आपके बच्चे की हर ज़रूरत का ख्याल रखे, 'Kidsstopress'

एक ऐसी वेबसाइट जो माता-पिता को सही फैसला लेने में मददगार होKidsstopress ने एक दिन में 100 विजिटर से शुरुआत कीअब एक दिन में 60 हजार से ज्यादा विजिटर्स आते हैंएक महीने में एक लाख बीस हजार से ज्यादा पेज देखे जाते हैं , जिनमें से 35 फीसदी रिपीट विजिटर्स हैं

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मानसी झावेरी जब पहली बार मां बनने वाली थीं तो वह बहुत ही खुश थीं, उत्तेजित थीं लेकिन साथ में चिंतित भी थी। बहुत सारे सवाल उनके दिमाग में गूंज रहे थे। मसलन- क्या बेबी के बीमार पड़ने पर मैं जान पाउंगी कि वो बीमार है? अगर मैं बेबी को ओवरफीड या अंडरफीड कर दूं तब क्या होगा? क्या मैं घर और ऑफिस को एक साथ संभाल पाउंगी?

यहां तक कि बेटी के जन्म के बाद भी वो हमेशा इस उधेड़बुन में रहती थीं कि वो बेबी के लिए जो कुछ भी कर रही हैं वो ठीक है या नहीं। दो बच्चियों, एक कूल जॉब, कई घंटों का काम, पार्क में फुरसत के पल, प्रेरणा देने वाली मॉम्स से मुलाकात और नींदरहित रातों के सिलसिले के बीच उन्हें एक जिम्मेदार मां होने का विश्वास आया।

मानसी अब जानती थीं कि हरेक माता-पिता को सीखने के इस मुश्किल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। तभी उन्होंने उन माता-पिता के काम को कुछ आसान करने का फैसला किया। आखिरकार उन्होंने Kidsstopress.com की स्थापना की। मानसी इसे यूं बयान करती हैं- ‘एक ऐसी वेबसाइट जो माता-पिता को सही फैसला लेने में मददगार हो।’

Kidsstopress.com बच्चों की जिंदगी से जुड़े हर पहलू को कवर करती है चाहे वो उनका फूड हो, ट्रेवल, एक्टिविटिज, इवेंट्स, सर्विसेज या शॉपिंग हो। माता-पिता भी यहां अपने अनुभवों को शेयर करते हैं। मानसी बताती हैं- “अपने बच्चे के लिए बेस्ट करने के सफर में मैंने ये जाना कि बच्चे से जुड़े किसी फैसले में मेरे लिए सिर्फ उसी की ओपिनियन मायने रखती है जो खुद किसी बच्चे की मां हो।”

सिर्फ एक मॉम्स ब्लॉग नहीं

मानसी ऐसा कुछ बनाना चाहती थी जो बच्चों के बेहतर लालन-पालन और इसे मजेदार बनाने के लिए वन-स्टॉप गाइड हो। वो याद करती हैं- “नेट पर बहुत सारी सूचनाएं उपलब्ध थीं, लेकिन उनमें से कोई भी भारत के संदर्भ में नहीं थी। यहां तो हर शहर की अपनी चुनौतियां होती हैं। मैं एक फुलटाइम जॉब करती थी इसलिए बच्चों के लिए क्या अच्छा है क्या बुरा है, ये जानने के लिए दूसरी मम्मियों से बातचीत नहीं कर पाती थी। मेरे पास अगर कोई विकल्प था तो वो था टेक्नोलॉजी तक मेरी पहुंच। इसीलिए मैंने ये सोचना शुरू कर दिया कि टेक्नोलॉजी और अनुभवी मांओं से मिले सलाहों को कैसे एक साथ जोड़ा जाए।”

मानसी कहती हैं- “वैसे तो हमारे पास अनगिनत सेवाएं हैं और मीडिया भी रेस्टोरेंट्स, मूवीज, कॉन्सर्ट वगैरह के बारे में न्यूज़ देता रहता है। मगर दिल्ली में अगर कोई नया पार्क खुले या फिर बच्चों को दिल्ली में किसी म्यूजियम ले जाना हो, या कहीं बच्चों के लिए किसी स्पेशल शो का आयोजन होना हो, चिड़ियाघर या संजय गांधी नेशनल पार्क जाने से जुड़ी सूचनाएं नहीं मिलती। किड्सस्टॉप्रेस इन्हीं जरुरतों को पूरा करती है।” वो कहती हैं- “ चूंकि, बच्चों से जुड़े प्रोडक्ट महंगे होते हैं इसलिए वो दूसरी मॉम्स से फीडबैक पाना पसंद करती हैं।”

