प्रदूषण से लड़ने में सहभागी बनें, ‘ईको वर्क्स’ के सहारे इंडोर बागवानी करें

बैंगलोर स्थित बायोटैक स्टार्टअप घरों और कार्यालयों में अंदरूनी बागवानी को सुलभ करने वाले उत्पाद करता है तैयारनासा के एक शोध जिसमें उन्होंने पाया था कि अंदरूनी पौधे अंदरूनी प्रदूषण को काबू करने में मददगार होते हैं से हुए प्रेरितअंदरूनी बागवानी को बढ़ावा देने के लिये ईको वंडर जैल के अलावा ईको वैज वाॅश सहित अन्य उत्पाद भी करते हैं तैयारआने वाले समय में बैंगलोर के हर कार्यालय और घर को हरा करने के बाद देशभर में विस्तार की है योजना

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जैसे-जैसे हम विकास के रास्ते पर अग्रसर होते जा रहे हैं वातावरण में प्रदूषण का स्तर और बेहद विषैली कार्बन-डाई-आॅक्साइड की मात्रा दिनोंदिन बढ़ती जा रही है और इनपर नियंत्रण पाने के लिये बेहद जरूरी हरियाली तो देश के कई शहरों से जैसे गायब सी होती जा रही है। ऐसे माहौल में इंडोर उद्यान यानि ऐसे उद्यान जिन्हें घर या अन्य किसी स्थान के भीतर प्रबंधित किया जा सके अब अच्छे स्वास्थ्य के प्रति जागरुक लोगों की आवश्यक्ता बनते जा रहे हैं। हालांकि इन उद्यानों को प्रबंधित करने में कई परेशानियां और दिक्कतें सामने आती हैं। चाहे मिट्टी की व्यवस्था करनी हो या फिर पौधों के लिये उचित पोषक तत्वों और सूर्य की रोशनी को सुनिश्चित करना हो या फिर उन्हें लगातार पानी देना हो, ये सब ऐसी चुनौतियां हैं जिनसे पार पाना इतना आसान नहीं होता है।

इस समस्या का एक वैज्ञानिक समाधान प्रदान करने की दिशा में बैंगलौर का एक बायोटेक स्टार्टअप ‘ईको वर्क्स’ एक अनोखा उत्पाद लेकर सामने आया है। यह एक गंधरहित सुपर एबसाॅर्बेंट क्राॅस लिंक्ड पाॅलीमर जैल को लेकर सामने आया है। इनका तैयार किया हुआ ‘ईको वंडर जैल’ एक अच्छे खासे स्पंज जैसा दिखता है जो पानी को अपने भीतर सोख लेता है और पौधों को आवश्यक पोषकतत्व प्रदान करने में सक्षम होता है।

ईको वंडर जैल शहरी इलाकों में घरों इत्यादि के भीतर हरियाली को बढ़ावा देने में मदद करने में सक्षम एक नया और अनोखा उत्पाद है जो देखने में भी बेहद आकर्षक लगता है। यह जैल बागवानी को काम को बेहद आसान और परेशानी से मुक्त बनाता है और यह बागवानी के काम को एक नई दिशा प्रदान करते हुए इसे इंटीरियर डिजाइनिंग के क्षेत्र में विस्तार करने में भी मदद कर रहा है।


नासा से आपके दरवाजे तक, ताजी हवा के झोंके

इस्राइल के मशहूर तेल अवीव विश्वविद्यालय के उपग्रह डाटा की मदद किये गए एक अध्ययन के अनुसार बैंगलोर में वर्ष 2002 से 2010 के मध्य में वायु प्रदूषण में औसतन करीब 34 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वर्तमान में बैंगलार के 10 प्रतिशत व्यस्क और 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे ऐसी बीमारियों से ग्रसित हैं जिनका मूल उनके रहने के प्रदूषित वातारण में निहित हैं यानि वे प्रदूषित वायु के कारण जनित बीमारियों की चपेट में हैं। सिर्फ बैंगलौर ही नहीं कमोबेश लगभग यही स्थिति देशभर के अन्य शहरों की भी है। और इन सब मुद्दों के पीछे सिर्फ एक ही कारण है और वह है शहरी इलाकों में हरियाली का घटता स्तर।

