'ऐडस्टोर'… ऐड देखने के भी देता है पैसे

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भारत में मोबाइल फोन्स की संख्या डेस्कटॉप और कंप्यूटर्स की संख्या से भी ज्यादा है। मैरी मीकर के मुताबिक भारत में हर साल सबसे ज्यादा नए इंटरनेट यूजर्स जुड़ रहे हैं। इसके अलावा आईएएमएआई और केपीएमजी की एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन मार्केट है और 2017 तक यहां मोबाइल इंटरनेट यूजर्स की संख्या 31.4 करोड़ तक पहुंच सकती है।

इस तरह मोबाइल एडवर्टाइजिंग एक ऐसा क्षेत्र है जहां एडवर्टाइजर्स और ब्रांड्स को फोकस करना चाहिए। एडवर्टाइजिंग के दूसरे मोड्स की तुलना में स्मार्टफोन्स के जरिये यूजर्स की हैबिट, प्रिफरेंसेज और दूसरे जरूरी डेटा प्वॉइंट्स के बारे में जानकारी हासिल किया जा सकता है। इसके अलावा ये नेटिव एडवर्टाइजिंग के लिए एक बड़े बाजार का मार्ग खोलेगा। ऐडस्टोर यूजर्स के लिए जाने-माने ब्रांड्स के फुल-फ्लेज्ड ऐड्स खोजने और इस प्रक्रिया में उन्हें पैसे पाने का एक मंच उपलब्ध करा रहा है।

ये क्या है?

ऐडस्टोर के जरिये यूजर्स मूवी टेलर्स को खोज और देख सकते हैं, यूट्यूब चैनल प्रोमोज और वेब-सेंट्रिक वीडियो एड्स खोज सकते हैं और उन्हें देख सकते हैं। सारे वीडियो करीब 2 से तीन मिनट के लेंथ के हैं और स्टोरीलाइन के साथ है। ऐड्स को देखने के बाद यूजर्स को एमसीक्यूज या पोल के प्रश्नों का उत्तर देना होता है। ऐडस्टोर इसे अपना यूएसपी बताता है। इन क्वेश्चनेयर्स का एक विश्लेषण ऐडवर्टाईजर्स को मुहैया कराया जाता है। ये एक बेशकीमती सूचना है क्योंकि ये यूजर्स के पर्सपेक्टिव से मिलती है। इससे ब्रांड को मार्केटिंग एनालिसिस और मार्केट रिसर्च में मदद मिलती है। बदले में यूजर्स को फ्लिपकार्ट, फ्रीचार्ज, मैकडॉनल्ड्स आदि ब्रांड्स के वाउचर्स मिलते हैं।

स्टार्टअप के को-फाउंडर हाई स्कूल फ्रेंड्स नरेन बुधवानी (सीईओ) और पीयूष धकन (सीओओ) हैं जो दुबई में पैदा हुए और पले-बढ़े हैं। नरेन एनएमसीसीई से अपने ग्रेजुएशन के लिए मुंबई शिफ्ट हो गए जबकि पीयूष मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी में अपनी स्टडी के लिए दुबई में ही रुके रहे। यूनिवर्सिटी में नरेन को अटेंडेंस कम होने की वजह से अपने फर्स्ट ईयर एग्जाम्स में बैठने से डिबार कर दिया गया। इसके बाद वह दुबई वापस लौट गए और फूडस्टफ ट्रेडिंग कंपनी की स्थापना की जो फाइव स्टार होटल्स के लिए बेकरी इनग्रेडिएंट्स उपलब्ध कराती थी। लेकिन अपने माता-पिता से पड़ रहे प्रेशर की वजह से वह अपने ग्रेजुएशन को पूरा करने के लिए मुंबई लौट आए।

ऐडस्टोर टीम
ऐडस्टोर टीम

पीयूष ने कॉलेज में अपने सेकेंड ईयर के दौरान एक कस्टमाइज्ड मोबाइल कवर्स का एक ऑनलाइन पोर्टल शुरु किया। मगर उन्हें जल्द ही ये अहसास हो गया कि दुबई में ई-कॉमर्स के लिए बहुत ज्यादा संभावनाएं नहीं है। बाद में वह ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद ऐडस्टोर शुरु करने के लिए मुंबई लौट आए। नरेन ने भी उन्हें ज्वॉइन करने के लिए कॉलेज छोड़ दिया। टीम में फिलहाल 6 सदस्य हैं। नरेन और एक दूसरा कर्मचारी टेक्नोलॉजी को हैंडल करते हैं जबकि पीयूष और दूसरे कर्मचारी बिजनेस डेवलपमेंट और ग्रोथ को देखते हैं।

बिजनेस मॉडल

ऐडस्टोर का बिजनेस मॉडल कॉस्ट पर व्यू (सीपीवी) के इर्द-गिर्द घूमता है। नरेन कहते हैं- “हम अब यूनिक व्यूज पर काम कर रहे हैं। ऐप पर वीडियो अपलोड होने से पहले ऐडवर्टाइजर इस बात का फैसला करते हैं कि उन्हें करीब कितना व्यूज चाहिए। एक बार जब उतने व्यूज हासिल हो जाते हैं तब वीडियो ऑटोमेटिकली ऐप से गायब हो जाता है।”

वे ऐडवर्टाइजर्स से पर यूनिक व्यूज 1.5 रुपये से लेकर 7 रुपये तक चार्ज करते हैं। ये चार्ज ऐड्स के ड्यूरेशन, यूजर से पूछे जाने वाले सवालों की संख्या (हालांकि अब इसे 3 प्रश्नों तक सीमित कर दिया गया है), और ऐप पर ऐडवर्टिजमेंट की विजिबिलिटी के हिसाब से कम या ज्यादा होते हैं।

