पुरुषों के वर्चस्व के सामने 'UTV' की दीवार खड़ी करने वाली, ज़रीना स्क्रूवाला

पर्ल पद्मसी द्वारा निर्देशित नाटक में प्रोडक्शन मैनेजर के रूप में रखा व्यवसायिक दुनिया में कदममशहूर महल नामक टीवी धारावाहिक के माध्यम से टेलीविजन की दुनिया में रखा पहला कदमयूटीवी से अलग होने के बाद वर्ष 2011 में स्वदेस फाउंडेशन नामक संगठन किया शुरूप्रत्येक 5 वर्षों में एक मिलियन लोगों को गरीबी के जाल से बाहर निकालने का है लक्ष्य

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एक ऐसे समय में जब व्यवसाय का क्षेत्र पूरी तरह से पुरुष प्रधान था और शायद ही कोई भारतीय महिला व्यवसायी बनने का सपना देखती हो, तब 1990 के वर्ष में ज़रीना स्क्रूवाला ने उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखा और यूटीवी की शुरुआत की। उन्होंने राॅनी स्क्रूवाला के साथ मिलकर यूटीवी की स्थापना की और स्थाना के दो दशक बाद वाॅल्ट डिज्नी ने 450 मिलियन अमरीकी डाॅलर में इसका अधिग्रहण किया और यह सौदा उनके द्वारा खड़े किये गए स्थाई और सार्थक व्यवसाय की गवाही देने के लिये पर्याप्त था।

ज़रीना स्क्रूवाला
ज़रीना स्क्रूवाला

ज़रीना स्क्रूवाला अपनी सफलता के राज योरस्टोरी के साथ साझा कर रही हैंः


अपने प्रारंभिक मार्गदर्शकों से आदर्श सीखे

मैंने मुंबई के जेबी पेटिट स्कूल फाॅर गल्र्स से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और वहां की प्रधानाचार्या बहुत प्रगतिशील विचारों वाली महिला थीं। वह मानती थीं कि महिलाओं के लिये कुछ भी नामुमकिन नहीं हैं और वे बाहर निकलकर हर काम को कर सकती हैं। और उनकी यह सोच तब थी जब वे उम्र के 6 दशक पार कर चुकी थीं। आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे उन्होंने लड़कियों की एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया होगा। इसके अलावा उन्होंने मुझे यह भी समझाया कि सिर्फ रटना ही काफी नहीं है और यही वजह है कि मैं हमेशा से ही जिज्ञासु होने के अलावा किसी भी विषय की गहराई से जानकारी पाने में विश्वास करती हूँ। उनके अलावा मेरे दूसरे गुरू पर्ल पद्मसी हैं। मैंने थियेटर की दुनिया के जाने-माने नाम पर्ल द्वारा निर्देशित एक नाटक में प्रोडक्शन मैनेजर के रूप में काम करके अपने करियर की शुरुआत की थी। पर्ल ने मुझे एक बेहद शर्मीले व्यक्तित्व वाली लड़की से एक अत्यंत विश्वस्त लड़की के रूप में तब्दील कर दिया।

मेरे जीवन के अधिकतर आदर्श जिनपर मैं आज भी खरी उतरती हूँ मुझेे अपने प्रारंभिक मार्गदर्शकों से ही मिले हैं।


जब व्यापार की दुनिया के कीड़े ने मुझे काटा

मेरे एक मित्र ने मुझे फोन करके पूछा कि क्या मैं मशहूर महल के लिये सहायक निर्देशक की चुनौती उठाने के लिये तैयार हूँ और सब तभी से मुझे व्यवसाय की दुनिया में आने की धुन लग गई। यह भारत का पहला ऐसा टीवी धारावाहिक था जो दूरदर्शन द्वारा निर्मित नहीं किया गया था।यह तो बस एक शुरुआत थी औीर जल्द ही मुझे मीडिया और टेलीविजन से प्रेम हो गया। मुझे अब भी काम का अपना पहला दिन याद है। मैं सुबह ठीक 7 बजे प्रोडक्शन हाउस पहुंच गई और अगले दिन सुबह 7 बजे वहां से वापस लौटी। उस समय मैं वास्तव में बहुत उत्साहित थी।


