स्किल डेवलपमेंट के बिजनेस से दो युवा बने करोड़पति

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आज कॉर्पोरेट कंपनियां जैसी स्किल वाले युवाओं को खोज रही हैं, उनकी भारी कमी है। बाकी दुनिया को छोड़ दें तो अकेले भारत को ही पांच लाख डाटा साइंटिस्ट की जरूरत है। इसी तरह के स्किल डेवलपमेंट को ध्यान में रखते हुए दो विलक्षण युवाओं निखिल बार्सिकर और सोनिया आहुजा ने शुरू किया 'इमार्टिकस' नाम से स्टार्टअप, जिसने उन्हे देखते-देखते करोड़पति बना दिया।

जिस रफ्तार से हमारे देश में यंग जनरेशन ग्रोथ कर रही है, उस पर दुनिया भर की कंपनियां निगाह लगाए हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2022 तक पूरी दुनिया में से सबसे ज्यादा युवा भारत में होने की संभावना है।

लगभग दो माह पुरानी बात है, इसी साल जून 2018 की। एक सूचना तेजी से मीडिया में फैली थी कि चीन की कंपनियों के बाद अब वेंचर कैपिटल फंड्स भारतीय इंटरनेट स्पेस में इन्वेस्टमेंट के बड़े मौकों की तलाश कर रहे हैं। किमिंग वेंचर्स, मॉर्निंगसाइड वेंचर्स, सीडीएच इनवेस्टमेंट्स ऑर्किड एशिया ग्रुप जैसी आधा दर्जन कंपनियां भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश के अवसर ढूंढ रही हैं। इसी क्रम में उनकी नजर खास तौर से जिस तरह के एजुकेशन स्टार्टअप्स पर लगी हुई है, उन्ही में एक है 'एजुटेक'। सूचना में निवेश राशि पांच से बीस लाख डॉलर तक होने की संभावना जताई गई थी। अब आइए, जानते हैं कि कौन-सा स्टार्टअप है 'एजुटेक'।

फिलहाल, संक्षेप में इतना जान लीजिए कि इस स्टार्टअप से अपने सुनहरे भविष्य के ख्वाब को हकीकत में ढालने वाले दो विलक्षण शख्स हैं सोनिया आहुजा और निखिल बार्सिकर, जो इन दिनो करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। उन्हे अपने इस अनोखे बिजनेस प्लान में ढाई सौ प्रतिशत तक ग्रोथ की कामयाबी मिली है। इससे उनकी कंपनी 'फाइनेंशियल सर्विसेस एंड एनालिटिक्स एड-टेक फर्म इमार्टिकस' इन दिनो करोड़ो रुपए की कमाई कर रही है। उनकी कंपनी इमार्टिकस पिछले पांच वर्षों में लगभग तीस हजार ऐसे प्रोफेशनल तैयार कर चुकी है।

लगभग छह साल पहले सोनिया आहुजा और निखिल बार्सिकर फाइनेंशियल सर्विसेस सेक्टर में स्किल सेट की कमी को अपनी कॉरपोरेट करियर में नजदीकी से देखने के बाद किसी ऐसे ऐसे बिजनेस मॉडल पर दिमाग लगाने लगे, जो लंबे समय तक चल सके। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2012 में शुरू किया फाइनेंशियल सर्विसेस एंड एनालिटिक्स एड-टेक फर्म इमार्टिकस। 'इमार्टिकस' की शुरुआत बी2सी प्लेटफॉर्म पर 2-कैटगरीज के कोर्सेस से हुई यानी प्रो डिग्री और पोस्ट ग्रैजुएट कोर्स। प्रो डिग्री कोर्स कंपनी ने इंडस्ट्री पार्टनर्स से मिलकर डिजाइन किया है।

इसमें स्टूडेंट्स को ब्लॉक चेन, रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग और एडवांस्ड एनालिटिक्स जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। बाद में इन कोर्स में आईबीएम, एचडीएफसी बैंक, बीएनपी पारिबा, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टैनली, आदित्य बिड़ला ग्रुप, केपीएमजी और एक्सेंचर जैसे बड़े साझेदार शामिल हो गए। इन दिनो कंपनी की ओर से ये शॉर्ट टर्म कोर्स पचास हजार से डेढ़ लाख रुपए तक में ऑफर किए जा रहे हैं। दूसरे, पोस्ट ग्रैजुएट कोर्स में एनालिटिक्स, बैंकिंग, न्यू एज फाइनेंस जैसे स्पेशलाइजेशन के अवसर हैं। ये लंबी अवधि के कोर्सेस हैं जिसके लिए कंपनी तीन लाख रुपये तक शुल्क ले रही है। इसके साथ ही बी2बी में कंपनी कॉर्पोरेट ट्रेनिंग कोर्स ऑफर कर रही है।

