तमिल मजदूर की किडनी ट्रांसप्लांट के लिए केरल के दो गांवों ने इकट्ठे किए 11 लाख रुपये

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इस काम के लिए गांव के चर्च के पादरी ने भी सहयोग किया और गांव वालों को दान करने के लिए प्रोत्साहित किया। जयन के मुताबिक गांव वालों ने अपना दिलखोलकर उनकी मदद की। वह ठेला लगाकर गांव में घर-घर जाकर लोगों के कपड़े प्रेस करते हैं।

अपनी पत्नी के साथ जयन (फोटो साभार- द इंडियन एक्सप्रेस)
अपनी पत्नी के साथ जयन (फोटो साभार- द इंडियन एक्सप्रेस)
जयन का किडनी ट्रांसप्लांट अगले महीने निश्चित हुआ है। इलाके के म्युनिसिपल कलेक्टर टीनो के थॉमस ने कहा, 'हमने पैसे इकट्ठे करने के लिए पांच वार्डों के 2,000-2,500 घरों को के लोगों से संपर्क साधा। 

पंचायत सदस्य थॉमस ने बताया कि जिन लोगों ने दान दिया उसमें सभी अमीर व्यक्ति नहीं थे। इसमें दिहाड़ी मजदूर से लेकर किसान और मिडल क्लास फैमिली के लोग भी शामिल थे।

कहते हैं कि एकता में शक्ति है और जब बात दक्षिण भारत के दो प्रदेशों की एकता की आती है तो मामला थोड़ा गंभीर हो जाता है। पिछले हफ्ते केरल के दो गांवों के लोगों ने राजनीतिक और धार्मिक अंतर्विरोधों को दरकिनार करते हुए तमिलनाडु के मदुरै में रहने वाले 45 साल के जयन के किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 11 लाख रुपये इकट्ठे कर लिए। 15 अक्टूबर को केरल के कोट्टयम जिले में चिंगवनम और पल्मल जिले के जयन के लिए घर-घर जाकर पैसे इकट्ठे किए। जयन तमिलनाडु से यहां आकर पिछले 20 सालों से इन दोनों गांवों के लोगों के कपड़े प्रेस करते थे।

उनकी जिंदगी बचाने के लिए गांव वालों ने एक समिति का गठन किया और उसका नाम रखा, 'जयन लाइफ सेविंग समिति'। इस समिति का नेतृत्व गांव पंचायत के ही पांच सदस्यों ने किया। इस काम के लिए गांव के चर्च के पादरी ने भी सहयोग किया और गांव वालों को दान करने के लिए प्रोत्साहित किया। जयन के मुताबिक गांव वालों ने अपना दिलखोलकर उनकी मदद की। वह ठेला लगाकर गांव में घर-घर जाकर लोगों के कपड़े प्रेस करते हैं। जब उन्हें किडनी की समस्या हुई तो उन्हें लगने लगा कि पैसे के आभाव में कहीं उनकी मृत्यु न हो जाए। लेकिन यह बात जब गांव के लोगों को पता चली तो उन्होंने जयन की जिंदगी बचाने के लिए अभियान चलाया।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक जयन का किडनी ट्रांसप्लांट अगले महीने निश्चित हुआ है। इलाके के म्युनिसिपल कलेक्टर टीनो के थॉमस ने कहा, 'हमने पैसे इकट्ठे करने के लिए पांच वार्डों के 2,000-2,500 घरों को के लोगों से संपर्क साधा। हालांकि हमें सिर्फ 10 लाख रुपयों की आवश्यकता थी, लेकिन गांव वालों ने दिलखोलकर पैसे दिए और हमारे पास टोटल 11 लाख 25 हजार रुपये इकट्ठे हो गए।' थॉमस ने बताया कि जिन लोगों ने दान दिया उसमें सभी अमीर व्यक्ति नहीं थे। इसमें दिहाड़ी मजदूर से लेकर किसान और मिडल क्लास फैमिली के लोग भी शामिल थे।

समिति ने दिहाड़ी कामगारों से कहा कि वे अपने एक दिन की कमाई दान करें। ये कर्मचारी एक दिन में लगभग 500 रुपये कमा लेते हैं। कुछ लोग तो ऐसे भी थे जिन्होंने 25,000 रुपये तक दान किए। चर्च के पादरी फादर सेबस्टियन ने लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि गांव में किसी को भी आकस्मिक तौर पर ऐसी समस्या आ सकती है ऐसे में हमें ऐसे ही पैसे इकट्ठे करने के लिए तैयार रहना होगा। फादर सेबस्टियन चेंगानसरी में ही कम्युनिटी रेडियो एफएम सर्विस चलाते हैं। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक और धार्मिक बाधाओं के बावजूद हम एक साथ आए और एक प्रवासी कामगार की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया।'

उन्होंने कहा कि समिति में पुराने वामपंथी नेता समेत बीजेपी और कांग्रेस के भी नेता था। इससे ये संदेश जाता है कि केरल गॉड का अपना देश है जहां हर किसी की देखभाल होती है। अगर किसी को सच में मदद की आवश्यकता होती है तो लगो मदद करने के लिए खुद ही आगे आते हैं। फादर ने कहा कि वे 2012 से ऐसे ही चंदा लगाकर लोगों का इलाज करते आ रहे हैं। उन्होंने लगभग 89 लोकल सिविक बॉडी के जरिए चंदा इकट्ठा किया है। वे अब तक 19 करोड़ का चंदा इकट्ठा कर 115 मरीजों का अंग प्रत्यारोपण करवा चुके हैं।

जयन के मामले में 14 अक्टूबर को कमिटी ने लोगों से अपील की। एक दिन बाद संगठन के वॉलंटियर घर-घर गए और सुबह नौ बजे से लेकर 2 बजे तक पूरा चंदा इकट्ठा कर लिया। जितनी भी राशि इकट्ठा हुई उसे जयन और पंचायत के सदस्यों के खुले संयुक्त खाते में जमा कर दिया गया। जयन अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ चिंगवनम के ही किराए के घर में रहते हैं। वह बताते हैं, 'पिछले सात सालों से मुझे किडनी की समस्या थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मुझे काफी दिक्कतें होने लगीं। फिर डॉक्टरों ने भी कह दिया कि बिना ट्रांसप्लांट के काम नहीं चलेगा। मेरी पत्नी अपनी एक किडनी दान करने को राजी हो गईं। डॉक्टरों ने जांच किया तो उन्हें पता चला कि मेरी पत्नी अंगदान करने के लिए मैचिंग डोनर हैं।'

पंचायत के सदस्य थॉमस ने कहा कि अगस्त में तमिलनाडु के ही एक कामगार की इलाज के आभाव में मौत हो गई थी इसलिए उन्होंने गांव वालों को एक जिंदगी का हवाला दिया। तमिलनाडु के रहने वाले कामगार मुरुगन का कोल्लम में एक्सिडेंट हो गया था, लेकिन उसे एक के बाद एक करके पांच मेडिकल कॉलेजों में ले जाया गया। लेकिन किसी भी अस्पताल में वेंटिलेटर न होने की वजह से उसे भर्ती नहीं कराया जा सका। मुरुगन की मौत के बाद केरल में काफी हंगामा हुआ था। 

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