क्या हमें सचमुच में तुम्हारी परवाह है, मेरे प्यारे पिल्लों?

प्राणियों के प्रति असंवेदनशील होते समाज को झिंझोड़ता हुआ एक लेख

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भद्रा पांच महीने का एक छोटा सा पिल्ला है, वो मेरे शेरू जैसा दिखता है। मुझे याद है जब मैं एसपीसीए अस्पताल में शेरू से पहली बार मिला था, तब वो बीमार था। वो एक छोटे से कमरे में दूसरे कई कुत्तों के साथ बैठा था और जब उसने मुझे देखा तो वो मेरी ओर दौड़ता हुआ आया। मैंने उसके सिर पर हाथ फेरा। मैं उसकी आंखों के ज़रिए उसका अनुरोध महसूस कर रहा था। जैसे वो कह रहा हो कि मैं उसको यहाँ से अपने साथ वहाँ ले जाऊँ, जिस अपार्टमेंट में वो जन्म से रह रहा था। मैंने डॉक्टर से उसके स्वास्थ्य के बारे में बात की, जिसके बाद मैं वापस लौट आया।  उसकी आंखें ठीक वैसे ही मुझे ढूंढ रही थीं जैसे भद्रा की आँखें। उसे एक गंभीर किस्म का ट्यूमर हो गया था।

शेरू का रंग भी उससे मिलता जुलता था। वो भद्रा से लंबा था। मैं नहीं जानता कि वो कितने साल का था, लेकिन वो मेरे अपार्टमेंट कॉम्पलेक्स का हिस्सा था। मैं जब पहली बार उससे मिला था तो वो काफी स्वस्थ्य था और जब भी मैं अपने दोनों पालतू पिल्लों को लेकर घूमने जाता था, तो वो भी साथ हो लेता था। वो आत्मनिर्भर था और उसकी पूँछ हमेशा हिलती रहती थी। मेरे छोटे पिल्ले कई बार उसे तंग करते थे, लेकिन उसने कभी भी पलट कर हमला नहीं किया। वो हमेशा कुछ दूरी बनाकर चलता था और किसी दूसरे कुत्ते को हमारे पास फटकने तक नहीं देता था। वो उन कुत्तों को दूर भगा देता था जो मेरे पिल्लों से दोस्ती करना चाहते थे। मैं कभी इस बात को सोचता हूं तो पाता हूं कि वो मेरे पिल्लों के लिए किसी अभिभावक से कम नहीं था। जो उनकी रक्षा करता था ताकि कोई दूसरा कुत्ता उनको नुकसान ना पहुंचा सके। उसने कभी किसी को नहीं काटा था, लेकिन अपार्टमेंट में रहने वाले कुछ लोग चाहते थे कि उसे वहाँ से बाहर किया जाय।

एक दिन मैं उसके सिर पर थपकी दे रहा था, तो मुझे महसूस हुआ कि उसके बाल काफी कड़क हो गये हैं। मैंने उस चीज को नज़रअंदाज कर दिया। कुछ दिनों बाद मुझे महसूस हुआ कि उसके बाल झड़ने लगे हैं। जिसके बाद मैंने अपने पशु चिकित्सक से सलाह ली तो उन्होने बताया कि उसे संक्रमण हुआ है और उसे दवा की जरूरत है। मैं उसके लिए दवा ले आया और उसके दूध और खाने में उस दवा को मिला दिया। जिसे उसने आराम से खा लिया। कुछ दिन बाद मुझे उसमें परिवर्तन दिखाई दिया। उसके शरीर में नये बाल आ गये थे और वो पहले के मुकाबले स्वस्थ्य दिख रहा था। एक दिन सुबह मैंने देखा कि उसके गले में घाव है। जिसमें काफी मवाद भरा हुआ था मैं जानता था कि वो काफी दर्द महसूस कर रहा था, लेकिन मैंने उसे रोते हुए नहीं देखा। दोबारा मैंने डॉक्टर से बात की और उसके घाव की फोटो खींचकर उनको दिखाई। जिसके बाद उन्होने मुझे मरहम दिया, जिसे मैंने उसके घाव पर लगा दिया। दर्द होने के बावजूद उसने मुझे अपने आपको छूने दिया। डॉक्टर ने मेरे से कहा कि क्या वो उसे एसपीसीए, कुत्तों के अस्पताल भेज सकते हैं। तो मैंने भी देर नहीं की और उसके लिए एक एंबुलेंस का इंतजाम किया वो उसे अस्पताल ले गये। हालांकि वो डरा हुआ था और अस्पताल नहीं जाना चाहता था।

