टीवी या रेडियो नहीं, ऑटोरिक्शा के जरिए बनारस में ऐडवर्टाइज़िंग कर रहा यह स्टार्टअप

आईआईटी पासआउट ये लड़के इस अनोखे तरीके से लोगों के बीच बना रहे अपने स्टार्टअप को लोकप्रिय...

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भारत में कुल 50 लाख ऑटोरिक्शा हैं और इनके माध्यम से रोज़ाना लगभग 3 बिलियन राइड्स ली जाती हैं। आईआईटी से पढ़े दिव्यांशु कश्यप और किशन कुमार ने इन आंकड़ों को गंभीरता से लिया और उनके दिमाग़ में एक शानदार बिज़नेस आइडिया आया।

उड़नखटोला की टीम
उड़नखटोला की टीम
उड़नखटोला की सब्सक्रिप्शन फ़ीस 999 रुपए से 2,999 के बीच है और इसी मुख्य माध्यम से कंपनी अभी रेवेन्यू बना रही है। साथ ही, कंपनी अब ऐड कॉन्टेन्ट सर्विस भी दे रही है, जिसके अंतर्गत ग्राफ़िक डिज़ाइनिंग, वीडियो मेकिंग और ऐनीमेशन आदि शामिल हैं।

स्टार्टअप: उड़नखटोला
फ़ाउंडर्स: दिव्यांशु कश्यप, शिवम गुप्ता और किशन कुमार
शुरूआत: 2017
जगह: वाराणसी
काम: कम कीमतों में स्तरीय ऐडवरटाइज़िंग की सुविधा उपलब्ध कराना
सेक्टर: ऐडवरटाइज़िंग
फ़ंडिंग: बूटस्ट्रैप्ड

पिछले कुछ सालों में भारत में कैब ट्रैवलिंग के कल्चर के तेज़ी से बढ़ने के बाद बावजूद ऑटोरिक्शा का बिज़नेस अभी भी बरकरार है। आंकड़ों के मुताबिक़, भारत में कुल 50 लाख ऑटोरिक्शा हैं और इनके माध्यम से रोज़ाना लगभग 3 बिलियन राइड्स ली जाती हैं। आईआईटी से पढ़े दिव्यांशु कश्यप और किशन कुमार ने इन आंकड़ों को गंभीरता से लिया और उनके दिमाग़ में एक शानदार बिज़नेस आइडिया आया। उन्हें एहसास हुआ कि ये ऑटोरिक्शा अपने दिन के एक बड़े हिस्से में शहर की मुख्य जगहों पर मौजूद रहते हैं और इस वजह से अपने आप ही उनकी अच्छी ऐडवरटाइज़िंग हो जाती है।

इसके बाद ही दोनों ने उड़नखटोला की शुरूआत करने के बारे में सोचा। यह एक वाराणसी आधारित स्टार्टअप है, जो ऐडवरटाइज़िंग को सभी की पहुंच में लाना चाहता है। यह स्टार्टअप उन बड़े ब्रैंड्स की भी मदद करता है, जो अपनी डिमांड बढ़ाना चाहते हैं और उन छोटे स्टार्टअप्स के लिए भी काम करता है, जो प्रमोशन और डिवेलपमेंट के माध्यम से बड़ा बनना चाहते हैं। उड़नखटोला की कोर टीम में आईआईटी-वाराणसी के 7 स्टूडेंट्स हैं, जो दूसरे या तीसरे साल की पढ़ाई कर रहे हैं।

आमतौर पर ऐडवरटाइज़िंग के प्रमुख माध्यमों में टीवी, रेडियो, प्रिंट और होर्डिंग्स आदि शामिल होते हैं और उड़नखटोला की टीम मानती है कि अक्सर इन माध्यमों के ज़रिए ऐडवरटाइज़िंग ओवररेटेड हो जाती है और महंगी भी पड़ती है। उड़नखटोला मानता है कि सालों से इन माध्यमों से ही न जाने कितने ब्रैंड्स को एक बड़ी आबादी तक पहुंचने का मौका मिला, लेकिन ये माध्यम हर कंपनी के लिए सटीक और कारगर नहीं हो सकते।

मान लीजिए कि किसी एक स्टार्टअप का लोकल सर्विस या गुड्स प्रोवाइडर के पास कम बजट है और एक विशेष टारगेट ऑडियंस तक पहुंचना है। ऐसी स्थिति में उड़नखटोला अपनी किफ़ायती सुविधाओं के साथ आगे आता है।

उड़नखटोला ने ऐडवरटाइज़िंग के लिए ऑटोरिक्शा के माध्यम को चुना है। उड़नखटोला ऑटोरिक्शा में ड्राइवर की सीट के ऊपर एक ऐंड्रॉयड टैबलेट इन्सटॉल करवाता है, जिसपर किसी सर्विस या प्रोडक्ट के वीडियो ऐड्स चलते रहते हैं और पूरे वाराणसी में कम दाम में ब्रैंड्स का प्रमोशन हो जाता है।

