'बेबीबॉक्स'... आपके बेबी का पूरा ख्याल

सालभर में 10 लाख घरों में पहुंचा बेबीबॉक्स

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आपके घर में एक नन्हा मेहमान आए और इसके बाद अगर आपको इस ब्रह्मांड के प्रमुख ब्रांड वाले डायपर्स, बेबी वाइप्स, सैनिटाइजर्स और बच्चों के लिए दूसरे जरूरी सामान से भरा एक सैंपल बॉक्स मुफ्त में मिले, तो आपको कैसा लगेगा? जाहिर है, सही वक्त पर और बेहद जरूरी इस तोहफे को पाकर आप काफी खुश होंगे और वो भी तब जब आपको ये तोहफा आपके डॉक्टर या अस्पताल के स्टाफ के जरिए मिले, जिन्हें आप अच्छी तरह जानते हों, तो आपकी खुशी दोगुनी हो जाएगी।

पश्चिमी देशों में इस तरह के सैंपल गिफ्ट ग्राहकों को आकर्षित करने में काफी असरदार साबित हुए हैं। वैश्विक ब्रांड तो दशकों से इस उपाय को अपनाते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में बाउंटी नाम की एक कंपनी पिछले 30 साल के दौरान नई-नई बनी लाखों मांओं को मुफ्त सैंपल बांट चुकी है। भारत में भी बेबीबॉक्स ने नई-नई मांओं को मुफ्त में इस ब्रह्मांड के बड़े ब्रांड के प्रोडक्ट मुफ्त में पहुंचाने का काम शुरू किया है। बेबीबॉक्स केसीएल, एचयूएल, डाबर, महिंद्रा रिटेल, आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल, अदित्य बिरला ग्रुप जैसी कंपनियों के मुफ्त सैंपल लोगों तक पहुंचा रही है।

भारत में बेबीबॉक्स कितना असरदार रही है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक साल के दौरान ये भारत के 32 शहरों के 4000 अस्पतालों के माध्यम से करीब 10 लाख माता-पिता तक पहुंच चुकी है। बेबीबॉक्स के संस्थापक दीपक वर्मा कहते हैं, ‘हमने ये सब बाजार में आने के महज तीन साल के अंदर कर दिखाया। और हम लोग तेजी आगे बढ़ रहे हैं।’

दीपक वर्मा
दीपक वर्मा

कैसे आया आइडिया?

दीपक को नवजात शिशुओं की जरूरत की ब्रांडेड चीजों के गिफ्ट हैंपर का आइडिया तब आया जब वो खुद पिता बने थे। दीपक और उनकी पत्नी काफी खुश थे और इस बात को लेकर काफी उत्सुक थे कि उनकी नवजात बच्ची के लिए उन्हें क्या-क्या चाहिए। उन्होंने याद करते हुए बताया कि वो कैसे बाजार में सही उत्पादों की तलाश कर रहे थे, तभी उन्हें बाजार में एक बहुत ही बढ़िया ब्रेस्ट-फीडिंग एड मिला। इसे देखते ही उनके मन में ख्याल आया कि कोई उन्हें इस तरह के प्रोडक्ट की जानकारी पहले क्यों नहीं दिया?

दीपक ने जब खुद कारोबार शुरू करने का फैसला किया था, तब तक वो भारत के प्रमुख मीडिया हाउस के एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग डिपार्टमेंट में करीब 13 साल तक काम कर चुके थे। वो बाजार में ऐसे क्षेत्र की तलाश कर रहे थे, जिसका पहले ज्यादा दोहन नहीं हुआ हो, तभी उन्हें न्यू पेरेंट्स को इस तरह के मुफ्त सैंपल मुहैया कराने का आइडिया आया। उन्होंने अपने इस आइडिया के साथ करीब दो साल तक काम किया और मई, 2011 में बेबीबॉक्स को लॉन्च किया।

वो जानते थे कि नए मात-पिता तक पहुंचने के लिए अस्पताल, क्लिनिक और मैटरनिटी सेंटर्स उनके लिए माध्यम का काम करेंगे। इसलिए उनकी पहली चुनौती अस्पतालों के साथ गठजोड़ करना था। वो अपने अचानक किए एक खोज के बारे में बताते हैं। दीपक को दिल्ली के बड़े अस्पतालों में से एक के प्रमुख से मुलाकात का वक्त मिला। काफी इंतजार के बाद उन्होंने मैटरनिटी सेंटर के नर्स और दूसरे कर्मचारियों के साथ बातचीत की। इसी बीच, अस्पताल के प्रमुख पहुंचे और उनका अभिवादन करते हुए अंदर ले गए। नर्स और स्टाफ से बातचीत के दौरान ही दीपक को समझ आ गया था कि उनके बेबीबॉक्स के प्रचार के लिए ये लोग ही सबसे बेहतर माध्यम साबित होंगे।

कैसे की तैयारी?