No kidding नो किडिंग

अपने पहले बच्चे के जन्म के दो साल बाद मानसी ने सिर्फ अपने बल पर मुंबई से Kidsstopree.com को लॉन्च किया। तबसे लेकर अब तक वो ही इसकी ब्लॉगर-इन-चीफ हैं। उनके पास एडवर्टाइजिंग एंड ब्रांडिग, रिटेल और लाइफस्टाइल में 8 साल का अनुभव है। उनकी पिछली पोस्टिंग फ्रेंच कनेक्शन में मार्केटिंग एंड कम्यूनिकेशन हेड की थी। फिर भी वेबसाइट बनाना एक अलग अनुभव था और शुरुआत में इसे मॉनेटाइज करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी।

Kidsstopree.com मॉम्स ब्लॉग या बेबी सेंटर से बढ़कर एक किड्स लाइफस्टाइल वेबसाइट के तौर पर देखी जाने लगी जो बच्चों के लिए देश में मौजूद लेटेस्ट ब्रांड्स, सर्विस और इंवेंट्स की जानकारियां साझा करती है। इस तरह से ये इस क्षेत्र के उद्यमियों को अपने टारगेट ग्रुप से कनेक्ट करने का मौका देती है।

शुरुआत में ब्रांड्स और सेवाओं के मालिकों को ये समझाने में बहुत मुश्किल होती थी कि किस तरह से ऑनलाइन और डिजिटल मीडिया उनके बिजनेस में बड़ा फर्क ला सकता है। मगर धीरे-धीरे कुछ सालों में उनकी सोच बदली है।

मानसी बताती हैं- “अब वो पहले से ज्यादा जागरूक हैं और अब वो ऑनलाइन लिस्टेड होने की अहमियत को समझते हैं। अब वो समझते हैं कि ऑनलाइन होने से किसी अपडेट का बहुत ही कम समय में प्रचार किया जा सकता है। किसी मंथली मैगजीन में लिस्टिंग जैसे परंपरागत तरीकों से इतने कम समय में प्रचार नहीं हो सकता।”

पिछले दो सालों से उनके पास यंग, डायनेमिक और बेहद टेक्नो-सेवी लोग हैं जो किड्सस्टॉप्रेस के लिए पार्ट-टाइम काम करते हैं। उनमें से दो फुल-टाइमर हैं।

मानसी बताती हैं- “हमने एक दिन में 100 विजिटर से शुरुआत की और आज हमारे पास एक दिन में 60 हजार से ज्यादा विजिटर्स आते हैं। हम एक महीने में एक लाख बीस हजार से ज्यादा पेजव्यूज पाते हैं जिनमें से 35 फीसदी रिपीट विजिटर्स हैं।”

किड्सस्टॉप्रेस की अलग-अलग शहरों में कई ऑफलाइन चिड्रेंस इवेंट्स के साथ भी पार्टनरशिप है। उन्होंने किड्सस्टॉप्रेस कंसल्टिंग लॉन्च किया जिससे किड्स इंडस्ट्री के बारे में उनके ज्ञान से बहुत सारे ब्रांड्स और सर्विसेज फायदा उठाते हैं। उन्होंने दिवाली के दौरान 2012 में ‘Bazaar’ नाम के पहले ऑनलाइन किड्स एक्जिबिशन का भी आयोजन किया था। फिर 2013 में भी ऐसा ही आयोजन किया। उन्होंने पैरेंट्स और किड्स को समर कैंप्स से लेकर ब्रेस्ट फीडिंग तक तमाम मसलों पर मार्गदर्शन दिया।

मानसी कहती हैं- “जब मॉम्स मुझे लिखकर बताती हैं कि किस तरह से kidsstopress.com ने उन्हें सूझ-बूझ वाले बेहतरीन फैसले लेने में मदद करती है तो ये मेरे लिए सबसे बड़ा रिवॉर्ड होता है।”