दिव्यांशु बताते हैं कि क्लाइंट्स अपनी मर्ज़ी से यह चुनाव कर सकते हैं कि उन्हें कितने इलाके में अपने विज्ञापन के वीडियो दिखाने हैं। दिव्यांशु कहते हैं कि उनकी ब्रैंड स्ट्रैटजी बेहद सहज है। कंपनी ऑटोरिक्शा ड्राइवरों से माध्यम और लोकल ऐडवरटाइज़िंग एजेंसीज़ से ऐड कॉन्टेन्ट उपलब्ध कराने के लिए संपर्क करती है। शुरूआत में उड़नखटोला अपने क्लाइंट्स को मुफ़्त सुविधाएं देता है और एकबार विश्वसनीयता बनने के बाद फ़ीस चार्ज करता है।

कंपनी के को-फ़ाउंडर्स दिव्यांशु (21 साल) और किशन कुमार (20 साल) सेमेस्टर परीक्षाएं देने के बाद आगे की योजना बना रहे थे, जब उनके दिमाग़ में यह आइडिया आया। दोनों मिलकर एक ऑटोरिक्शा ऐग्रीगेटर ऐप बनाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने पाया कि ओला कैब सर्विस पैसेंजर सीटर पर ऐड डिस्प्ले कर रही है और इसके बाद उन्होंने अपना पहला आइडिया ड्रॉप कर दिया। कुछ वक़्त तक रिसर्च के बाद वह अपनी हालिया रणनीति पर पहुंचे।

आइडिया के संतुष्ट होने के बाद उन्होंने तीसरे साथी शिवम गुप्ता से बात की। उन्होंने अपनी सेविंग्स और विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीती गई इनामी राशि से स्टार्टअप की शुरूआत की। साथ ही, उन्हें कुछ दोस्तों और परिवार की तरफ़ से भी आर्थिक मदद मिली। इसके बाद धीरे-धीरे, आदर्श कुमार (21), पुलकित राज (21), स्वप्निल कुलकर्णी (20) और देव मित्तल भी स्टार्टअप से जुड़ गए।

फ़िलहाल उड़नखटोला सिर्फ़ बनारस में ही अपनी सुविधाएं दे रहा है। दिव्यांशु मानते हैं कि उनका प्लेटफ़ॉर्म अपने आप में ही एक यूएसपी है। प्लेटफ़ॉर्म की मदद से क्लाइंट्स को उनके व्यक्तिगत पोर्टल्स भी उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि वे अपने हिसाब से ऐड कैंपेन को मैनेज कर सकें और दिखाए गए विज्ञापनों के आंकड़ों की जानकारी रख सकें। अगर क्लाइंट्स के पास वीडियो विज्ञापन नहीं है तो उड़खटोला की टीम इसमें भी उनकी मदद करती है।

स्टार्टअप 2019 तक लखनऊ, गुवाहाटी, रांची और पुणे तक अपना बिज़नेस फैलाना चाहता है। इतना ही नहीं, टीम योजना बना रही है कि ऐडवरटाइज़िंग के लिए जल्द ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अन्य माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा सके जैसे कि टैक्सी और बस आदि। फ़िलहाल स्टार्टअप पूरी तरह से बूटस्ट्रैप्ड है और फ़डिंग की तलाश में है।

वैसे तो स्टार्टअप अक्टूबर 2017 में ही लॉन्च हो चुका था, लेकिन को-फ़ाउंडर्स ने मार्केट को सही से समझने के लिए दो महीने रिसर्च और डिवेलपमेंट की प्रक्रिया में खर्च किए। इसके बाद दिसंबर 2017 में यह सर्विस ठीक तरह से मार्केट में पहुंच पाई। अभी तक इस स्टार्टअप ने 10 ऑटोरिक्शा के साथ संपर्क बनाए हुए हैं और 6 क्लाइंट्स को अपनी सुविधाएं दे रहा है।

उड़नखटोला की सब्सक्रिप्शन फ़ीस 999 रुपए से 2,999 के बीच है और इसी मुख्य माध्यम से कंपनी अभी रेवेन्यू बना रही है। साथ ही, कंपनी अब ऐड कॉन्टेन्ट सर्विस भी दे रही है, जिसके अंतर्गत ग्राफ़िक डिज़ाइनिंग, वीडियो मेकिंग और ऐनीमेशन आदि शामिल हैं। दिव्यांशु चाहते हैं कि वह अपने प्रोडक्ट को इस हद तक विकसित कर लें कि उनकी कंपनी ऐग्रीगेटर ऐप मार्केट में जाने के लिए तैयार हो जाए ताकि उनकी सुविधा और भी अधिक विश्वसनीय और मुनाफ़ा देने वाली हो जाए।

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