ऐसे में दिलचस्प यह है कि एक बिल्कुल अप्रत्याशित स्त्रोत, यूनाइटेड स्टेट्स नेश्नल एयरोनाॅटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन जिसे हम सब नासा के नाम से जानते हैं, इस संकट का एक जैविक समाधान उपलब्ध करवाने की दिशा में सामने आया है। अंतरिक्ष में आॅक्सीजन के कम से कम उपयोग करने की खातिर मानवरहित विमान भेजने की दिशा में जारी शोधों के दौरान इन्होंने पाया कि अंदरूनी प्रदूषण को अंदरूनी पौधों की मदद से बहुत हद तक काबू किया जा सकता है।

उनके इस दृष्टिकोण का उपयोग वैश्विक स्तर पर बढ़ते वायु प्रदूषण को काबू करने के लिये किया जा सकता है। नासा ने अंदरूनी प्रदूषण से निबटने में इन अंदरूनी पौधों की भूमिका के बारे में अधिक जानने के लिये मिसीसिपी में स्थित अपने स्टेनिस स्पेस सेंटर में बायोहोम नामक एक पूरी सुविधा को ही समर्पित कर दिया।

नाया द्वारा किये गए इस शोध से प्रभावित होकर बैंगलोर स्थित एक बायोटेक स्टार्टअप ‘ईको वर्क्स’ ने एक ‘ईको वंडर जैल’ का निर्माण किया। उनका यह जैल लोगों को अंदरूनी पौधें के इस्तेमाल के प्रति जागरुक करता है जिसके चलते अंदरूनी वायु प्रदूषण को काबू करने के अलावा अंदरूनी इलाकों के वातावरण को भी साफ और शुद्ध बनाया जा सकता है। यह स्टार्टअप भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त शहर की एक प्रयोगशाला विट्ठल माल्या साइंटिफिक रिसर्च फाउंडेशन (वीएमएसआरएफ) के अंदर से अपने काम को अंजाम दे रही है।


पौधों के लिये चार सप्ताह तक पानी देने की चिंता से मुक्त होकर कहीं भी घूमने जाएं

यह जैल एक ऐसी प्रणाली पर आधारित है जिसमें एक क्राॅस लिंक पाॅलीमर में पोषक तत्वों पर्यावरण के अनुकूल और सौंदर्य की दृष्टि से तैयार किये गए रंगों के मिश्रण का प्रयोग किया जाता है। इसमें कार्बोहाईड्रेट और सूक्ष्म पोषकतत्व होते हैं जिन्हें एक नियंत्रित तरीके से पौधों को दिया जाता है। यह सामग्री पौधों की वृद्धि के अनुरूप होती हैं। सीमित पानी के साथ और धीमी रस प्रक्रिया वाले अंदरूनी सजावटी पौधे इस जैल के साथ बहुत बेहतरीन तरीके से फलते-फूलते हैं।

मूलतः ‘ईको वंडर जैल’ यह आश्वासन देता है कि अंदरूनी पौधों की देखभाल का काम पूरी तरह से ‘रखरखाव मुक्त’ हो जाए जिसके फलस्वरूप घर के भीतर हरियाली को बढ़ावा देने के काम को एक सामाजिक मान्यता मिलती है।

ईको वर्क्स के सीईओ समीर वाधवा कहते हैं,

‘‘वर्तमान में हमें घरों इत्यादि के अंदर बहुत कम पौधे देखने को मिलते हैं क्योंकि अंदरूनी पौधों की देखभाल करना एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम होता है। आज के व्यस्त जीवन में लोगों के पास दैनिक आधार पर पेड़-पौधों की देखभाल करने का समय नहीं है और इसी के चलते वे इनसे दूर ही रहना पसंद करते हैं। यह जैल अंदरूनी बागवानी के काम को रखरखाव से मुक्त करता है। आपको इनका प्रयोग करते हुए अपने पौधों को सिर्फ महीने में एक या दो ही बार पानी और अन्य पदार्थ देना पड़ता है। इसके अलावा यह जैल देखने में भी बहुत आकर्षक है जो रोशनी को सोखते हुए चमकता है। कुल मिलाकर यह एक बेहद सुंदर अवधारणा है।’’

