मुस्लिम महिलाओं ने छठ पूजा के लिए साफ किया घाट

मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना...

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पूरे बिहार में लोक आस्था का महापर्व छठपूजा के आते ही गंगा घाटों और सड़कों की सफाई शुरू हो जाती है। पटना की पूर्व पार्षद मुमताज जहां हर साल घाटों की सफाई करने के लिए आगे आती हैं।

छठ पूजा पर घाट की सफाई करती मुस्लिम महिलाएं (फोटो साभार- एएनआई)
छठ पूजा पर घाट की सफाई करती मुस्लिम महिलाएं (फोटो साभार- एएनआई)
मुमताज ने बताया की पटना सिटी शुरू से ही हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है लोग एक दूसरे के पर्वो में मदद करते है इसलिए धर्म से ऊपर इंसानियत है जिसे हमसब मिलकर सबकुछ भूलकर एक दूसरे के पर्व में मदद कर मिसाल कायम करते हैं।

पूजा में नदी, तालाब या किसी जल स्रोत में कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है। कई लोग अपने घर से घाट तक दंडवत प्रणाम करते हुए भी पहुंचते हैं।

आज तो हमारे त्योहारों को भी धर्म के रंग में रंग देने की कोशिश की जाती है, लेकिन देखा जाए तो त्योहार किसी धर्म विशेष के लिए न होकर पूरे समाज के लिए होते हैं। इसी भावना के तहत लोग त्योहारों की तैयारियां भी करते हैं और एक दूसरे के साथ मिल-बांटकर खुशियां मनाते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला बिहार की राजधानी पटना में जहां मुस्लिम महिलाओं ने पूर्व पार्षद मुमताज के नेतृत्व में घाट पर सफाई अभियान चलाया और झाड़ू से घाट को चकाचक कर दिया। बिहार में छठ पूजा का त्योहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्योहार के लिए पूरे देश में रह रहे बिहार और पूर्वी यूपी के लोग अपने घर जाने के लिए उतावले रहते हैं।

चार दिन का यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी यानी दीपावली के ठीक छह दिन बाद मनाया जाता है। इस त्योहार की रस्में किसी नदी के घाट पर संपन्न कराई जाती हैं। इसीलिए महिलाओं ने घाट की सफाई को जरूरी समझा। इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और घाट पर जाकर सूर्यदेव की आराधना करती हैं। उन्हीं के लिए इन महिलाओं ने घाट पर व्रतियों के लिए झाड़ू लगाकर साफ-सफाई की और पूजा से जुड़े अन्य इंतजाम किए। पूजा में नदी, तालाब या किसी जल स्रोत में कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है। कई लोग अपने घर से घाट तक दंडवत प्रणाम करते हुए भी पहुंचते हैं।

पूरे बिहार में लोक आस्था का महापर्व छठपूजा के आते ही गंगा घाटों और सड़कों की सफाई शुरू हो जाती है। पटना की पूर्व पार्षद हर साल घाटों की सफाई करने के लिए आगे आती हैं। वह कहती हैं कि महिलाओं को किसी तरह का कष्ट न हो इसलिए घाटों की सफाई कराई जा रही है। मुमताज ने बताया की पटना सिटी शुरू से ही हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है लोग एक दूसरे के पर्वो में मदद करते है इसलिए धर्म से ऊपर इंसानियत है जिसे हमसब मिलकर सबकुछ भूलकर एक दूसरे के पर्व में मदद कर मिसाल कायम करते हैं। छठ पर्व को मनाने वाली व्रती महिलाएं जिस कच्चे चूल्हे पर प्रसाद बनाती हैं, उस चूल्हे को कई मुस्लिम महिलाएं सफाई और शुद्धता का ख्याल रखते हुए मन लगाकर बनाती हैं।

पटना में कई ऐसे इलाके हैं, जहां मुस्लिम महिलाएं इन चूल्हों को बनाती हैं। इसे बनाने के लिए ये सभी दीवाली के पहले से ही छठ पर्व के लिए चूल्हा तैयार करने में जुट जाती हैं। प्रभात खबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक दारोगा राय पथ में चूल्हे को थोक में बेचने वाले मो. जाकिर कहते हैं कि इसे बनाने के लिए हम सब परसा बाजार से मिट्टी को लाते हैं। उसमें से कंकड़-पत्थर चुन कर निकाल देते हैं। इसके बाद पानी व भूसा मिलाकर मिट्टी को चूल्हे का आकार देते हैं। यह पूछने पर की चूल्हे खरीदने वाले ये जानते हैं कि आप मुस्लिम हैं और चूल्हा बना रहे हैं? जाकिर कहते हैं, भगवान तो सबके लिए एक है, हमने आपने तो इसे बांटा नहीं. कुछ लोग हैं, जो अपनी सुविधा के अनुसार भगवान को भी बांट देते हैं।

पटना नगर निगम गंगा घाटों के अलावा शहर के 49 छठ तालाबों की भी तैयारी कर रहा है। मंगलवार को नहाय खाय के दिन ही इन सभी तालाबों में गंगा जल डाला जाएगा। इसके लिए निगम ने पानी के 23 टैंकर को धुलवाकर तैयार कर लिए गए हैं। गंगा जल डालने की जिम्मेवारी जल शाखा के पदाधिकारियों को दी गई है। इन तालाबों में निगम द्वारा साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, चाली और पहुंच पथ का निर्माण कराया गया है। उन्होंने कहा कि तालाबों की तैयारी भी पिछले साल के मुकाबले ज्यादा बेहतर हुई है।

इसके अलावा छठ घाटों पर कई सामाजिक बुराइयों के खिलाफ सकारात्मक संदेश देने का प्रयास निगम द्वारा किया जा रहा है। इन बैनरों को ऐसे स्थानों पर लगाया जा रहा है जहां लोगों की नजर आसानी से पड़ जाए। अभी लॉ कॉलेज घाट से लेकर सिटी के 59 घाटों पर ऐसे बैनर पोस्टर टांग दिए गए हैं। छठ घाटों की तैयारी के साथ-साथ पटना नगर निगम घाट पर व्रतियों को दहेज मुक्त विवाह का संदेश भी देगा। इसके साथ ही बाल विवाह जैसी बुराइयों को खत्म करने का भी अभियान चलाएगा। इसके लिए निगम के सभी घाटों पर इससे संबंधित बैनर और पोस्टर लगाए जा रहे हैं। नगर आयुक्त अभिषेक सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दहेज मुक्त और बाल विवाह मुक्त बिहार बनाने का संकल्प लिया है।

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