मेरा सफर इतना आसान नहीं था

एक उद्यमी के तौर पर आपको कभी हार न मानने के जज्बे के साथ काम करना चाहिये और यह व्यापार की पहली सीख होती है। विशेष रूप से प्रारंभिक दौर में क्योंकि वास्तव में वही सबसे कठिन दौर होता है। एक बेहद आकर्षक सफलता की कहानी को मुड़कर देखना हमेशा बहुत ही अच्छा लगता है और आप सोच में पड़ जाते हैं कि क्या आप पहले ही दिन से सफलता की सीढि़यां चढ़ गए थे। लेकिन सफलता का मेरा सफर बहुत मुश्किल था जिसमें बहुत कड़ी मेहनत तो थी लेकिन साथ ही साथ ढेर सारी मौज-मस्ती भी थी। अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकती हूँ कि मेरी सबसे बड़ी सीख कभी हार न मानने का जज्बा रहा है। लोग हमेशा दूसरों की सफलता के बारे में बात करना तो पसंद करते हैं लेकिन हरा सफलता के पीछे असफलता के कई दौर होते हैं जो दुनिया की नजरों से छिपे रहते हैं। आपको स्वयं में विश्वास रखते हुए लगातार आगे बढ़ते रहना होता है क्योंकि शुरुआती दौर में विफलताएं सफलता के मुकाबले अधिक प्राकृतिक रूप से आती हैं। इसलिये असफलता से विचलित न होते हुए लगातार आगे बढ़ते रहें। भारत जैसे देश में विफलताओं को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ने का जज्बा बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण है। यहा ंपर सब आपकी सफलता के बारे में जानते हैं तो सबको आपकी विफलताओं के बारे में भी सबकुछ पता होता है।


हमारा ध्यान ग्रामीण सशक्तीकरण पर है

वर्ष 2011 में यूटीवी से अलग होने के बाद मैं इस सोच में थी कि अब मुझे आगे क्या करना है। मैं नई चुनौतियों का सामना करने के लिये बिल्कुल तैयार थी। उसी समय स्वदेस फाउंडेशन का विचार मेरे मन में आया। स्वदेश का एकमात्र लक्ष्य हर पांच वर्षों में 1 मिलियल लोगों को गरीबी से बाहर लाना है। ऐसा नहीं है कि मैंने यूटीवी से अलविदा कहने से पहले अन्य मुद्दों पर विचार नहीं किया था। लेकिन उस प्रस्थान ने मुझे इतनी बड़ी चुनौती का सामना करने के लिये ताकत और सहनशक्ति दी।

हमने अपना सारा ध्यान भारत के ग्रामीण इलाकों के विकास पर केंद्रित किया क्योंकि अबतक इन इलाकों में विकास का पैमाना बेहद अतार्किक रहा है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले अधिकतर लोग बुनियादी सुविधाओं और अवसरों की कमी के जूझ रहे हैं और इसके अलावा उनके पास बेहतर शिक्षा के विकल्प भी नगण्य है। दूसरों की तरह वे भी शिक्षा ओर अवसरों के इंतजार में बैठे हैं। हमने इस बारे में बहुत विचार-विमर्श किया और हम इस नतीजे पर पहुंचे कि इस समस्या से निजात पाने के लिये हमें 360 डिग्री वाले एक दृष्टिकोण की जरूरत है। हमने विकास के ऐसे माॅडल विकसित किये जो स्थाई हैं और बड़े पैमाने पर दोहराए जा सकने लायक हैं। हम लोग सामुदायिक लामबंदी, आजीविका, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इसीलिये हमारी 108 सदस्यीय टीम में से 80 सदस्य हरसमय मैदान में होते हैं। हम लोग ग्रामीण सशक्तीकरण के लिये पूरी तरह समर्पित हैं। हमारा काम लोगों को सशक्त बनाते हुए उन्हें खुद के लिये एक अवसर खोजने लायक बनाने में मदद करना है।


अपने लिये लक्ष्य निधार्रित करें, और उसे पाने के लिये जुट जाएं

मेरी तमाम महिला उद्यमियों को सलाह है कि अपने लिये एक लक्ष्य निधार्रित करें और उसे पाने के लिये अपना सबकुछ लगा दें। आपके चारों तरफ आशंकाओं के बादल फैले रहेंगे लेकिन उन्हें खुदपर हावी न होने दें। अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें। हो सकता है कि आप प्रारंभ में असफल हों, इसलिये इसके लिये तैयार रहें। अगर आप हर बार असफल होने के बाद अपना लक्ष्य बदलती हैं तो आप कुछ भी कर पाने में सफल नहीं होंगी।

कई बार ऐसा होता है कि कुछ चीजों को करते समय या तो आप समय से आगे होते हैं या कई बार आप समय से पीछे रह जाते हैं। समय की गणना करना ही सफलता की कुंजी होने के साथ-साथ बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आपकी टाइमिंग ठीक नहीं है तो आपको अपने व्यापार के बारे में पुर्नविचार करने की आवश्यकता है। अगर आपके आसपास के लोग आपके लिये परेशानी हैं तो आप उनसे पार पा सकती हैं। इसके अलावा अगर पैसों को लेकर भी कोई चिंता है तो आप उसका भी हल तलाश कर सकती हैं। लेकिन आपको अपने व्यवसाय के बारे में बेहद ध्यान से सोचना होगा।