समीर के अनुसार ईको वर्क्स बैंगलोर के हर कार्यालय की मेज और प्रत्येक घर में कम से एक पौधा लगा देखना चाहता है और धीरे-धीरे इस अवधारणा को देश में अन्य शहरों में विस्तारित करना इनका अगला लक्ष्य है। इसके फलस्वरूप हमें न केवल बढ़ते हुए वायु प्रदूषण से निबटने में मदद मिलेगी बल्कि हमारे घर और कार्यालय देखने में भी बेहद सुंदर लगेंगे। कार्यस्थलों को घरों को अंदरूनी वायु प्रदूषण से मुक्त करने के इस काम को करने के लिये आईआईएम अहमदाबाद के एमबीए समीर ने बहुत अच्छी काॅर्पोरेट नौकरी को नकार दिया और इस नेक काम में लगे रहे।

इस विचार के बारे में पूछने पर ईको वर्क्स के मार्गदर्शक डा. अनिल कुश कहते हैं,

‘‘यह जैल वायु शोधन और रचनात्मकता के मामले में एक अद्वितीय महत्व प्रदान करता है। यह पानी जैसी कीमती चीज के समुचित उपयोग को भी सुनिश्चित करता है। इसके अलावा पौधों के लिये आवश्यक पोषक तत्वों का सम्मिश्रण इसे शहरी परिवेश में अंदरूनी प्रयोग के लिये आदर्श रूप देता है। मिट्टी और खाद जैसे पारंपरिक तत्व बाहरी अनुप्रयोगों के लिये अधिक उपयुक्त हैं।’’

डा. कुश बीते 35 वर्षों से पौधों का अध्ययन कर रहे हैं और उन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, फ्रांस के पाॅश्चर संस्थान, अमरीका के रॉकफेलर विश्वविद्यालय और सिंगापुर के इंस्टीट्यूट आॅफ माॅलिक्यूलर एंड सेल बायोलॉजी जैसे विश्व के अग्रणी जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थानों के साथ काम करने का अनुभव है। वीएमएसआरएफ आधुनिक विज्ञान ओर तकनीक का प्रयोग करते हुए पर्यावरण, ऊर्जा और स्वास्थ्य की देखभाल के लिये गंभीरता से प्रतिबद्ध संस्थान है।


आपकी दुनिया में हरियाली लाने वाले उत्पादों की वृहद श्रृंखला

ईको वर्क्स बाजार में पहले से ही मौजूद जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों को भी तैयार करता है। इनका एक और उत्पाद ‘ईको वेज वाॅश’ आपको खाने के लिये प्रयोग करने से पहले फलों और सब्जियों पर लगे कीटनाशकों और रोगाणुओं को खत्म करने में मदद करता है। इनके उत्पाद को नामधारीज़, टोटल माॅल, फूउ वल्र्ड और बिग बास्केट जैसे विभिन्न स्टोर्स से खरीदा जा सकता है।

इसके अलावा इनकी अपनी एक विशेष प्राकृतिक बागवानी उत्पादों की एक विस्तृत श्रृखला भी बाजार में उपलब्ध है जिसकी मदद से आप अपने घर पर ही जैविक खाद्य उत्पाद उगा सकते हैं। इसके अलावा ईको वल्र्ड का पपीते से तैयार एक अनोखा दंत चिकित्सा उत्पाद है जिसकी मदद से आप ड्रिलिंग का सहारा लिये बिना क्षय से मुक्ति पा सकते हैं।

इस प्रकार के नए-नए उत्पादों की खोज के साथ शहरी इलाकों में हरियाली के घटते हुए स्तर पर काबू पाने में कुछ हद तक सफलता मिलने की उममीद जागी है।

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