आतंक का रास्ता छोड़ हुए थे सेना में भर्ती: शहीद नजीर अहमद की दास्तां

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नजीर अहमद की कहानी जितनी दिलचस्प है उतनी ही प्रेरक भी। दरअसल नजीर पहले आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर सेना में भर्ती होने का फैसला कर लिया था।

लांस नायक नजीर अहमद वनी (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
लांस नायक नजीर अहमद वनी (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
नजीर 2004 में प्रादेशिक सेना में भर्ती हुए थे। वे शुरू में 162वीं बटालियन का हिस्सा थे। सेना द्वारा जारी बयान के मुताबिक अभी फिलहाल वे राष्ट्रीय राइफल्स की एक यूनिट का हिस्सा थे।

बीते दिनों कश्मीर के आतंकवाद प्रभाविक जिले शोपियां में सेना के साथ आतंकियों की मुठभेड़ हो रही थी। सेना के जवान आतंकियों का मुंहतोड़ जवाब दे रहे थे कि तभी लांस नायक नजीर अहमद वनी (38) को आतंकियों की गोली ने घायल कर दिया। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। पूरा दिन वे जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ते रहे और आखिरकार सोमवार को उन्होंने अपने प्राणों की आहूति दे दी। नजीर अहमद की कहानी जितनी दिलचस्प है उतनी ही प्रेरक भी। दरअसल नजीर पहले आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा करते थ, लेकिन बाद में उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर सेना में भर्ती होने का फैसला कर लिया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक नजीर को उनकी बहादुरी के लिए 2007 में सेना मेडल भी मिल चुका था। इसी साल अगस्त में उन्हें एक और मेडल प्रदान किया गया था। दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले के चेखी अशुमुजी गांव के रहने वाले नजीर ने अपने जीवन की शुरुआत में ही बंदूकें थाम ली थीं। हालांकि ये बंदूकें उनके अपने लोगों पर ही चलाने के लिए थीं। जब उन्हें इस बात का अहसास हुआ तो उन्होंने सरेंडर कर दिया और आतंक का रास्ता छोड़ दिया।

नजीर 2004 में प्रादेशिक सेना में भर्ती हुए थे। वे शुरू में 162वीं बटालियन का हिस्सा थे। सेना द्वारा जारी बयान के मुताबिक अभी फिलहाल वे राष्ट्रीय राइफल्स की एक यूनिट का हिस्सा थे। सोमवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ नजीर का अंतिम संस्कार किया गया। तिरंगे में लिपटे नजीर को 21 गन सैल्यूट दिया गया। वे अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को छोड़ गए हैं। नजीर का गांव कोइनमूह इलाकों से घिरा हुआ है जो कि आतंक के लिए कुख्यात है।

सेना द्वारा जारी बयान में कहा गया कि नजीर की शहादत पर देश को गर्व है और उनके परिवार के साथ सेना हमेशा खड़ी रहेगी। जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में रविवार सुबह जिस मुठभेड़ में नजीर अहमद शहीद हुए उसमें सेना ने 6 आतंकवादियों को ढेर कर दिया। एनकाउंटर के बाद मुठभेड़ स्थल से लौट रहे सेना के वाहनों पर प्रदर्शनकारियों ने पत्थर बरसाए थे।

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