समाज के लिए कुछ करना है तो निवेशक तैयार हैं, अपना आइडिया इनसे शेयर करें

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समय काफी बदला है। पर ज़रूरत है सही जगह अपनी सोच अपना आइडिया शेयर करने की। अब वो वक्त नहीं है कि आप समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं और पैसे की कमी की वजह से कर नहीं पा रहे हैं। आपके पास शुरुआती पैसे नहीं भी हैं तो भी आप काम कर सकते हैं। समाज को बेहतर दिशा दे सकते हैं, ज़रूरतमंदों के चेहरे पर खुशी लाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्हें सुकून का पल दे सकते हैं। इसके लिए करना क्या है, यह जानना ज़रूरी है। ऐसे में सबसे अहम सवाल ये है कि आप ऐसे लोगों को कैसे ढूंढे जो आपके सामाजिक कार्य को एक दिशा देने के लिए पैसे लगाने को तैयार हैं? चलिए हम आपकी इस मुश्किल को आसान कर देते हैं। हम ऐसे तमाम निवेशकों के बारे में जानकारी देने की कोशिश करते हैं जो आपके लिए मददगार हो सकते हैं। TiECon 2015 में ‘सोशल आंत्रप्रेन्योरशिप एंड इम्पैक्ट इन्वेस्टिंग’ के तहत इम्पैक्ट इन्वेस्टर काउंसिल के सीईओ अमित भाटिया, कैसपियन के मैनेजिंग डायरेक्टर एस विश्वनाथ प्रसाद, अंकुर कैपिटल की को-फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर रितु वर्मा और अवंति लर्निंग सेंटर्स के प्रेसिडेंट अक्षय सक्सेना मौजूद थे।

तस्वीर साभार-shutterstock.com
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निवेश के लिए प्राथमिकताएं

अंकुर कैपिटल की को-फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर रितु वर्मा के अपनी कंपनी की योजनाओं और निवेश के बारे में बताया-

“अंकुर कैपिटल का फोकस उन शुरुआती लोगों और पहले से काम कर रही संस्थाओं से जुड़ने और निवेश में है जो ग्रामीण भारत के विकास के लिए कार्यरत हैं। या फिर ऐसे लोगों के साथ जिनके पास इससे जुड़े आइडियाज़ हैं। अंकुर कैपिटल देश के विकास के लिए काम कर रही संस्थाओं में निवेश के लिए तैयार तो है ही साथ में पार्टनर के तौर पर भी जुड़ने को तैयार है। अंकुर कैपिटल का खास ज़ोर है खेती, ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए निवेश करना।

कैसपियन के मैनेजिंग डायरेक्टर एस विश्वनाथ प्रसाद ने बताया कि “ हमारी कंपनी अबतक खास तौर से बड़ी कंपनियों में निवेश करती रही है लेकिन कंपनी ने कुछ साल पहले देश के विकास में निवेश करने की योजना बनाई। कैसपियन का खास ज़ोर है फूड सेक्टर और एग्रीकल्चर से जुड़े आइडियाज़ पर निवेश करने का”

अवंति लर्निंग सेंटर्स के सह संस्थापक और प्रेसिडेंट अक्षय सक्सेना ने बताया- “अवंति लर्निंग सेंटर्स 9-12वीं क्लास तक के बच्चों की पढ़ाई को लेकर लगातार काम करता रहा है। बच्चों में गणित और साइंस को लेकर कैसे रूचि पैदा की जाए, क्या-क्या नए तकनीक इस्तेमाल किए जाएं, इसपर सारा जोर है। अवंति लर्निंग सेंटर्स इसी दिशा में आगे देख रही है।”

आंत्रप्रेन्योर और स्टार्टअप की भागीदारी ज़रूरी

कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने माना कि सोशल सेक्टर में स्टार्टअप और आंत्रप्रेन्योर को आगे आना चाहिए। इसलिए क्योंकि समाज की बेहतरी के लिए सबको सोचना ज़रूरी है। ऐसे में अगर वो आगे आते हैं तो नई तकनीक के साथ समाज के वो हिस्से भी जुड़ जाएंगे जो लगातार उपेक्षित रहे हैं। सोशल सेक्टर में निवेश करने वालों का मानना है कि चूंकि निवेशक इस सेक्टर में भी हैं इसलिए सरकार के अलावा हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि सोसायटी के लिए कुछ बेहतर किया जाए। कैसपियन के मैनेजिंग डायरेक्टर एस विश्वनाथ प्रसाद का कहना है कि “समाज की बेहतरी को ही ध्यान में रखते हुए ही उनकी कंपनी ने निवेश का फैसला किया है।” अंकुर कैपिटल की को-फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर रितु वर्मा का मानना है कि इस सेक्टर में चुनौतियां तो हैं पर उन चुनौतियों को दूर किया जा सकता है। इसलिए निवेशक के सामने अगर तस्वीर बिलकुल साफ हो, उन्हें सोशल सेक्टर में विकास और फायदा दोनों दिख रहा है तो फिर वो निवेश क्यों न करें। ऐसे में स्टार्टअप और आंत्रप्रेन्योर को आगे आना ज़रूरी है।