एमबीए होकर प्रतीक ने छातों के कारोबार में तलाशा भविष्य और डिज़ाइनर छातों से कर दिखाया कमाल

साल 2014 में शुरू हुई ‘Cheeky Chunk’....डिजाइनर छातों की नयी दुनिया...हर रोज 400 छातों का ऑर्डर ....ई-कामर्स से भी बेच रहे हैं छाते

0

सभी जानते हैं कि छाता ऐसी चीज है जो हमें बारिश और धूप से बचाता है, लेकिन दूसरों से अलग सोचने वाले प्रतीक दोशी ने छाते को एक मौके के तौर पर लिया और उसे लेकर अपना एक अलग उद्यम खड़ा कर दिया। कुछ ही महीनों में उन्होंने कुछ ऐसा कमाल कर दिया कि उनका ये उद्यम अब तक 30 लाख रुपये के छाते बेच चुका है।

प्रतीक दोशी, संस्थापक, ‘Cheeky Chunk’
प्रतीक दोशी, संस्थापक, ‘Cheeky Chunk’

प्रतीक ने साल 2014 में ‘Cheeky Chunk’ नाम से अपनी कंपनी शुरू की। इससे पहले वो छोटे से बाजार में कई छाते बेच चुके थे, जहां पर अच्छी प्रतिक्रियाएं मिलने के बाद उन्होने फैसला लिया कि वो विशेष डिजाइनर छाते बेचेंगे और वो भी सामान्य दामों में। इसके लिए उन्होने पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद चल रही अपनी नौकरी को भी छोड़ दिया। प्रतीक का कहना है कि उनके दिमाग में ये विचार दो वजहों से आया। पहला ये था कि किसी ने भी इस काम को उस तहर नहीं किया था, जिस तरह वो करना चाहते थे। और दूसरी वजह ये थी वो कि ये नहीं चाहते थे कि दूसरों को अमीर बनाने के लिए  नौकरी करें। प्रतीक को याद है कि जब उन्होने दोस्तों सामने ये प्रस्ताव रखा तो वो उनके पीछे हंसने लगे और उनके विचारों की खिल्ली उड़ाने लगे, क्योंकि किसी का भी ये नहीं मानना था कि छातों को बेचने का कारोबार भी किया जा सकता है। क्योंकि उनके सभी दोस्त एमबीए करने के बाद अच्छी नौकरी करने में व्यस्त थे। तो प्रतीक शहर भर में धक्के खा रहे थे, बस उनको जरूरत थी अपने विचारों को हकीकत में बदलने की।

‘Cheeky Chunk’ छाते के डिजाइन
‘Cheeky Chunk’ छाते के डिजाइन
प्रतीक ने किसी तरह 500 छातों का निर्माण कराया और उनको अपने पारिवारिक संबंधों और दोस्तों की मदद से बेचना शुरू किया। इसके लिए प्रतीक ने अपनी बचत में से 1 लाख 35 हजार रुपये खर्च कर दिये, जो उन्होंने कॉलेज के दिनों में ट्यूशन कर कमाये थे। इस पैसे को उन्होंने छोतों की डिजाइन, उत्पाद के निर्माण और वेबसाइट के निर्माण में खर्च किये। जिसके बाद उनके इस आइडिया ने काम तो किया, लेकिन वो मुश्किल से कुछ ही पैसा कमा सके, लेकिन वक्त के साल हालात बदले और आज एमबीए किया हुआ उनका कोई दोस्त दो साल में जितना कमाता है प्रतीक उससे अधिक साल के तीन महिने छातों को बेचकर कमा लेते हैं।

एक शानदार और बढ़िया छाते के लिए जरूरत होती है सही हैंडल, पैनल, कपड़े, फ्रेम, छाते के प्रिंट और उसकी सिलाई की। हर चीज सलीके से होनी चाहिए। इसके लिए प्रतीक छाते के फ्रेम राजस्थान से मंगाते हैं जबकि उसके लिए कपड़ा स्थानीय बाजार से लेते हैं। जिसके बाद वो ठेके में छाते की प्रिटिंग और सिलाई कराते हैं।

