महिलाओं के सेल्फ डिफेंस में बड़े काम का स्मार्टफोन ऐप 

इजाद हुआ एक ऐसा स्मार्टफोन ऐप, जो लड़कियों की सुरक्षा करेगा बड़ी चालाकी से...

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महिलाओं के सेल्फ डिफेंस के तरह-तरह के उपाय हैं, कंपनियों ने तमाम गैजेट्स भी मॉर्केट में उतार दिए हैं लेकिन आधुनिक टेक्नोलॉजी इसमें बड़े काम की साबित हो रही है। ऐसा ही एक नया स्मार्ट फोन ऐप इजाद हुआ है, जो अपराधी अथवा अटैक करने वालों को चुपचाप बड़ी खूबसूरती से चकमा दे देता है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
हम जिस तरह की दुनिया में रहते हैं, उसमें खासकर महिलाओं को अपनी आत्मरक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। महिलाओं को समाज में, आमतौर पर शारीरिक रूप से कम समर्थ देखा जाता है और क्रिमिनल माइंडेड लोग उनको आसानी से निशाना बना लेते हैं।

जैसे-जैसे तकनीक का विकास हो रहा है, तरह-तरह के आधुनिक गैजेट्स जन्म लेते जा रहे हैं। यह विकासशील परिवर्तन महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से भी बड़ा कारगर साबित हो रहा है। एक जापानी स्मार्टफोन ऐप तो महिलाओं के लिए बड़े काम की चीज हो सकता है। जापान की कंपनी लियोप्लेस ने परछाई बनाने वाला एक ऐसा स्मार्टफोन ऐप तैयार किया है, जो महिलाओं की सुरक्षा करते हुए अपराधियों को चकमा देगा। इस ऐप के कारण घर के बाहर से देखने वालों को अंदर एक परछाई नजर आएगी। उन्हे लगेगा कि घर के अंदर महिला अकेली नहीं, और भी कोई है।

सेल्फ डिफेंस के लिए इसके अलावा भी महिलाओं के सुरक्षार्थ कई तरह के खास गैजेट्स आ गए हैं, जिन्हें महिलाएं अपने हैंडबैग में आसानी से छिपाकर रख सकती हैं। मसलन, पेन नाइफ, परफ्यूम पेपर स्प्रे, पेपर फोम, सेलफोन स्टन गन, पर्सनल अलार्म आदि। सामान्य पेन या कॉम्ब जैसे दिखता है पेन नाइफ, जो खोलने पर चाकू बन जाता है। कैट कीचेन कीचेन से भी वार किया जा सकता है। परफ्यूम पेपर स्प्रे आंखें चौंधिया सकता है। कुछ देर के लिए दिखना बंद हो जाता है। पेपर फोम हवा के साथ आंखों में घुस जाता है। सेलफोन स्टन गन गैजेट सेलफोन की तरह दिखता है लेकिन उससे तेज करंट का झटका लगता है। पर्सनल अलार्म गैजेट का बटन दबाने पर वह तेज आवाज करता है, जिसे सुनकर आसपास के लोग मददगार बन सकते हैं।

कई कंपनियों ने तो ऐसे एप्लीकेशन लांच किए हैं, जिसके जरिये वे आपातकालीन स्थिति में करीबियों को सूचना दे सकती हैं। सभी बस और ऑटो में भले ही अब तक जीपीसी सिस्टम न लगाए जा सके हों पर स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियां यह जरूर सुनिश्चित कर रही हैं कि हर स्मार्टफोन में जीपीएस लगाया जाए, जिससे उनके मौजूदा ठिकाने का पता लगाया जा सके। महिलाओं के मुताबिक ऐसा नहीं है कि एक-दो बार उन्हें सुरक्षा एप्लीकेशन, स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना पड़ता है, बल्कि यह डिवाइस उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है।

