जादुई ताने बाने और यथार्थवाद में लिपटा रश्दी का नया उपन्यास ‘टू ईयर्स एट मंथ्स एंड ट्वेंटी एट नाइट्स’

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पीटीआई


एक काल्पनिक कथा और जादुई यथार्थवाद के बीच के भेद को मिटाते हुए सलमान रश्दी का नया उपन्यास ‘टू ईयर्स एट मंथ्स एंड ट्वेंटी एट नाइट्स’ एक इंसान और एक परालौकिक शक्ति के आपस में मिलने-बिछुड़ने की काल्पनिक कहानी है जो वास्तविक सांसारिक, सामाजिक मुद्दों को अपने में समेटकर आगे बढ़ती है।

दो साल, आठ महीने और अट्ठाइस रातों के दरमियां के समय में बुनी गई कहानी वाले इस उपन्यास की कहानी एक ‘दुनिया’ नामक मायावी राजकुमारी के इर्द-गिर्द घूमती है जिसे ‘इब्न रूश्द’ नाम के एक इंसान से प्रेम हो जाता है, इन दोनों के असंभव से मिलन से असंख्य बच्चों के जन्म और रूश्द द्वारा दुनिया को छोड़ देने के बाद की घटनाओं को इसमें पिरोया गया है।

‘बुकर पुरस्कार’ से सम्मानित रश्दी लिखते हैं, ‘‘ यह एक मायावी राजकुमारी की कहानी है जिसे ‘लाइटनिंग प्रिंसेस’ के तौर पर जाना जाता है क्योंकि बिजली से वज्रपात करने में उसे महारत हासिल है। उसे बहुत पहले एक इंसान से प्यार होता है और वह वापस संसार में लौट आती है और बाद में युद्ध के लिए जाती है।’’

रश्दी ने लिखा है, ‘‘इसके अलावा यह कहानी है कई अन्य जिनों की, कयामत के दिनों की, और अजनबीपन के उस समय की जब वे साथ नहीं रहे और फिर अंत में 1001 से अधिक रातों की।’’ दुनिया नामक मायावी राजकुमारी, रूश्द का लंबे समय तक इंतजार करती है। रश्द को पता ही नहीं होता कि वह परालौकिक शक्तियों की मल्लिका है। दुनिया को छोड़ने के बाद रूश्द के वापस आने पर दुनिया परीस्तान और मानव संसार के बीच अपने को पाती है।

उसके बच्चों को उपन्यास में दुनियाजात के तौर पर दिखाया गया है जिनकी जिन होने की इकलौती पहचान उनके कान की लोलकी का गैरमौजूद होना है। फिर वह धीरे-धीरे अपनी खुद की खोज में सारे महाद्वीपों में फैल जाते हैं और फिर एक दूसरे की पहचान और अस्तित्व को ही भूल जाते हैं। दुनिया वापस नश्वर संसार में लौट जाती है और अपने वशंजों को ढूंढती है। इस तरह यह उपन्यास कई उतार-चढ़ावों के साथ आगे बढ़ता है।

इस उपन्यास में टीवी सीरीज ‘अलादीन’, ‘हैरी पॉटर’ के उपन्यासों और ‘अरेबियन नाइट्स’ की भी झलक मिलती है।

इसके अलावा रश्दी ‘इब्न रूश्द’ के चरित्र जिसे उन्होंने एक दर्शनवेत्ता के रूप में परिभाषित किया है, उसके माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता, ईश्वर के संदर्भ में तर्क और विज्ञान, विश्वास एवं कुरान इत्यादि विषयों की भी बात करते हैं और इस तरह यह उपन्यास एक काल्पनिक कथा और वास्तविकता के बीच फर्क की एक झलक पेश करता है ।