प्रतीक बताते हैं कि उनको अपने इस काम को मुकाम तक पहुंचाने के लिए प्रिंटरों से मीठी मीठी बातें तक करनी पड़ीं। इतना ही नहीं वो कई बार कई कई किलोमीटर अपनी पीठ पर  छातों का कपड़ा लादकर भी ले गये, ताकि छाते सही समय पर तैयार हो सकें। आज हर रोज उनको 400 से ज्यादा छातों के निर्माण के ऑर्डर मिल रहे हैं और उनकी छोटी सी टीम के लिए इतने ढेर सारे ऑर्डर को संभालना मुश्किल हो रहा है। क्योंकि टीम के सदस्य ही खुद ही छातों की पैकिंग, उनकी जांच और उनका चालान आदि तैयार करते हैं। इसके अलावा दैनिक दूसरे काम भी टीम के सदस्य ही निपटाते हैं।

प्रतीक का कहना है कि उन्होंने अपने उद्यम से काफी कुछ सीखा है और वो गीता का हवाला देते हुए कहते हैं “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” यानी तुम कर्म करो और फल की चिंता मत करो। ‘Cheeky Chunk’ सात सदस्यों की एक छोटी सी टीम है जिसमें दो एमबीए इंटर्न भी शामिल हैं। टीम में एक एकांउटटेंट और दो लोग छातों का निरीक्षण करने और उसकी पैकिंग के काम को देखते हैं। हर छाते की बारीकी से जांच की जाती है। जांच के दौरान ये देखा जाता है कि वो पानी से बचा सकता है कि नहीं और दूसरी गलतियों पर नजर रखी जाती है। यही कारण है कि इनके बनाए छाते बहुत ही कम संख्या में ठीक होने के लिए वापस आते हैं।

‘Cheeky Chunk’ की मार्केटिंग में फोटग्राफी का काफी अहम रोल है। उनका मानना है कि 50 प्रतिशत मार्केटिंग, उत्पाद और ग्राहक ही कर देते हैं। इसके अलावा उनका जोर ई-कामर्स के प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल करने पर है। उनका कहना है कि किसी भी उत्पाद को अपलोड करने के लिए 100 से ज्यादा की-वर्ड डाले जाने चाहिए ताकि ग्राहक जल्द जल्द आपके उत्पाद तक पहुंच सके। वो बताते हैं कि जब उन्होंने अामेजन में पहली बार अपने बनाए छातों को बेचना शुरू किया था तो वो काफी परेशान थे। तब उन्होंने अपने एक परिचित से कहा कि वो अामेजन की वेबसाइट में जाकर छाता खरीदें तब वो वेबासाइट के 20वें पेज पर था, लेकिन तीन हफ्तों के अंदर अंदर इनके बनाये छाते ने पहले ही पेज पर सिक्का जमा लिया। आज ये अमेजन डॉट इन में सबसे ज्यादा संख्या में बेचे जाना वाला छाते का ब्रांड बन गया है।

प्रतीक सलाह देते हैं कि कभी भी ग्राहक को अपना उत्पाद खरीदने के लिए नहीं बोलना चाहिए। उसकी जगह अपना ध्यान अपने उत्पाद को अच्छी तरीके से प्रदर्शित करने पर लगाना चाहिए और कुछ ऐसा करना चाहिए कि लोग आपके उत्पाद से प्यार करें। ‘Cheeky Chunk’ का फोकस इस ओर रहता है कि कैसे लोग बारिश से प्यार करें और उस पल को कैसे यादों में सजों कर रखें। ‘Cheeky Chunk’ फिलहाल अपनी वेबसाइट के अलावा, फ्लिपकॉर्ट, अमेजन, स्नेपडील, और मुंबई के कुछ रिटेलरों के जरिये अपने उत्पाद बेच रहा है। लेकिन ज्यादातर डिमांड ई-कामर्स के जरिये ही आती है। एक अनुमान के मुताबिक अब तक ये लोग 7 हजार से ज्यादा छाते बेच चुके हैं। जबकि इन लोगों ने इस साल सिर्फ 1हजार छातों को बेचने का लक्ष्य रखा था।

इस मांग में टीयर-2 और 3 शहरों का खासा योगदान है। करीब 40 प्रतिशत छाते बिहार, छत्तीसगढ़ और उड़िसा में बेचे गए हैं। प्रतीक का अनुमान है कि अगर छातों की डिमांड यूं ही बनी रही तो साल के अंत तक वो 10 हजार छातों को बेचने का आंकडा पार कर जाएंगे। उनका कहना है कि कंपनी के लाभ का मार्जिन स्थाई है हालांकि शुरूआत में प्रतीक को छातों की बिक्री के लिए कुछ पैसा खर्च भी करना पड़ा था, लेकिन धीरे धीरे इन छातों की मांग बढ़ती चली गई है और ये बदस्तूर जारी है।

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...