नौकरी चली जाए, कोई चिंता नहीं, 'विश्वकर्मा खाता' है न!

एक ऐसा खाता जो नौकरी जाने के बाद करेगा परिवार का भरण-पोषण...

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एक तो नौकरियां मिल नहीं रहीं, तमाम दावों और खुशफहम खबरों के बावजूद रोजी-रोटी का देश ही नहीं, पूरी दुनिया में अकाल-सा पड़ा है, दूसरे मुसीबत ये कि नौकरी मिल गई तो उसे बचाए रखने के सौ-सौ झमेले। ऐसे में मोदी सरकार 'विश्वकर्मा खाता' के जरिए लगभग पचास करोड़ लोगों के गाढ़े वक्त का इंतजाम करने में जुटी है। नौकरी चले जाने के दौरान इस खाते से भरण-पोषण राशि की कुछ वक्त तो सरकार भरपाई करती रहेगी।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
यदि कोई व्यक्ति प्राइवेट सेक्‍टर में नौकरी करता है और उसकी नौकरी चली जाती है तो अब उसको परिवार का खर्च चलाने की चिंता नहीं करनी चाहिए। उसका 'विश्‍वकर्मा खाता' उसके परिवार की भरण-पोषण राशि चुकाता रहेगा

एक तो नौकरियां मिल नहीं रहीं, तमाम दावों और खुशफहम खबरों के बावजूद रोजी-रोटी का देश ही नहीं, पूरी दुनिया में अकाल-सा पड़ा है, दूसरे मुसीबत ये कि नौकरी मिल गई तो उसे बचाए रखने के सौ-सौ झमेले। ऐसे में मोदी सरकार 'विश्वकर्मा खाता' के जरिए लगभग पचास करोड़ लोगों के गाढ़े वक्त का इंतजाम करने में जुटी है। नौकरी चले जाने के दौरान इस खाते से भरण-पोषण राशि की कुछ वक्त तो सरकार भरपाई करती रहेगी।

नौकरियों के लिए आजकल जैसी मारामारी मची हुई है, एक बुलाओ, हजार दौड़े पहुंच जाते हैं। तकलीफ कितनी भयावह है। जितनी मशक्कत नौकरी मिलने की, उससे ज्यादे फजीते नौकरी बचाए रखने के। देखिए कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल (एचपीयूबीएस) के छात्रों को नामी कंपनियां एमबीए की डिग्री पूरी होने से पहले सालाना लाखों रुपए के सैलरी जॉब ऑफर कर रही हैं। ऑनलाइन चयन प्रक्रिया अपनाकर ज्वाइन करने का न्योता भी दे रही हैं। बिना किसी अनुभव विवि के दो छात्रों को नामी कंपनियों ने साढ़े पांच लाख तक सालाना वेतन के पैकेज ऑफर किए हैं।

इंजीनियर की नौकरी चाहने वालों के लिए एक और सुनहरा चांस दे रही है दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी। उसने विभिन्न श्रेणी में सात पदों की भर्तियां निकाली हैं। इनके लिए आवेदन भी जारी कर दिए गए हैं। अब आइए, एक नई जानकारी पर नजर डालते हैं। मोदी सरकार ने 50 करोड़ कर्मचारियों को प्रॉविडेंट फंड, पेंशन सहित तमाम सोशल सिक्‍योरिटी बेनेफिट मुहैया कराने के लिए यूनिवर्सल सोशल सिक्‍योरिटी स्‍कीम तैयार की है। इस स्‍कीम के तहत सरकार 50 करोड़ कर्मचारियों का ‘विश्‍वकर्मा अकाउंट’ खुलवाएगी। इस खाते के जरिए 50 करोड़ लोगों को पीएफ पेंशन सहित 10 से अधिक सोशल सिक्‍योरिटी बेनेफिट मिलेंगे। इस स्‍कीम में कोई भी काम करने वाला लगभग हर भारतीय कवर होगा। यानी आने वाले समय में सरकार सभी वर्कर के लिए पीएफ और पेंशन की सुविधा सुनिश्चित करने जा रही है। इस स्‍कीम का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। जल्द ही इस पर अमल होने जा रहा है।

यदि कोई व्यक्ति प्राइवेट सेक्‍टर में नौकरी करता है और उसकी नौकरी चली जाती है तो अब उसको परिवार का खर्च चलाने की चिंता नहीं करनी चाहिए। उसका 'विश्‍वकर्मा खाता' उसके परिवार की भरण-पोषण राशि चुकाता रहेगा। इसका लाभ देश के 50 करोड़ लोगों को मिलने का दावा किया जा रहा है। 'विश्‍वकर्मा खाता' एक सोशल सिक्‍योरिटी किस्म का अकाउंट होगा। किसी की नौकरी चली जाती है तो 'विश्‍वकर्मा खाता' सुनिश्चित करेगा कि उसको ऐसे गाढ़े वक्त में बेनेफिट कैसे मिलेगा। यद्यपि यह इमदाद कुछ खास समय के लिए ही मिलेगी। यह राशि कर्मी के सैलरी अमाउंट पर निर्भर करेगी। मकसद है, इस बेरोजगारी के दौरान वह व्यक्ति कोई दूसरा रोजगार ढूंढ ले। सुविधा ये भी है कि यदि कोई अस्वस्थ होने के कारण लंबे समय तक काम करने के योग्‍य नहीं रह जाता है तो इन वैलिडिटी बेनेफिट के तहत उसे एक तय राशि का भुगतान किया जाएगा।

