'चेस ऑटोमेटेड' के साथ बाजी खेलें और मेकइनइंडिया का हिस्सा बनें...

केजे सोमैया काॅलेज आफ इंजीनियरिंग के दोनों छात्रों ने तैयार किया ‘चेस आॅटोमेटेड’‘चेस आॅटोमेटेड’ में आप खेल के भौतिक स्वरूप को महसूस करते हुए कंप्यूटर के खिलाफ खेल सकते हैंइनका इरादा मूलतः नेत्रहीनों के लिये सुलभ शतरंत बोर्ड तैयार करने का था लेकिन लोगों की प्रतिक्रियाओं के फलस्वरूप इसे आम उपभोक्ताओं के लिये भी करवाना पड़ा उपलब्धइस खेल को देश में ही तैयार करके मेकइनइंडिया मुहिम का हिस्सा बनकर गर्व का अनुभव कर रही है जोड़ी

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भव्य गोहिल और आतुर मेहता की मुलाकात केजे सोमैया काॅलेज आफ इंजीनियरिंग में पढ़ाई के दौरान हुई अगर आमतौर पर बात की जाए तो भारत के इंजीनियरिंग काॅलेजों में प्रवेश लेने वाले अधिकतर फ्रेशर या तो अच्छे ग्रेड पाने के फेर में लगे रहते हैं या फिर वे इस तथ्य के साथ सामंजस्य बैठाने का प्रयास करते रहते हैं कि वे अब एक इंजीनियरिंग संस्थान का एक हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद कुछ ऐसे युवा होते हैं जो सिर्फ अपनी खुशी और जुनून की संतुष्टि करने के लिये इंजीनियरिंग काॅलेज में प्रवेश लेते हैं। और गोहिल और आतुर के साथ कुछ क्षणों की मुलाकात के बाद आपको यह समझने में देर नहीं लगेगी ये दोनों उसी विशिष्ट क्लब के भाग हैं।

एक ईमेल साक्षात्कार में भव्य कहते हैं, ‘‘इंजीनियरिंग के अपने पहले सेमेस्टर के दौरान मिलने वाले खाली समय में हम अपने पाठ्यक्रम के साथ-साथ विभिन्न तकनीकी जुगाड़ों और छोटी परियोजनाओं में खुद को व्यस्त रखते थे।’’ काॅलेज की एक समिति की सभा के दौरान ये दोनों एक दूसरे के संपर्क में आए। ये दोनों हर समय कुछ नया और रचनात्मक बनाने के प्रयासों में लगे रहते जिसकी वजह से ये हमेशा सुर्खियों में बने रहते।

आतुर मेहता और भव्य गोहिल
आतुर मेहता और भव्य गोहिल

भव्य पुरानी यादों को टटोलते हुए बताते हैं, ‘‘फ्रेशर्स को ऐसी परियोजनाओं पर काम करते देखना अपने आप में एक असामन्य बात है लेकिन हम खुशनसीब रहे कि हमें सोमैया विद्याधर की अनुसंधान प्रायोगशाला RiiDL में कुछ समय बिताने और सीखने का मौका मिला।’’ यह सोमैया का एक ऐसा अनुसंधान केंद्र है जो वास्तविक दुनिया की समस्याओं को सुलझाने के लिये कुछ करने का इरादा रखने वाले समूहों, कौशनल विकास परियोजनाओं और नए उपक्रम की मदद करने का काम करता है। और बय इसी के बाद इस जोड़ी को आगे बढ़ने के लिये एक दिशा मिल गई ओर इनके लिये आगे के रास्ते खुल गए। आतुर बताते हैं, ‘‘इलेक्ट्राॅनिक्स इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष के दौरान RiiDL में हमारे द्वारा तैयार किये गए कुछ प्रोटो-टाइप्स रोम के मेकर फेयर, गोदरेज, केपजैमिनी, वाॅसप अंधेरी, आईआईटी बाम्बे और आईआईटी खड़गपुर में आयोजित हुए कुछ कार्यक्रमों में प्रदर्शित हुए। इन कार्यक्रमों में आने वालों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रियाओं ने हमें आगे बढ़ने के लिये और भी प्रोत्साहित करने का काम किया।’’

इनका विचार बोर्ड गेम्स को और अधिक प्रभाव डालने वाला बनाते हुए उनके भौतिक स्वरूप को भी बनाए रखना था। शतरंज के खेल के प्रशंसक होने के नाते इनकी पहली नजर इसी खेल पर गई और इस जोड़ी ने एक स्वचलित शतरंज बोर्ड को तैयार करने का फैसला किया जिसे उन्होंने ‘चेस आॅटोमेटिड’ का नाम दिया। स्वचतिल शतरंत मूलतः एक इंटरैक्टिव शतरंज बोर्ड है जिसमें काई भी व्यक्ति इसके भौतिक स्वरूप को महसूस करते हुए कंप्यूटर के खिलाफ शतरंज का खेल खेल सकता है।