मुझे चुनौतियां बेहद पसंद हैं

मैं कभी भी महत्वाकांक्षी नहीं रही लेकिन मुझे चुनौतियों से हमेशा ही प्रेम रहा। मुझे चुनोतियों से पार पाना बेहद पसंद है लेकिन मैं खुद को कभी भी महत्वाकांक्षी नहीं समझती हूँ। यह दोनों बिल्कुल अलग तरीके की बाते हैं। अगर कोई महत्वाकांक्षी है तो इसका मतलब है कि वह सफलता का भूखा है और मैं कभी सफलता के पीछे नहीं भागी। मेरी दिलचस्पी हमेश से ही मुश्किल से मुश्किल काम को करने में रही है। हमने यूटीवी के माध्यम से भी भारत में एक अत्याधुनिक और नए तरीके के मीडिया व्यवसाय का निर्माण करने में सफलता पाई। वर्ष 2004 मं हमने पूर्णतः बच्चों को समर्पित क टीवी चैनल ‘हंगामा’ की शुरुआत की और दो वर्ष से भी कम समय में हम बच्चों के लिये अव्वल चैनल बनने में सफल रहे। इसके अलावा यूटीवी बिंदास की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। हंगामा के बाद हमने विदेशों में भी इसी तरह के अन्य चैनल शुरू करने में मदद की।

मैं जीवन के किसी भी सफर की चुनौती का भरपूर आनंद लेने में विश्वास रखती हूँ और अगर सफर का परिणाम सफलता हो तो उससे बेहतर और कुछ नहीं है।

यहां तक कि अगर आप स्वदेस फाउंडेशन के साथ किये जा रहे हमारे काम पर ध्यान दें तो यहां भी हमारा लक्ष्य पांच वर्षों में एक मिलियन लोगों को गरीबी के चंगुल के बाहर निकालना है। यह एक बड़ी चुनौती है जिसका हमें सामना करना है और वास्तव में यही चुनौती मुझे आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करती है।


जिंदगी के झटकों से गुजर चुके लोगों की तलाश

मेरे हिसाब से अच्छे पेशेवर व्यक्ति ही आगे चलकर अच्छे व्यवसायी बनने में सफल होते हैं। मेरे लिये ऊर्जा, जुनून और टिके रहने का जज्बा सबसे अधिक महत्व रखता है। जब भी में किसी को काम पर रखती हूँ तो ऐसे व्यक्ति को तलाशती हूँ जो जिंदगी के झटके खा चुके हों। इसके अलावा सकारात्मक रवैया भी बहुत जरूरी है। कई लोगों के बाद बहुत अच्छा व्यवसायिक कौशल ओर अनुभव होता है और वे अपने काम में बहुत अच्छे होते हैं लेकिन आखिर में सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति ही जीतते हैं। कृपया सकारात्मकता की तुलना सरलता से न करें।

अच्छी टीमों का निर्माण करना मेरे जीवन का उद्देश्य है। आप ऐसे लोगों की तलाया में रहते हैं जिनमें आपकी जरूरत के सभी गुण मौजूद हों और जो सफलता के लिये आवश्यक सभी कौशलों से परिपूर्ण हों। एक अच्छी टीम के निर्माण के लिये संचार का होना बेहद जरूरी है और यह भी आवश्यक है कि निरंतर संवाद सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा लोगों के साथ सम्मानपूर्ण और गरिमा के साथ व्यवहार किया जाना भी बेहद आवश्यक है। और ऐसे ही एक अच्छी टीम का निर्माण होता है।


स्वयं के अलावा अपने परिवार और मित्रों के लिये समय निकालें

अपाने लिये समय निकालें। अपने परिवार और परिचितों के लिये समय निकालें और यह सुनिश्चित करें कि वह समय उनके साथ ही बीते। यह बेहद जरूरी है कि आप अपने व्यक्तिगत समय को अपने ऊपर ही खर्च करें। चाहें तो उस समय में चाय का आनंद लें, या अपनी पसंद की कोई किताब पढ़ें या फिर कुद भी ऐसा करें जो आपको ऊर्जा और स्फूर्ति से भर दे।ये बहुत महत्वपूर्ण बातें हैं ओर इन्हें अपने से दूर न होने दें। आप चाहे जितनी मेहनत करें लेकिन इन बातों पर अमल करें और जीवन में सफल हों।

Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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