इंडियन नेवी की नई उपलब्धि, तीसरी स्कॉर्पीन पनडुब्बी 'करंज' हुई लॉन्च

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मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित तीसरी स्कॉर्पीन पनडुब्बी को नेवी वाईव्ज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष श्रीमती रीना लांबा ने लांच किया। इसके पहले अथर्व वेद की ऋचाओं का पाठ किया गया और पारंपरिक अनुष्ठान के उपरांत पनडुब्बी को लांच किया गया।

INS करंज
INS करंज
पिछले वर्ष 14 दिसंबर, 2017 को पहली स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस कलवारी को भारतीय नौसेना में शमिल किया गया था। उसे माननीय प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को समर्पित किया था। दूसरी स्कॉर्पीन पनडुब्बी जनवरी, 2017 में लांच की गई थी।

भारत की नौसैनिक क्षमता में लगातार वृद्धि हो रही है। इस क्रम में बुधवार को स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस करंज लॉन्‍च को लॉन्च किया गया। इंडियन नेवी में बुधवार को मुंबई के मझगांव डॉक पर आईएनएस करंज को नौसेना में शामिल किया गया। इस मौके पर नेवी चीफ सुनील लांबा भी मौजूद रहे। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित तीसरी स्कॉर्पीन पनडुब्बी को नेवी वाईव्ज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष श्रीमती रीना लांबा ने लांच किया। इसके पहले अथर्व वेद की ऋचाओं का पाठ किया गया और पारंपरिक अनुष्ठान के उपरांत पनडुब्बी को लांच किया गया। उन्होंने पनडुब्बी का नामकरण किया और उसका नाम करंज रखा।

स्कॉर्पीन श्रृंखला की 6 पनडुब्बियों के निर्माण का ठेका फ्रांस की मेसर्स नेवल ग्रुप को दिया गया है। इस पनडुब्‍बी का निर्माण मझगांव डॉकयार्ड ने फ्रांस के सहयोग से किया हैं। आधुनिक तकनीक से बनी ये पनडुब्बी कम आवाज से दुश्मन के जहाज को चकमा देने में माहिर है। इस अवसर पर एडमिरल सुनील लांबा ने कहा कि ‘करंज’से हमारी सैन्य शक्ति में बढ़ोतरी होगी और हम आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ेंगे।

पिछले वर्ष 14 दिसंबर, 2017 को पहली स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस कलवारी को भारतीय नौसेना में शमिल किया गया था। उसे माननीय प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को समर्पित किया था। दूसरी स्कॉर्पीन पनडुब्बी जनवरी, 2017 में लांच की गई थी। इससे पहले नेवी कलवरी और खांदेरी सबमरीन लॉन्च कर चुकी है। यह पनडुब्बी टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइलों से भी हमले कर सकती है। इसे सतह पर और पानी के अंदर से दुश्‍मन पर हमला कर सकती है। करंज को किसी भी तरह की जंग में ऑपरेट किया जा सकता है।

करंज की लंबाई 67.5 मीटर, ऊंचाई 12.3 मीटर और वजन 1565 टन है. इसे कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह किसी भी तरह की जंग में सेना के लिए मददगार साबित होगीयह वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और इंटेलिजेंस जुटाने जैसे कामों को भी बखूबी अंजाम दे सकती है। इसकी खास बात यह है कि यह दुश्मनों के रडार की जद में नहीं आ पाएगी। यानी कि यह चकमा देने में सक्षम है। इसके भीतर ऑक्सिजन बनाने का प्लांट भी लगा हुआ है, जिसकी बदौलत इसमें विशेष परिस्थितियों में भी अधिक दिनों तक जीवित रहा जा सकता है।

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