25 साल नौकरी करने के बाद इस IITian ने गांव लौटकर संवारी ग्रामीणों की जिंदगी

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निहार दुबई, लंदन जैसे देशों में काम कर चुके हैं और उनके पास तकरीबन 25 वर्ष का अनुभव है। अच्छी-खासी तनख्वाह के साथ वे विदेश में ही बाकी लोगों की तरह आरामदायक जिन्दगी गुजार सकते थे, लेकिन उनका दिल ऐसा करने के लिए गवाही नही दे रहा था। 

निहार रंजन
निहार रंजन
आज उनके फार्म में 52 गायें हैं और वे रोज लगभग 300 लीटर दूध का कारोबार करते हैं। वे अपने फार्म में 50 से भी अधिक परिवार को रोजगार दे चुके हैं। 

पढ़ने में टैलेंटेड निहार ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास की और 1989 में IIT खड़गपुर से इंडस्ट्रीयल इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट विषय से M.TECH की डिग्री हासिल की।

भारत की राजनीति में अगर सिर्फ उन लोगों को आने की इजाजत दी जाय जिनके अंदर ईमानदारी का लहू दौड़ता हो तभी शायद अपने देश को भ्रष्टाचार से मुक्त किया जा सकता है। ऐसा कहना है IITian निहार रंजन बेऊरा का जो ओडिशा के रहने वाले हैं। निहार ने अपने जिले केंद्रपाड़ा से ही गांव की पंचायत का चुनाव जीतकर वहां के लोगों को खुशहाल जिंदगी जीने का मौका दे रहे हैं। आईआईटी जैसे संस्थान से पढ़ने के बाद निहार ने मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी की, लेकिन उन्हें संतुष्टि नहीं मिली और वे वापस अपने गांव लौट आए। यहां उन्होंने पंचायत का चुनाव लड़ा और अब लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

निहार दुबई, लंदन जैसे देशों में काम कर चुके हैं और उनके पास तकरीबन 25 वर्ष का अनुभव है। अच्छी-खासी तनख्वाह के साथ वे विदेश में ही बाकी लोगों की तरह आरामदायक जिन्दगी गुजार सकते थे, लेकिन उनका दिल ऐसा करने के लिए गवाही नही दे रहा था। वे वापस अपना देश अपने गांव आ कर लोगों के लिए कुछ अच्छा करना चाहते थे। उन्होंने गांव के विकास व ग्रामीणों के भविष्य को बेहतर करने का मन बना लिया। गांव लौट कर सबसे पहले उन्होंने 35 गायों के साथ एक डेरी फार्म खोला जिस से वे लोगों को सस्ते दामों पर शुद्ध दूध तथा कुछ लोगों को रोजगार मुहैया करवाने में सफल हुए।

आज उनके फार्म में 52 गायें हैं और वे रोज लगभग 300 लीटर दूध का कारोबार करते हैं। वे अपने फार्म में 50 से भी अधिक परिवार को रोजगार दे चुके हैं। उनके इस शुरुआत से गांव वालों के बीच खुशी का माहौल है और लोग उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। निहार रंजन आज ओड़िशा के केंद्रपाड़ा जिले में स्थित दुमुका गांव की पंचायत समिति के अध्यक्ष बन चुके हैं। वे कहते हैं, 'यह लोगों की सोच है कि लोग पैसे की लालच में राजनीति में आने का फैसला करते हैं लेकिन मै इसे गलत साबीत कर उनके सोच को बदल दूंगा।' चुनाव जीतने के बाद निहार ने गांव के विकास में अपना योगदान देने का फैसला किया है।

निहार को बचपन से ही काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। जब वे मात्र 1 वर्ष के थे तभी 1967 में आये तूफान ने उनके सर से पिता का साया और 5 वर्षीय बड़े भाई को छीन लिया। उनकी मां 25 साल की उम्र में ही विधवा हो गयी थीं। लेकिन निहार ने इन सब हालात का डट कर सामना किया। घर की स्थिति डगमगाने की वजह से निहार की बचपन नाना-नानी के पास ही गुजरा, जहां उन्हें अपनी मां से मिलने के लिए 2-3 महीने तक इंतज़ार करना पड़ता था। वे बचपन से ही चंचल स्वभाव के थे और पढ़ाई के साथ ही साथ खेलकूद में भी अपनी रूचि रखते थे। पढ़ने में टैलेंटेड निहार ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास की और 1989 में IIT खड़गपुर से इंडस्ट्रीयल इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट विषय से M.TECH की डिग्री हासिल की।

ग्रामीणों के साथ निहार रंजन
ग्रामीणों के साथ निहार रंजन

निहार को इंडस्ट्री में 20 सालों का अनुभव है तथा 5 सालों तक उन्होंने कॉलेज में छात्रों को बतौर प्रोफ़ेसर पढ़ाया भी है। वे डिजिटल उद्यमी और स्टार्टअप के स्वतंत्र सलाहकार भी हैं। वे खाली समय में युवाओं को सही कैरियर चुनने के लिये प्रेरित भी करते हैं। निहार ने अपने गांव को काफी करीब से देखा है और गरीबों के दुख को करीब से महसूस भी किया है। उन्होंने गांव वालों की जटिल समस्याओं का समाधान निकाल कर उनका विश्वास जीत लिया है। उनका मानना है कि शिक्षा के महत्व को समझते हुए अपने गांव अपने देश में इसकी सुदार करनी चाहिए। इसी से देश तरक्की करेगा।

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