आज हम जिस तरह की दुनिया में रहते हैं, उसमें खासकर महिलाओं को अपनी आत्मरक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। महिलाओं को समाज में, आमतौर पर शारीरिक रूप से कम समर्थ देखा जाता है और क्रिमिनल माइंडेड लोग उनको आसानी से निशाना बना लेते हैं। विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि अपराधी अपने लक्ष्यों का चुनाव ऐसे समय में करते हैं जब उनके संभावित शिकारी आसपास के हालात से पूरी तरह बेखबर होते हैं।

हमारे देश में इस तरह के मामलों में निरन्तर बढ़ोत्तरी हो रही है, जिनमें से ज्यादातर लोगों द्वारा इस प्रकार की हिंसा के खिलाफ कोई रिपोर्ट नहीं की जाती है, ऐसी स्थिति में महिलाओं के लिए आत्मरक्षा पहले से कहीं अधिक आवश्यक बन गई है। महिलाएं तेजाब से होने वाले हमलों और छेड़छाड की वजह से भी स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। वर्तमान समय में लोगों की मानसिकता ऐसी हो गई है कि वे किसी पीड़िता के साथ हो रही हिंसा की अनदेखी कर देते हैं और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए मौके से खिसक लेते हैं। महिलाओं के विरुद्ध हो रही उत्पीड़न की ये छोटी-छोटी घटनाएं कई बार बड़े अपराध का रूप ले लेती हैं।

इस तरह की असुरक्षा की स्थितियां अगर घर में आजाएं और महिला अकेली हो तो उसे तेजी से रसोई में पहुंचकर मिर्च पाउडर या चाकू को अपने बचाव के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। अकेले यात्रा करते समय सवारी वाहन का नम्बर जरूर नोट कर लेना चाहिए। आत्मरक्षा के लिए कराटे, किकबॉक्सिंग, इजरायल क्राव-मागा और पारंपरिक छड़ी आदि से लड़ने का महिलाओं को प्राथमिकता से जरूर प्रशिक्षण ले लेना चाहिए। कई संस्थाएं, जैसेकि मुम्बई का मार्शल साइंस संस्थान डेयर, मुस्कान फाउंडेशन और ब्लैंक नॉइज़ महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए जागरूक करते हैं।

आत्मरक्षात्मक प्रशिक्षण हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होता है। अतः छोटे शहरों की महिलाएं इंटरनेट वेबसाइटों की सहायता से भी आत्मरक्षा की तकनीक सीख सकती हैं। यदि इस तरह का अटैक दिखे तो पलक झपकते ही पहले विनम्र होने का नाटक कर हमलावर का ध्यान थोड़ा भटका दें फिर स्वयं अटैक कर दें। सड़क पर पैदल चलते समय रह-रहकर पीछे मुड़कर देखते चलें। पर्स आदि को अपने सामने रखें। लंबी दूरी तय करनी हो और अज्ञात इलाकों से गुजरना पड़े तो ऊँची एड़ी की चप्पल पहनने से बचें। जब जरूरत हो तो जोर से और एक आक्रामक आवाज में ‘स्टॉप’ कहें, लेकिन धमकियों का इस्तेमाल करने से बचें।

सड़क किनारे चलते वक्त, बस या टैक्सी में सफर करते समय अथवा अपने ही घर के आसपास, कभी भी और कहीं भी महिलाओं की सुरक्षा और शुचिता पर कोई भी असमाजिक तत्व हाथ डाल सकता है। ऐसे में प्रशासन, समाज और सरकार के दायित्व के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि महिलाएं खुद आगे बढ़कर अपनी सुरक्षा को लेकर मुस्तैद रहें जिसके लिए सेल्फ डिफेंस टेकनीक की सही जानकारी बहुत जरूरी है। इसे अपनी जीवनशैली में शामिल कर महिलाएं किसी भी मुश्किल घड़ी का सामना कर लायक बन सकती हैं। शरीर को फुर्तीला बनाने के लिए योग भी एक स्थायी और प्रभावी अस्त्र है।