भद्रा इस मामले में किस्मत वाली थी कि दो मंजिला इमारत से गिराने के बावजूद उसे ज्यादा गंभीर चोट नहीं आई हैं। उसकी एक हड्डी टूटी है साथ ही उसकी पीठ पर चोट आई है। बावजूद इसके उम्मीद है कि वो अगले तीन हफ्तों में ठीक हो जाएगी, लेकिन कोई ये नहीं जानता कि जब उसे फेंका गया तब वो कैसी थी, कैसे वो उन चोटों से उबरी? जिस तरीके से उसके साथ क्रूरता दिखाई गई उसके बाद दस दिनों तक, जब तक वो नहीं मिली उसकी क्या हालत रही होगी। इस दौरान उसे ज़रूर काफी दर्द रहा होगा, हो सकता है कि इस दौरान दर्द के कारण चलना तो दूर वो भोजन और पानी भी नहीं ले पाई हो। क्या कोई सोच सकता है कि कैसे उसने वो पल गुज़ारे होंगे? हम इंसानों को इस बात का एहसास नहीं है जब हम ज़रा सी तकलीफ़ पर डॉक्टर या अस्पताल इलाज कराने के लिये पहुंच जाते हैं और तब घर का कोई दूसरा सदस्य हमारे खाने और आराम का ध्यान रखता है, लेकिन उसके बारे में क्या?

एक और कुत्ता था, जिसे मैं हर रोज़ खाना देता था। अचानक उसने मेरे घर आना छोड़ दिया। मैंने कई दिनों तक उसे ढूंढने की कोशिश की, लेकिन उसका कहीं कोई पता नहीं चला। एक दिन मैं अपनी कार के पास था तो मुझे एक कुत्ते के रोने की आवाज़ सुनाई दी। वो काफी जोश से मेरी कार के आसपास दौड़ रहा था। मैं कार से बाहर निकला तो पता चला की ये वही कुत्ता था, जिसे मैं ढूंढ रहा था। मैंने उसे देखा और सीटी बजाई। वो दर्द से कराह रहा था। मैंने उसके आसपास देखा तो उसकी पूंछ से खून की बूंदे निकल रही थीं। उसकी पूंछ में कट लगा हुआ था। तब मैंने अपने आप से प्रश्न किया कि इतने महीनों बाद ये मेरे पास क्यों आया? क्या ये मेरे से चिकित्सा सहायता मांगना चाहता है? या फिर वो किसी संकट में है और मेरे पास आकर उसे आराम मिलेगा? वो बोल नहीं सकता था और मैं सिर्फ अनुमान लगा सकता था।

इसी तरह की एक ओर घटना है। एक रात जब मैं ऑफिस से लौट रहा था तो देखा कि मेरे घर के दरवाज़े पर एक कुतिया अपने पिल्ले के साथ बैठी है। इससे पहले मैंने कभी भी उस कुतिया या उसके पिल्ले को नहीं देखा था। हालांकि मैं अक्सर कई कुत्तों को खाना खिलाता था, लेकिन ये उनमें से नहीं थी। मैं उसके पास गया, मैं देख सकता था कि उसका पिल्ला निस्तब्ध था। जब मैंने उसे छुआ तो लगा कि उसकी सांसें चल रही हैं। वो काफी बीमार था। मैंने उसे दूध पिलाने की कोशिश की। बड़ी मुश्किल से वो पिल्ला एक या दो घूंट ही दूध पी सका। इस दौरान उसकी मां एक बार भी मुझ पर नहीं भोंकी। तब मैंने डॉक्टर से बात की तो रात ज्यादा होने की वजह से उन्होने मुझे अगले दिन आने को कहा।
अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो मैं उस पिल्ले के पास गया। मैंने देखा कि वो सांस नहीं ले रहा है। उसकी मां उसी के पास बैठी है। मेरे लिए अचंभे की बात ये थी कि क्यों उसकी मां अपने पिल्ले को मेरे घर के दरवाज़े तक लाई थी? उसे किसने मेरा पता दिया था? क्यों नहीं वो दूसरी जगह पर गई ? क्यों उसे ऐसा लगा कि मेरे पास आने पर उसे कुछ मदद मिल सकती है? एक बार फिर वो मुझ से कुछ नहीं बोल सकती थी और मैं उसकी भाषा समझ नहीं सकता था। मैं जानता हूं कि मैं अपने पिल्लों मोगू और छोटू से अपनी बात कह सकता हूं। मैं जानता हूं कि वो कब भूखे रहते हैं और कब खुश रहते हैं। मोगू हर रात मुझे बाहर चलने को कहता है ताकि वो शौच कर सके। अगर उसका पेट खराब होता है या फिर मैं कभी ज्यादा वक्त के लिए बाहर जाता हूं, तो मैं उससे कहता हूं कि चिंता मत करना मैं जल्द लौटूंगा जिसके बाद वो किसी को परेशान भी नहीं करता और शांत रहता है, लेकिन आवारा कुत्तों के साथ ऐसा करना काफी कठिन है।