जो भी जरूरतमंद 'विश्‍वकर्मा खाता' खुलवाना चाहता है तो इस स्‍कीम के तहत, वह जिस कंपनी में काम करता है तो ये उस संस्थान की जिम्‍मेदारी होगी। यदि तय समय सीमा के भीतर कंपनी या संस्‍थान की ओर से उसका खाता नहीं खुलवा दिया जाता है तो वह खुद अपना खाता खुलवा सकता है। इसके लिए अलग से व्‍यवस्‍था रहेगी। साथ ही जो व्यक्ति स्वयं कोई काम-धंधा कर रहा है, वह भी अपना 'विश्‍वकर्मा खाता' स्वयं खुलवा सकता है। यह खाता पोर्टेबल होगा।

यदि किसी ने चंडीगढ़ में काम-काज के दौरान अपना 'विश्‍वकर्मा खाता' खुलवा लिया है तो शहर बदल जाने पर वाराणसी में भी उसका वह खाता काम करता रहेगा। सहयोग के लिए सरकार ने सामाजिक आर्थिक आधार पर अलग अलग तरह के वर्गों में ऐसे सुविधाप्राप्त लोगों को कैटेगराइज कर रखा है। कमजोर आर्थिक हालत वाले लोगों को अपने विश्‍वकर्मा अकाउंट में कोई कंट्रीब्‍यूशन नहीं करना होगा। उनको पीएफ, पेशन सहित दूसरे सोशल सिक्‍योरिटी बेनेफिट के लिए पूरा कंट्रीब्‍यूशन सरकार करेगी। ऐसे कर्मी जिनकी आय विश्‍वकर्मा अकाउंट कंट्रीब्‍यूट करने भर के लिए होगी, उनको सोशल सिक्‍योरिटी बेनेफिट के लिए कंट्रीब्‍यूशन करना पड़ेगा, जो उनकी सैलरी या वेज सेलिंग का 12.5 फीसदी से लेकर 20 फीसदी तक होगा।

यद्यपि सरकार ये व्यवस्था बना रही है लेकिन नौकरियां मिलने अथवा उनमें बने रहने की अपनी अलग ही चुनौतियां हर सेक्टर में बनी हुई हैं। मामूली-मामूली चूक पर भी कर्मी की अहमियत दांव पर लग जा रही है। उसके मददगार सहयोगी बिना वजह किसी अन्य को दे दिए जाते हैं? बॉस का बर्ताव अनायास सख्त हो जाता है। बात-बात पर नई नौकरी तलाशने के फरमान मिलने लगते हैं। ऐसे में नौकरी में बने रहने के लिए कुछ एहतियात भी अब बहुत जरूरी हो गए हैं। मसलन, यदि आपको किसी ऑफिसियल मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित नहीं किया जा रहा है, या महत्वपूर्ण मेल में लूप में नहीं रखा जा रहा है तो इसका मतलब है कि आपकी अहमियत अब बॉस की नजरों में कम हो गई है।

अगर बॉस सुझाव की अनदेखी कर रहा है, न तो नजरें मिलाता है और न ही देखकर स्माइल करता है, वह हर काम की जरूरत से ज्यादा निगरानी रखने लगता है, बार-बार टोकने लगता है, तो समझ में आ जाता है कि अब नौकरी खतरे में है। देश में रोजगार सृजन लगातार घट रहा है। एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार रोजगार बढ़ने के बजाय देश में प्रतिदिन 550 रोजगार के अवसर समाप्त हो रहे हैं। इसका मतलब है कि 2050 तक देश में 70 लाख रोजगार समाप्त हो जाएंगे। उस दौरान देश की आबादी 60 करोड़ बढ़ चुकी होगी। इसके अलावा ऑटोमेशन की वजह से भी बड़ी संख्या में नौकरियां जाने का खतरा पैदा हो गया है। श्रम ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार दो वर्ष पहले देश में सिर्फ 1.35 लाख नए रोजगार के अवसरों सृजित हुए थे। उससे दो साल पहले 4.19 लाख और उससे दो वर्ष पूर्व 9 लाख रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ था। इन आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण विचलित करता है। ऐसे में अब मोदी सरकार के 'विश्वकर्मा खाता' की अहमियत भी समझ में आ जानी चाहिए।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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