अब तक का सफर

ऐडस्टोर अभी शुरुआती चरण में है और जल्द ही एंजेल इनवेस्टमेंट के चरण को शुरू करने की सोच रहा है। वे अब तक 8500+ रजिस्टर्ड यूजर्स बना चुके हैं। उनका दावा है कि इनमें से 65 फीसदी एक्टिव यूजर्स हैं जो सप्ताह में औसतन 3 बार ऐप को विजिट करते हैं। नरेन बताते हैं- 'बतौर स्टार्टअप, प्रत्येक दिन हमें कुछ न कुछ नया सीखाता है। समय-समय पर अलग-अलग तरह की चुनौतियां पेश आती है। टैलेंट हायर करना हमारी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। चूंकि स्टार्टअप्स जबरदस्त फंडिंग प्राप्त कर रही हैं इसलिए कर्मचारियों के सैलरी भी एक नए स्तर पर पहुंच चुकी है। ये एक ऐसा इश्यू है जिसका हम नियमित तौर पर सामना करते हैं।'

ऐडस्टोर के मौजूदा ऑडिएंस 16 से 25 साल के एज ग्रुप के हैं। उनकी योजना है कि विभिन्न एज ग्रुप के यूजर्स को जोड़ा जाए। इसके अलावा वे अपना आईओएस ऐप भी डेवलप कर रहे हैं जिसे जल्द ही लॉन्च किया जाएगा।

इस सेक्टर में अन्य प्लेयर्स

गूगल, याहू और दूसरे विशाल टेक दिग्गजों का जहां वेब पर एडवर्टाइजिंग पर दबदबा है, वही मोबाइल एडवर्टाइजिंग अभी शुरुआती दौर में हैं जहां कौन विनर है इसकी तस्वीर बहुत धुंधली है। हालांकि वर्तमान में गूगल को बढ़त हासिल है।

इनमोबी इस क्षेत्र में सबसे बड़े प्लेयर्स में से एक है। उन्होंने हाल ही में मिप लॉन्च किया है जिसने ट्रेडिशनल मोबाइल एडवर्टाइजिंग को और भी ज्यादा प्रासंगिक और असरदार ऐड फॉर्मेट में बदला है। इस क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण प्लेयर है एयरलॉयल, जिसका दावा है कि वह जनवरी 2015 में रेवेन्यू के लिहाज से 240 फीसदी एम-ओ-एम के साथ विकास कर रहा है। नरेन कहते हैं- “इस क्षेत्र में कुछ दूसरे कॉम्पटिटर्स हैं टाटा का जीएटी और माइक्रोमैक्स का एमएडी। मगर कुछ ऐसी चीजें हैं जो हमें इन सबसे अलग करती हैं। वे यूजर्स को ऐड देखने के लिए रिवार्ड यूजर के फोन करने से पहले देती हैं। ये कुछ कुछ जबर्दस्ती जैसा है।”

हमें क्या पसंद है?

ये ऐप बेहद शानदार और यूजर फ्रेंडली है। इसमें वीडियो अलग-अलग कैटेगरी में रखे गए हैं- जैसे ई कॉमर्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल्स आदि। होमपेज पर यूजर्स ट्रेंडिंग वीडियोज को ट्रैक कर सकते हैं। इसके लिए ‘टॉप पेड’ और ‘टॉप व्यूड’ केटेगरी हैं। यूजर किसी वीडियो को फेवरिट कैटेगरी में डाल सकता है जिससे कि वह उन्हें बाद में देख सके। एक ऐसे कंज्यूमर के तौर पर जो बहुत ज्यादा टीवी नहीं देखता और यू-ट्यूब पर ऐड्स को स्किप कर देता है, मैंने पाया कि ऐडस्टोर एक रोचक पोर्टल है जहां ब्रांड स्टोरिज को खोजना, कूपन पाना और इन-ऐप क्रेडिट पाना काफी इंट्रेस्टिंग है।

कहां है सुधार की गुंजाइश?

यूजर अपने इंट्रेस्ट की कैटेगरी को फॉलो कर सके, अपडेट्स पा सके या नया वीडियो रिलीज होने के वक्त पुश नोटिफिकेशंस पा सके, इसके लिए हम अपने ऐप में एक नया फीचर जोड़ना चाह रहे हैं। इसके अलावा हम अलग-अलग तरह के इंट्रेस्टिंग वाउचर्स उपलब्ध कराना चाहेंगे जो ज्यादा अपील करेगा।

लोग अक्सर कंटेट को देखने या लाइक करने के बाद उसे शेयर करना चाहते हैं, इसलिए सोशल फीचर्स को इंट्रोड्यूस करना जैसे वीडियो के नीचे कमेंट की सुविधा या उसे फेसबुक, ट्विटर या व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया चैनल पर शेयर करना काफी मददगार साबित हो सकता है।

योर स्टोरी का फैसला

समग्र रूप से, ऐडस्टोर एक इंट्रेस्टिंग प्लेटफॉर्म है जिस पर आप वीडियो ऐड खोज सकते हैं। यूजर्स अक्सर टीवी या यू-ट्यूब पर ब्रेक के दौरान स्विच कर जाते हैं। मगर ऐडस्टोर पर सिर्फ स्टोरीलाइन्स वाले ऐड्स ही दिखते हैं इसलिए इसका यूजर ऐप पर सिर्फ ऐड देखने के मकसद से आता है। ये देखना काफी दिलचस्प होगा कि वे किस तरह से अपने प्लेटफॉर्म से और ज्यादा यूजर्स और ऐडवर्टाइजर्स को जोड़ते हैं।

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