प्रतिदिन सूर्य नमस्कार, उत्तानपाद आसन, पर्वतासन, धनुरासन आदि को दिनचर्या में शामिल कर लेना चाहिए। आत्मरक्षा के लिए शरीर को मजबूत बनाना और खुद को एलर्ट रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है आत्मरक्षा की कला में निपुण होना। आजकल न सिर्फ स्कूलों में बल्कि फिटनेस सेंटर व हेल्थ क्लब्स में महिलाओं के लिए तरह-तरह के सेल्फ डिफेंस वर्कआउट्स होते हैं। जूडो, कराटे, टायक्वांडो, जुजित्सू, कुंग फू आदि। अक्सर मुश्किल घड़ी में हमारा सिक्स्थ सेन्स हमें इशारे करता है कि हम कहां सुरक्षित हैं और कहा नहीं। महिलाओं का यह सिक्स्थ सेन्स और भी सजग होता है। तो अगर अपनी सुरक्षा को लेकर आपके मन में कोई भी संशय हो तो उसे दबाने के बजाय उसपर गौर करें। इसके लिए यह भी जरूरी है कि आप स्ट्रेस और टेंशन से मुक्त रहें और तुरंत निर्णय लेने के लिए हमेशा तैयार रहें।

एथलीट विक्टर लायलको ने महिलाओं के लिए सेल्फ डिफेंस से जुड़ी कुछ टेक्निक्स अपनी बुक में सुझाए हैं। उनका कहना है कि इन टेक्निक्स को जानकर वह किसी ऐसे आदमी पर भारी पड़ सकती हैं, जो उन्हें परेशान करता है। विक्टर मार्शल आर्टिस्ट और ट्रेनर भी हैं। विक्टर ने महिलाओं के सेल्फ डिफेंस से जुड़े जो टिप्स बताए हैं, उनमें किसी मेल के छह अलग-अलग बॉडी पार्ट पर अटैक करने के वह गुर सिखाते हैं। इन पार्ट्स में आंखें, नाक, गर्दन, सोलर पिक्सल, घुटना और ग्रॉइन शामिल हैं। मसलन, यदि कोई हाथ पकड़ता है, तब अपने दोनों हाथों से उसके हाथ की दो-दो उंगलियों को पकड़कर अपोजिट डायरेक्शन में खींच दें।

उसके बाद, एक हाथ छोड़कर छेड़ने वाली की गर्दन के कंठ में जोर से अपनी एक उंगली को घुसाएं। यदि कोई सामने की तरफ से पकड़ता है तो अपने सिर से सामने वाले की नाक पर जोर से प्रहार करें। जैसे ही वो अनबैलेंस हो, अपने पैर के घुटने से उसके ग्रॉइन पर अटैक करें। इन दोनों प्रहार से सामने वाला पूरी तरह पस्त हो जाएगी। यदि महिला की लंबाई पुरुष से कम है तो वह अपने एक हाथ से रोके और दूसरे से उसकी ठोडी पर जोर से अटैक करे। जैसे ही वो अनबैलेंस हो तुरंत अपने पैर के घुटने से उसके ग्रॉइन पर अटैक कर दे। यदि कोई कलाई पकड़ ले तो महिला अपने हाथ को जोर से क्लॉक वाइज घुमाए।

ऐसा करने से कलाई की पकड़ ढीली पड़ जाएगी। यदि कोई पीछे की तरफ से पकड़ने की कोशिश करे तो सबसे पहले अपने सिर के पीछे की तरफ से उसके चेहरे पर अटैक करें। इससे सामने वाले हड़बड़ा जाएगा। और फिर तेजी से झुककर उसके घुटने पर अटैक करके मोड़ दें। अब उसका एक पैर पकड़कर ऊपर की तरफ उठा दें। ऐसा करने से वो जमीन पर गिर जाएगा। यदि कोई व्यक्ति साइड से पकड़ता है तो उसी साइड वाले हाथ की कोहनी से उसके चेहरे पर वार कर दें। वो जैसे ही अनबैलेंस हो, अपने दोनों हाथों को पकड़कर फिर उसी कोहनी से पूरी ताकत लगाकर उसके पेट पर अटैक कर दें।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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