आपके लिटिल मास्टर्स का रखे पूरा ख्याल, “The Little Company”

महिलाएं ऑफिस में, तो बच्चे “The Little Company” मेंकामकाजी महिलाओं के लिए मददगारदिल्ली-मुंबई में कंपनी का कारोबार

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अच्छे खासे करियर को किन्ही कारणों से बीच में छोड़ देने पर किसे बुरा नहीं लगता, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इन मुश्किल हालात में भी रास्ता बनाना जानते हैं। ऐसे ही दो दोस्त हैं अमृता और बिंदु। कॉरपोरेट जगत में जब इनका करियर परवान पर था तो मां बनने के फैसले और मुंबई जैसे शहर में बच्चों की देखभाल के लिए गुणवत्ता वाली सुविधाओं के अभाव में इनको अपने करियर से समझौता करना पड़ा। और ये शुरूआत थी The Little Company यानी टीएलसी की। टीएलसी एक डे-केयर फर्म है जो आम लोगों के बच्चों के साथ कॉरपोरेट जगत में काम करने वालों के बच्चों की देखभाल करती है।

अमृता और बिंदु
अमृता और बिंदु

टीएलसी बच्चों के लिए जो सेवाएं देती है वैसी ही सेवाएं बाजार में मौजूद दूसरे लोगों भी देते हैं जैसे डे-केयर, प्ले स्कूल और विभिन्न तरह की दूसरी गतिविधियां। टीएलसी बच्चों के लिए घर में भी डे-केयर की सुविधा उपलब्ध करता है। फिलहाल इन लोगों की मुंबई में गोदरेज, हिन्दुस्तान लिवर जैसी कंपनियां ग्राहक हैं तो दिल्ली, एनसीआर में आरबीएस, जेनपैक्ट, अमरचंद और मंगलदास जैसी कंपनियां ग्राहक हैं। इसके अलावा इन लोगों के दिल्ली और मुंबई समेत डीएलएफ गुडगांव में भी अपना अलग केंद्र हैं।

अमृता सिंह ने कार्मस से स्नातक की डिग्री हासिल की और उद्यमी बनने से पहले वो बैंक और टेक्सटाइल हाउस में काम कर चुकी थीं। जबकि उनकी सहयोगी बिंदु कैमिकल इंजीनियर हैं वो कई कैमिकल कंपनियों के अलावा अंबुजा सीमेंट और भारत पेट्रोलियम में काम कर चुकी हैं। इसके अलावा बिंदु ने डे-केयर मैनेजमेंट का कोर्स भी किया हुआ है। टीएलसी का आइडिया इन दोनों को साल 2001 में तब आया जब ये दोनों मां बनने वाली थी। इन दोनों ने मिलकर शुरूआत में पार्टनशिप कंपनी के तौर पर काम किया। जब दस साल पहले इन लोगों ने कंपनी शुरू कि तो अपनी बचत से 5-5 लाख रुपये अपनी कंपनी में लगाये जिसके बाद पिछले साल इनकी कंपनी की आय 3 करोड़ तक पहुंच गई थी।

ये लोग बी 2 बी मॉडल पर काम करते हैं इसके लिए टीएलसी ऑनसाइट या कार्यालय के आसपास ही डे-केयर की व्यवस्था करता है। जबकि बी 2 सी मॉडल के तहत इन लोगों के अलग अलग जगहों पर डे-केयर सेंटर हैं जहां पर कोई भी अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला करा सकता है। बिंदु के मुताबिक बी 2 बी मॉडल के तहत पिछले कुछ सालों में इन लोगों ने काफी अच्छी प्रगति की है। क्योंकि कॉरपोरेट कंपनियां अपने यहां के टेलेंट को गवाना नहीं चाहती इसलिए वो डे-केयर की सुविधा के लिए ऐसे लोगों से हाथ मिला रही हैं। टीएलसी जिस भी कॉरपोरेट ऑफिस में भी डे-केयर की सुविधा देती वही कंपनी उसे मैनेजमेंट फीस देती है।

अमृता के मुताबिक टीएलसी बच्चों की देखभाल में गुणवत्ता पर खास जोर देती है। यही वजह है कि आज उनके इतने सेंटर चल रहे हैं और इनकी कोई फ्रेंचाइजी भी नहीं है।

टीएलसी बच्चों की देखभाल पर खास ध्यान देती है और ये चीज उसकी सोच, उसके काम और उसकी प्रक्रिया में साफ नजर आता है। यही कारण कि ये दूसरों से अलग हैं। जो बच्चे 6 महिने से लेकर 18 महिने तक होते हैं उनके लिये कंपनी 2 बच्चों में 1 केयरटेकर को रखती है जबकि 18 महिने से ज्यादा के बच्चों के लिए कंपनी 5 बच्चों पर 1 केयरटेकर रखती है। कंपनी ऐसे लोगों को अपने यहां रखती हैं जिनको इस क्षेत्र का खासा अनुभव हो ताकि बच्चों का समुचित विकास हो। टीएलसी अपने ग्राहकों पर खास ध्यान देता है। यही कारण है कि कोई मां अगर अपने बच्चे के लिए महफूज जगह चाहती है तो वो टीएलसी की सेवाएं लेना पसंद करती हैं। इसके अलावा ऐसे लोग भी बड़ी संख्या में यहां आते हैं जो अपने शौक के पूरा करने, दूसरे करियर में अपना भाग्य अजमाने और फिर से पढ़ाई करने के लिए अपने बच्चों पर ध्यान ना देने के कारण टीएलसी की सेवाएं चाहते हैं। इतना ही कई लोगों ने माना कि उनका सिर्फ एक ही बच्चा है इसलिए वो हम उम्र बच्चों के साथ कुछ वक्त बिता सके इसके लिए वो टीएलसी की मदद ले रहे हैं।

बिंदु के मुताबिक उनको तब काफी बुरा लगता है जब कोई अभिभावक अपने स्टॉफ को पैसे देकर सप्ताहांत में बच्चे की देखभाल करने या फिर टीका लगाने के लिए कहता है। चार लोगों के साथ शुरू हुई टीएलसी में आज दिल्ली और मुंबई में 130 कर्मचारी हैं। जिनकी शैक्षिक योग्यता की तुलना नहीं की जा सकती लेकिन ये समान विचार धारा वाले लोग हैं। जो टीएलसी की संस्कृति के लिए बिल्कुल फिट हैं। नजरिया ही सबकुछ होता है। किसी भी काम में कोई कौशल तभी आता है जब उसमें सीखने की इच्छा हो। इसलिए जब भी ये लोग किसी भी नये व्यक्ति को नौकरी पर रखते हैं तो उसमें शैक्षिक योग्यता के साथ साथ उसमें करूणा, स्वामित्व, नेतृत्व और जवाबदेही की भावना को भी परखते हैं। फिलहाल ये लोग अपने 10 सेंटर को जोड़ रहे हैं और अगले स्तर में इनकी योजना ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट खोलने की है। ताकि बच्चों की बेहतरी के लिए उनके अभिभावकों के साथ जुड़ सकें। बिंदु के मुताबिक वो अपना कारोबार बढ़ाना तो चाहते हैं लेकिन गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते।

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