जिस रफ्तार से हमारे देश में यंग जनरेशन ग्रोथ कर रही है, उस पर दुनिया भर की कंपनियां निगाह लगाए हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2022 तक पूरी दुनिया में से सबसे ज्यादा युवा भारत में होने की संभावना है, जिसे बेहतर स्किल डेवलपमेंट और बेहतर रोजगार के अवसरों की जरूरत होगी। आजकल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग, एसएएस, एनालिटिक्स टेक्नोलॉजी के कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जो लगभग हर सेक्टर की सबसे जरूरी आवश्यकता बन गए हैं। बाहर का हाल ये है कि ऐसे पेशेवरों का भारी अभाव है। इसी कमी को पूरा कर रहा है 'एजुटेक स्टार्टअप्स'। आज रोजगार पाने के लिए सिर्फ ऐकेडेमिक एजुकेशन काफी नहीं है। सबसे जरूरी हो गया है प्रोफेशनल एक्सिलेंस प्राप्त करने के लिए वह स्किल पा लेना, जैसी की कंपनियों को जरूरत है। अभी आज ही की लेटेस्ट सूचना है कि भारत को पांच लाख डाटा साइंटिस्ट (डीएस) की जरूरत है।

वर्तमान में सेवा प्रदाताओं के बीच ढाई लाख, स्टार्टअप में 25 हजार, आईटी कंपनियों में 26 हजार, अन्य क्षेत्र की कंपनियों को 1.40 लाख और विदेशी कंपनियों में 92 हजार डीएस की मांग है। कुल 5.11 लाख डीएस की मांग की तुलना में देश में मात्र 1.44 लाख कुशल डीएस ही उपलब्ध हैं। देश में डाटा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इसकी सुरक्षा के लिए कंपनियां अहम कदम उठाने के लिए विवश हो रही हैं। डाटा साइंटिस्ट गायब डाटा खोजने में मुख्य भूमिका निभाता है। ऐसे में देश में डीएस की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो चली है। नैस्कॉम इस पर काम कर रहा है। सरकारी और निजी क्षेत्र के संस्थानों में तैयार हो रहे डीएस की संख्या कत्तई मांग के अनुरूप नहीं है। भारत सरकार का कहना है कि वर्ष 2021 में देश में 7.50 लाख डीएस की जरूरत होगी। अनुमान है कि अगले तीन साल में करीब पांच लाख से ज्यादा डीएस तैयार हो जाएंगे।

इसी थ्यौरी को फार्मुलेट करते हुए 'एजुटेक' स्टार्टअप नौकरी की जद्दोजहद में फंसे युवाओं की चुनौतियां आसान करना चाहता है। उन्हे रास्ता दिखाना चाहता है। आज देश में वर्कफोर्स की कमी नहीं है, मुश्किल है तो अच्छी नौकरी मिलने ही। इसीलिए आज ऑन द जॉब ट्रेनिंग के बजाय स्किल डेवलप करने की अलग से पढ़ाई करना जरूरी हो गया है। सोनिया आहुजा और निखिल बार्सिकर ने शुरू में अपनी कंपनी में पांच करोड़ रुपये की पूंजी लगाई थी, जिसमें हर साल औसतन दो सौ से ढाई सौ प्रतिशत की ग्रोथ ने उनका मुनाफा आसमान पर पहुंचा दिया है। आज देश भर में इसके दस कैंपस हैं, जिसे कंपनी अठारह तक पहुंचाना चाहती है। कंपनी विदेश के दुबई, मलेशिया जैसे देशों में भी खुद को आजमा रही है क्योंकि लगभग दस-पंद्रह प्रतिशत विदेशी युवा ऑनलाइन प्लैटफॉर्म पर भी हासिल हो रहे हैं। वर्ष 2019 तक कंपनी टारगेट ग्लोबल सौ करोड़ी क्लब में शामिल होने का है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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