अब तक साफ हो चुका था कि बेबीबॉक्स अस्पताल स्टाफ की ओर से नए माता-पिता को सम्मानार्थ तोहफे के तौर पर दिया जाएगा। दीपक ने बताया, ‘अब समय आ गया था कि हम ग्राहकों को इस कारोबार में और ज्यादा गंभीरता से जोड़ें, क्योंकि जो दंपति अभी-अभी माता-पिता बने हैं, उनके लिए इस तरह के बेबी प्रोडक्ट काफी जरूरी होते हैं। अगर किसी ने इस तरह के प्रोडक्ट खरीद भी लिए हैं, तो भी वो हमारे दिए प्रोडक्ट को इस्तेमाल करने के लिए तैयार दिखते हैं, क्योंकि ये प्रोडक्ट उन्हें अस्पताल की ओर से तोहफे के तौर पर मिल रहे थे।’

बेबीबॉक्स ने ऐसे अस्पतालों की पहचान की जहां सबसे ज्यादा संख्या में नवजात शीशु पैदा होते हैं और उन्हें ही अपने कारोबार के लिए लक्ष्य बनाया। ‘एक बार जब बड़े अस्पतालों से करार हो जाए, तो दूसरे अस्पतालों को समझाने में आसानी हो जाती है।’ धीरे-धीरे दूसरे शहरों के अस्पतालों से भी संपर्क साधा गया और अभी 40 लोगों की टीम देश के करीब 4000 अस्पतालों, क्लिनिक और मैटरनिटी सेंटर्स को मैनेज कर रहे हैं।

दीपक का कहना है, ‘हमलोगों का एक तय माध्यम है, निश्चित पहुंच है और एक ऐसा प्रबंधन है जो सैंपल के वितरण का प्रबंधन करता है।’ जिन नवजात बच्चे के माता-पिता को बेबीबॉक्स का गिफ्ट हैंपर मिलता है, उन्हें सबूत के लिए एक पंजीकरण कार्ड भरना होता है। गिफ्ट हैंपर सही व्यक्ति तक पहुंचा है या नहीं, इसे तय करने के लिए टीम के सदस्य माता-पिता को फोन कर जानकारी लेते हैं। दीपक ने बताया, ‘इस तरह हम तय करते हैं कि कोई बर्बादी न हो। आज हम जिन अस्पतालों के साथ काम कर रहे हैं वो ए, बी और सी कैटेगरी के हैं जहां आने वाले लोग उच्च से मध्यम स्तर के खर्च करने वाले होते हैं। समाज के ऐसे लोग ब्रांडेड प्रोडक्ट को लेकर काफी सचेत होते हैं।’

उत्पाद का क्रमिक विकास

कलारी कैपिटल और इसकी मैनेजिंग डायरेक्टर वाणी कोला शुरू से ही दीपक के साथ जुड़ी रही हैं। दीपक याद करते हुए बताते हैं, ‘वाणी बहुत अच्छी सहयोगी रही हैं। वो सैंपलिंग टूल को बहुत अच्छी तरह से समझती हैं। हालांकि भारत में अभी ये काम अपने शुरुआती दौर में ही है और इस क्षेत्र में करने के लिए काफी कुछ है। बेबीबॉक्स की शुरुआत से ही वाणी हमारे साथ रही हैं और हमें इस कारोबार को प्रभावी बनाने के तरीके बताती रही हैं।’

बेबीबॉक्स का ये विकास इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत के एफएमसीजी सेक्टर में इसके और आगे बढ़ने की गुंजाइश है। भारत की अर्थव्यवस्था में 13.1 बीलियन डॉलर वाले एफएमसीजी सेक्टर को चौथा सबसे बड़ा क्षेत्र माना जाता है।

दीपक और उनकी टीम ने अभी अभी अपने बेबीबॉक्स को नए रूप में पेश किया है जो अब ऑनलाइन भी उपलब्ध है। उन्हें पूरा विश्वास है कि वो पहले से कहीं ज्यादा तेजी से विकास करेंगे। अब मुनाफा कमाने वाली कंपनी बनने के बाद, दीपक बेबीबॉक्स अब फार्मास्यूटिकल्स, ब्यूटी और वेलनेस सैंपलिंग मुहैया कराने में भी हाथ आजमाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए वो जल्दी ही फंड जमा करने के लिए सामने आएंगे।

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