प्रारंभ में इस परियोजना के तहत इनका इरादा नेत्रहीनों के लिये एक स्वचलित शतरंज बोर्ड का निर्माण करना था लेकिन समय के साथ संभावनाओं के विषय क्षेत्र में विस्तार होता गया। भव्य कहते हैं, ‘‘हमनें एनएबी (नेशनल एसोसिएशन आॅफ ब्लाइंड) का दौरा किया और खिलाडि़यों से उनके शतरंत के खेल को खेलने के तरीके और उनके समक्ष आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी इकट्ठी की।’’ लगभग चार महीनों के अनुसंधान के बाद वे एक अवधारणा प्रोटोटाइप तैयार करने में सफल रहे जो निर्माता समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित होने में बेहद सफल रहा। इसके अलावा शतरंत प्रेमियों और तकनीक के क्षेत्र के दिग्गजों ने भी इनकी इस अवधारणा में बहुत रुचि दिखाई। जल्द ही इस टीम के पास इस खेल में नई फीचर्स को जोड़ने के लिये प्रतिक्रियाओं और सुझावों का अंबार लग गया।

इनका वर्तमान संस्करण निर्माण के लिये बिल्कुल तैयार है। हालांकि इसके निर्माण के लिये पड़ोसी देश चीन इनकी पहली पसंद था लेकिन समाने आने वाली कुछ परेशानियों के चलते इन्होंने इनका निर्माण अपने ही देश में करने का फैसला किया। आतुर कहते हैं, ‘‘चीन का रुख करने की बजाय हमने फैसला किया कि हम अपने उत्पाद का निर्माण भारत में ही करेंगे और इस तरह से हम #मेकइनइंडिया मुहिम में भी अपना योगदान दे पाने में सफल रहेंगे। हमने सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता के साथ उत्पादन सुनिश्चित करने के लिये अपनी प्रयोगशाला में ही एक समनुक्रम प्रारंभ करने का फैसला किया। एक प्रारंभिक स्टार्टअप होने के नाते इस वजह से हमें उपभोक्ताओं से स्थायी संबंध बनाने में बहुत मदद मिली।’’

वर्ष 2013 के मध्य में एनएबी के साथ प्रारंभिक वार्ताओं के दौर के बाद से यह टीम अबतक वार विभिन्न प्रोटोटाइप तैयार चुकी है। इस परियोजना में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित इंजीयिरिंग की आवश्यकता थी और चूंकि ये दोनों इलेक्ट्राॅनिक्स इंजीनियरिंग से संबंध रखते थे संस्थापकों के लिये यह परियोजना बेहद मजेदार ओर चुनोतियों से भरपूर रही। इन्होंने सबसे पहले इलेक्ट्राॅनिक्स के क्षेत्र का काम पूरा किया और उसके बाद मेकेनिकल क्षेत्र की ओर बढ़ते हुए अंत में विभिन्न हिस्सों के स्वचालन का काम किया। पिछले वर्ष अक्टूबर के महीने में रोम में आयोजित हुए मेकर फेयर में प्रदर्शित होने के बाद से ‘चेस आॅटोमेटेड’ को समाज के एक विशेष तबके के अलावा एयरपोर्ट लाउंज, रिसोर्ट, सोसाइटियों के क्लबों, कैफे और कई होटलों ने बहुत पसंद किया है और इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाई है।

लोगों द्वारा दिखाई गई इस रुचि ने इस युवा जोड़ी को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिये प्रेरित किया है। भव्य कहते हैं, ‘‘हमें कई शतरंज क्लबों से अनुकूलन के कई अनुरोध भी प्राप्त हुए हैं और इसी के मद्देनजर हमने अपने उत्पाद की अगली पंक्ति के अनुसंधान एवं विकास पर काम करना प्रारंभ कर दिया है!’’ प्रारंभिक दौर में इस खेल को छोटे समूहों में तैयार किया जाएगा। एक भौतिक बोर्ड के अलावा इन्होंने इसका एक आॅनलाइन संस्करण भी तैयार किया है और इनका इरादा एक शतरंज प्रेमियों के एक ऐसे समुदाय का निर्माण करना है जिसमें खिलाड़ी दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठकर इस खेल का आनंद ले सकें और एक-दूसरे के खिलाफ बाजी लगा सकें।

भारत में हार्डवेयर के क्षेत्र में निरंतर क्रांति आती जा रही है। वर्ष 2014 के ऊहापोह से भरे दौर को पीछे छोड़ते हुए आज इस क्षेत्र में कई नए स्टार्टप्स और निर्माताओं के प्रयास दिखाई दे रहे हैं। और यह सब शायद #मेकइनइंडिया मुहिम का नतीजा है।

Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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