मोती के आभूषणों की अलग पहचान बना रहा है ‘Revere’

2014 में ‘Revere’ की शुरूआत

‘Revere’ ऑनलाइन ही करता है लेनदेन

‘Revere’ की टीम में 10 से ज्यादा कारीगर

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‘मोती’, ये वो चीज है जिसकी हर महिला दीवानी होती है। पिया सिंह भी मोती के इस खिंचाव से नहीं बच सकीं। क्योंकि बचपन से वो अपनी नानी और मां को मोतियों के आभूषण पहनते हुए देखती आ रही थीं। पिया सिंह की मां तो मोतियों की इतनी दीवानी थी कि अगर उनको किसी परचून की दुकान में भी जाना होता तो वो मोती पहनकर ही बाहर निकलती थीं। ये मां और नानी का ही प्रभाव है कि पिया सिंह आज ‘Revere’ की संस्थापक हैं। जो महिलाओं के लिए शानदार मोतियों के गहने बनाने का काम करती है।

ये आश्चर्य की बात नहीं है कि पिया सिंह जो लॉ में अपना करियर ढूंढ रही थी आज एक उद्यमी की भूमिका में हैं और इसके पीछे मुख्य कारण है उनका मोतियों के प्रति प्यार। पिया सिंह का कहना है उनको ये विचार तब आया जब उन्होने देखा कि कीमती आभूषण और पोशाक के गहनों के बीच एक मेल है। पिया सिंह में अपने उत्पाद के डिजाइन और विकास को लेकर जुनून है यही कारण है कि वो मानती है कि उनका कारखाना एक जादुई स्वर्ग के समान है। जहां पर उनके बनाये नमूने आकार लेते हैं। जो काफी सरल और क्लासिक शैली के होते हैं।

पिया सिंह का जन्म दिल्ली में हुआ लेकिन उनका बचपन विभिन्न शहरों में बीता जैसे दिल्ली के अलावा हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु,गोवा और कसौली के एक बोर्डिंग स्कूल में। स्कूल की गर्मियों की छुट्टियों में वो अक्सर लंदन और यूरोप घुमने जाया करती थीं। इसके अलवा वो देश के दूसरे कई हिस्सों खासतौर से दक्षिण भारत में खूब घूमी हैं। पिया सिंह को दक्षिण भारत से खासा लगाव रहा है तभी तो उन्होने तंजौर पेंटिंग के अलावा भरतनाट्य भी सीखा है। पिया सिंह ने अपने कॉलेज की पढाई यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से पूरी की। इसके बाद वो दिल्ली लौट आई और अपनी जिंदगी कॉरपोरेटर वकिल के तौर पर शुरू की। उन्होने टीयर 1 लॉ फर्म जैसे Trilegal और JSA के लिए काम किया।

पिया सिंह कॉरपोरेट लॉ के दौरान बिताये समय को इस बात के लिए श्रेय देती हैं कि इस दौरान वो ये जान सकीं कि किसी उद्देश्य को पूरा कैसे किया जाता है। हालांकि अपनी जिंदगी के 8 साल इस पेशे में गुजारने के बाद उन्होने साल 2014 में ‘Revere’ की शुरूआत की। पिया सिंह ‘Revere’ ब्रांड के तहत बनने वाले गहनों के लिए मोती सीधे मोतियों के कारखाने से खरीदती हैं। इनके मोती जीआईए प्रमाणित होते हैं और वो खुद हर मोती का चुनाव करती हैं। जो बाद में ‘Revere’ के आभूषण में बदल जाते हैं। मोतियों के कारखानों से मोती की सीधी खरीद के कारण ही इनको अच्छे दाम मिल जाते हैं जिसका फायदा ये ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। इस दौरान ये मोतियों की शुद्धता और प्रमाणिकता का भी पूरा ध्यान रखते हैं। किसी तरह की कोई परेशानी आने पर कंपनी 30 दिन के भीतर धन वापसी की सुविधा भी देती है।

‘Revere’ की ऑनलाइन मौजूदगी सीमित है, लेकिन दिल्ली और एनसीआर के ग्राहक कोई भी उत्पाद खरीदने से पहले उसे पहन कर देख सकते हैं। दिल्ली में रहकर कारोबार चला रही पिया सिंह अपने इस काम से पूरी तरह जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा वो अपने यहां लोगों को काम पर रखने और उनको ट्रेनिंग देने का काम भी वो खुद संभालती हैं। उनकी टीम में 10 से ज्यादा ऐसे कारीगर हैं जो फुल टाइम काम करते हैं। इनके अलावा कुछ और भी लोग हैं जो बाकि का काम संभालते हैं। पिया सिंह के मुताबिक इस कारोबार में काफी पैसा लगाया गया है जो फिलहाल उनका खुद का है। चुनौतियों के बारे में पिया सिंह का कहना है कि शुरूआत में हर कारोबार को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खासतौर से भारत में आभूषण का कारोबार पुरूष प्रधान है और शुरूआत में जब किसी महिला को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है जब कोई उसे गंभीरता से नहीं लेता। बावजूद पिया के पास वकिल होने के नाते एक तजुर्बा था कि अपने काम पर तब तक नजर रखो जब तक की वो पूरा ना हो जाए।

पिया ने अपना सारा ध्यान अपने कारोबार पर लगाया और जल्द ही दूसरे लोग भी महसूस करने लगे कि जो वो बोल रही हैं उस पर वो कायम रहेंगी और उनको ये विश्वास हुआ कि पिया सिंह का पूरा ध्यान काम पर है। फिर चाहे वो आभूषण का डिजाइन हो या स्टाइल हो ग्राहक तक पहुंचने से पहले वो उस पर कड़ी नजर रखती हैं और जरूरत पड़ने पर बदलाव करने से भी नहीं हिचकती। पिया सिंह को हिंदी में गिनती नहीं आती और ये उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। कई बार वो इस बात को लेकर चकित हो जाती हैं जब उनके कारीगर या स्थानीय सप्लायर उनके सामने ढेडे मेढ़े नंबर और माप रखते हैं। तब वो बड़ी शालीनता से उनसे उस संख्या का अनुवाद करने को कहती हैं।

पिया सिंह को इस काम के लिए अपने परिवार और दोस्तों से काफी समर्थन हासिल हुआ। वो बताती है कि उनकी मां उनकी आवाज बनी तो उनके पिता सदैव कहते थे कि अपने दिल की सुनो। वो मानती हैं कि उनको अपने दोस्तों और परिवार वालों से काफी प्यार और प्रोत्साहन मिला यही कारण है कि उन्होने कभी की दबाव महसूस नहीं किया। पिया सिंह का कहना है कि मोतियों को लेकर उनका लगाव और उनका डिजाइन हर वक्त उनको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। अपने भविष्य को लेकर पिया काफी उत्साहित हैं। वो लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती हैं। वो डिजाइन के मामले में विस्तार करना चाहती हैं। वो इस बात को लेकर खासा उत्साहित हैं कि दो निवेशकों ने उनके कारोबार में निवेश में रूची दिखाई है। पिया सिंह जाते जाते बता जाती हैं कि कैसे असली मोती की पहचान करनी चाहिए। उनके मुताबिक इसका सबसे आसान तरीका है कि असली मोती को नकली मोती के साथ रगड़ना चाहिए और अगर वो असली मोती होगा तो उसमें से मोती की धूल निकलेगी हालांकि इससे उसकी सतह को कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन अगर वो मोती छिल गया तो वो नकली होगा।

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