सराहनीय कदम: शौचालय बनवाने पर मिलेगा कलेक्टर के साथ कॉफी पीने का मौका

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बॉलिवुड टॉक शो 'कॉफी विद करण' की तरह ही राजस्थान के बाड़मेर जिले के कलेक्टर ने 'कॉफी विद कलेक्टर' नाम से एक चौंकाने वाली मुहिम शुरू की है, जिसके तहत ग्रामीणों को घर में शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

फोटो साभार: Shutterstock
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जो ग्रामीण अपने घर में शौचालय बनवाकर उसका नियमित तौर पर इस्तेमाल करेंगे उन्हें कलेक्टर के साथ कॉफी पीने और बात करने का मौका मिलेगा।

इसके पहले बाड़मेर जिले में ही तत्कालीन कलेक्टर सुधीर शर्मा ने शौचालय से जुड़ी एक स्कीम शुरू की थी जिसके तहत गांव के हर परिवार को शौचालय में शौच करने पर हर माह दो हजार पांच सौ रुपए देने की बात कही गई थी।

बॉलिवुड हस्तियों के फेमस टॉक शो 'कॉफी विद करण' के बारे में तो आप सबने सुना ही होगा। इस शो को होस्ट करने वाले फिल्ममेकर करण जौहर फिल्मी हस्तियों का मजेदार अंदाज में इंटरव्यू करते हैं। इसमें हमें कई बार चौंकाने वाली बातें भी पता चलती हैं। इस शो के तरह ही राजस्थान के बाड़मेर जिले के कलेक्टर ने 'कॉफी विद कलेक्टर' नाम से एक चौंकाने वाली मुहिम शुरू की है, जिसके तहत ग्रामीणों को घर में शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कलेक्टर की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि जो ग्रामीण अपने घर में शौचालय बनवाकर उसका नियमित तौर पर इस्तेमाल करेंगे उन्हें कलेक्टर के साथ कॉफी पीने और बात करने का मौका मिलेगा।

इस पहल की शुरुआत करने वाले कलेक्टर शिव प्रसाद नकाते ने बताया कि उन्होंने 17 दिसंबर तक जिले को पूरी तरह से खुले में शौचमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। वह ग्रामीणों से अपने घरों में शौचालय बनवाने और उनका इस्तेमाल करने की अपील कर रहे हैं। बाड़मेर की 489 ग्राम पंचायतों में से केवल 173 ग्राम पंचायतें खुले में शौचमुक्त हैं। शौचालय न होने की वजह से जिले के सरकारी स्कूल के बच्चे बीच में ही स्कूल छोड़ देते हैं। प्रदेश में सबसे बुरी स्थिति बाड़मेर जिले की है, जहां 97 हजार बच्चे हर साल पढ़ाई छोड़ दे रहे हैं।

बाड़मेर में स्कूल छोड़ने के मामले में सबसे ज्यादा स्कूल की बच्चियां शामिल हैं जो स्कूलों में टॉयलेट नहीं होने की वजह से पढ़ाई छोड़ रही हैं। इन बच्चों की उम्र छह से 14 साल के बीच है। इसी वजह से जिले में शौचालय बनवाने पर काफी जोर दिया जा रहा है।

रिसर्च में सामने आया है कि जल्दी शादी, स्कूल में अलग टॉयलेट की व्यवस्था न होना, महिला शिक्षकों का न होना, गर्ल्स स्कूल होने जैसी वजहों से लड़कियों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। कलेक्टर ने बताया कि 15 अगस्त तक दो पंचायत समितियां बेतू और गिदा खुले में शौचमुक्त हो जाएंगी। इसके अलावा जिन पंचायतों में पानी की समस्या है, वहां नरेगा के तहत वाटर टैंक बनवाने और स्टोरेज की सुविधा की मंजूरी दी जा रही है।

कलेक्टर शिवप्रसाद ने बताया, 'मैंने एक प्रोत्साहन योजना के तौर पर यह स्कीम शुरू की कि जो लोग अपने घरों में शौचालय बनवाएंगे और उसका नियमित तौर पर इस्तेमाल करेंगे, मैं उनके घर जाऊंगा और उनके साथ कॉफी पिऊंगा।' इसके अलावा जिला मुख्यालयों पर उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा। ऐसा करने से लोग सम्मानित महसूस करेंगे और इससे दूसरे लोग भी अपने घरों में शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित होंगे।

यह अपने आप में एक अनूठी योजना है। देश में खुले में शौच करने को बंद करवाने और लोगों को रोजाना शौचालय का इस्तेमाल करने पर जोर डालने के लिए कलेक्टर की ये अनूठी पहल काबिल-ए-तारीफ है।

इसके पहले बाड़मेर जिले में ही तत्कालीन कलेक्टर सुधीर शर्मा ने शौचालय से जुड़ी एक स्कीम शुरू की थी जिसके तहत गांव के हर परिवार को शौचालय में शौच करने पर हर माह दो हजार पांच सौ रुपए देने की बात कही गई थी। हालांकि यह योजना सिर्फ दो पंचायतों में ही शुरू की गई थी और इसे बाकी गांवों में बढ़ाने का प्लान था।

स्वच्छ भारत मिशन को प्रोत्साहित करने और लोगों को शौचालय का उपयोग करने के लिए जागरूक करने के लिए केयर्न इंडिया ग्रामीण विकास संगठन और जिला प्रशासन के सहयोग से बेतू और गिदा पंचायतों में यह अनूठी योजना शुरू की गई थी। अब यह दोनों पंचायतें लगभग खुले में शौचमुक्त हो जाएंगी। इस स्कीम के तहत भत्ते के दावेदारों की 2-3 महीने तक निगरानी की जाती है और शौचालय का इस्तेमाल सुनिश्चित होने के बाद 25,00 रुपए का भत्ता दिया जाता है।

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Manshes Kumar is the Copy Editor and Reporter at the YourStory. He has previously worked for the Navbharat Times. He can be reached at manshes@yourstory.com and on Twitter @ManshesKumar.

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