इसी तरह एक दिन मेरे अपार्टमेंट में मैंने देखा की एक महिला डरी हुई थी और वो मेरे से कह रही थी कि मेरे पिल्ले आसपास घुमते हैं और वो उसे काट सकते हैं। इस बात पर मुझे हंसी आई। आमतौर पर माना जाता है कि कुत्ते काटते हैं हालांकि जब मैं तीसरी क्लास में था तो मुझे एक कुतिया ने काट लिया था। बावजूद इसके मेरा उनके प्रति झुकाव कभी कम नहीं हुआ, बल्कि साल दर साल ये बढ़ता ही गया। आज मैं इनके बिना जिंदा नहीं रह सकता।

मैं हर जगह आवारा कुत्तों के साथ खेलता हूं। जब भी मैं उनको बुलाता हूं तो वो पूंछ हिलाते हैं। लुधियाना के पास एक पेट्रोल पंप में मैं एक बार एक कुत्ते से मिला। मैंने उसको खाने के लिए बिस्कुट दिये। रानी जिसने मुझे कई साल पहले काटा था वो ग़लती से हुआ हादसा था। क्योंकि उस वक्त वो भूखी थी और मेरे पास कुछ ब्रेड थी, जो वो मुझसे लेना चाहती थी। इस प्रक्रिया में उसने मुझे काट दिया था। अगर कुत्ते इंसान को काटते हैं या फिर नुकसान पहुंचाते हैं तो शेरू ने कभी मुझ पर या मेरे पिल्लों पर झप्पटा क्यों नहीं मारा? या फिर जिनको मैं खाना खिलाता था उन्होंने कभी कोई ऐसी हरकत क्यों नहीं की? बल्कि ये सब मेरी मौजूदगी में भी बहुत आराम से रहते थे। हालांकि कई बार वो मुझ पर कूदते थे या भोंकते थे इसलिये नहीं कि वो मुझे नुकसान पहुंचाना चाहते हों, बल्कि वो अपना स्नेह दिखाते थे।

अंतिम दिनों में शेरू वो जगह नहीं छोड़ना चाहता था, जहाँ पर वो जिंदगी भर रहा। मैं उसकी मदद करना चाहता था, लेकिन कौन जानता था कि मेरा उसे अस्पताल ले जाना उसके जीने की उम्मीद छोड़ने की तरह था या ऐसा कर उसकी जिंदगी छोटी हो गई थी? अस्पताल ले जाने के बाद वो करीब दो हफ्तों तक जिंदा रहा और एक शाम वो चल बसा और दोबारा खड़ा नहीं हो पाया। जब डॉक्टर ने मुझे ये खबर दी तो मुझे इस बात का काफी अफसोस हुआ। मुझे इस बात का दुख है कि एक पिल्ला मेरे घर के दरवाज़े पर मर गया। मैं उस पिल्ले की मां से माफी मांगना चाहता हूँ, जो उसे मदद की उम्मीद से मेरे घर लाई और देर रात होने के कारण मैं उसे अस्पताल नहीं ले जा सका। मुझे उन सभी के लिये दुख है, जिनको मैं खाना खिलाता था, लेकिन रहने के लिए सुरक्षित जगह नहीं दे सका। क्योंकि इनको भी सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। हमारा विकसित समाज क्या उनका दुख दर्द समझने के लिए तैयार है? विश्वास कीजिए ये सबसे प्यारे जीव है। जो बिना शर्त प्यार देते हैं और बदले में हम इंसान की तरह ये कुछ नहीं मांगते।

मैं अब तक ऐसे किसी आदमी से नहीं मिला जिसने काटने के लिए कुत्ते को जिम्मेदार ना ठहराया हो। मैं इस बात से इंकार नहीं करता कि कुत्ते काटते नहीं है, लेकिन वो तभी काटते हैं जब उनको उकसाया जाये,मारा जाये या धमकाया जाये। इसके अलावा वो तब काटते हैं जब वो भूखे या प्यासे हों और वो खाने और पानी की तलाश में हो।

गांव में आज भी रीति रिवाज और धर्म में विश्वास रखने वाले लोग कुत्तों को खाना और पानी देते हैं। वहाँ पर इंसान और जानवरों के बीच गहरा जैविक संबंध है। लेकिन शहरों में हमने उनको अनाथ बना दिया है और कोई ऐसी जगह नहीं छोड़ी है, जहाँ पर ये कुत्ते सुरक्षित रह सकें। वे एक प्रतिकूल वातावरण में रहते हैं, इनमें से ज्यादातर सड़क पर रहते हैं जहाँ पर ये कभी भी वाहनों से कुचले जा सकते हैं। हम इंसान इन पर हमला करते हैं इनके प्रति क्रूरता दिखाते हैं। फिर भी दोष इनको ही देते हैं?

लेखक : आशुतोष, वरिष्ठ पत्रकार और आम आदमी पार्टी के नेता

अनुवाद – गीता बिष्ट

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