबरदस्त मार्केटिंग के सहारे हम अपनी जगह फिर हासिल कर लेंगे। ये एक बहुत बड़ी गलती होती है और कई बार इसका उल्टा असर होता है। क्योंकि अंतिम समय में जब निवेशक अपनी बात से पलट जाए तो इसका असर ना सिर्फ कंपनी पर पड़ता है बल्कि हम आर्थिक घाटे में भी आ सकते हैं।

चौथा सबक ये है कि कभी भी निवेशक को अपनी कंपनी से जुड़ी सभी जानकारियां ना दे जैसे आपकी योजनाएं क्या हैं, विकास की क्या रणनीति है और आपके प्रतियोगी कौन हैं। ऐसा तब तक ना करें जब तक वो आपका बोर्ड का सदस्य ना बन जाए। हमें सिर्फ विश्वास के आधार पर निवेशक को जीतना चाहिए। क्योंकि जब हम निवेशक को ये बताएंगे कि हमारा प्रतियोगी कौन है और वो कितना पैसा कमा रहा है तो ये ऐसी बातें हमारे खिलाफ भी जा सकती है।

पांचवा सबक ये है किसी भी निवेश से पहले निवेशक के साथ मिलकर ये तय कर लें कि अगर दोनों में से कोई भी कंपनी को छोड़ेगा तो उसकी शर्तें क्या होंगी। जैसे भविष्य में कोई निवेशक देखे की कंपनी को बेचने में उसे अच्छा लाभ हो रहा है तो क्या आप उस कंपनी में बने रहना पसंद करेंगे या कभी आप दोनों के बीच हालात ठीक नहीं हुए तो उस स्थिति में क्या होगा। ये सब बातें पहले ही पूछ लेने में कोई बुराई नहीं होती।

छठा सबक ये है कि किसी भी कंपनी के लिए निवेश मिलना और निवेशक का बोर्ड सदस्य बनना एक बड़ी बात हो सकती है लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि ये एक कारोबारी समझौता है। क्योंकि निवेशक को जल्द से जल्द अपना पैसा वापस चाहिए होता है और आप कंपनी में विकास की संभावनाएं टटोल रहे होते हैं। इसलिए आप पहले से ही तय करें कि आप किसी चैकबुक के साथ शादी कर रहे हैं या अपने लिये एक अच्छा सहयोगी ढूंढ रहे हैं। जब इन छात्रों की डील भी कैंसिल हुई थी तो ये गुस्से में थे लेकिन धीरे धीरे उनकी समझ में आया कि ये एक कारोबारी समझौता था। जहां पर हो सकता है कि निवेशक ने खतरा देखा हो या फिर उसको कोई बेहतर कारोबार मिल गया हो या फिर उसने अपनी सोच बदल दी हो। आप किसी को भी दोष नहीं दे सकते। इसलिए आप हर वक्त कारोबार के विकास के बारे में सोचें तो आप निवेश ना मिलने के बावजूद कभी भी नहीं गिरेंगे। भले ही आपके विकास की रफ्तार कम हो सकती है।

सातवां सबक ये है कि जब निवेशक से इन छात्रों को निवेश के लिए भरोसा मिल गया तो इन लोगों ने निवेश के लिए और विकल्प की तलाश बंद कर दी। हालांकि इस दौरान इन लोगों के पास कई दूसरे निवेशक भी आएं जिन्होने इनके काम में रूचि दिखाई थी लेकिन निवेशक के भरोसे के सहारे इन लोगों ने दूसरे सभी निवेशकों के प्रस्ताव पर ध्यान नहीं दिया।

निवेशक के इंकार करने पर आईआईटी इन पूर्व छात्रों का मनोबल काफी टूट गया था तब इनके दिमाग में कंपनी को बेचने के बारे में भी विचार आया लेकिन इन्होने ऐसा नहीं किया। निवेश की कोशिश भले ही सफल नहीं हुई हो, तो परेशान ना हों क्योंकि आपने कोई भी कंपनी को इसलिए शुरू नहीं किया कि आप उससे निवेश हासिल करेंगे। निवेश हासिल करना सिर्फ एक गतिविधि है अपने कारोबार को विस्तार देने के लिए। इसलिए अपना ध्यान अपने कारोबार के विकास पर लगायें और उसे लाभदायक कारोबार के रूप में बदलें भले ही वो छोटा क्यों ना हो।

अंत में इन लोगों ने पाया कि कंपनी के लिए निवेश हासिल करना किसी कारोबार के लिए बहुत जरूरी नहीं होता है ये सिर्फ कारोबार का एक हिस्सा भर है।