मिलिए उन भारतीय महिलाओं से जिन्होंने बनाया देश का पहला स्पेशल बेबी मॉनिटर

महिला उद्यमियों की सफलता...

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यह दुनिया का पहला ऐसा नॉन कॉन्टैक्ट हेल्थ डिवाइस है जो नन्हे बच्चों की सेहत और नींद के बारे में एक मोबाइल ऐप के जरिए ही बता सकता है। नींद या सांस लेने में किसी भी तरह की परेशानी होने पर यह नॉन इंट्रूसिव डिवाइस तुरंत पैरेंट्स को सूचित कर देता है।

फोटो साभार- रेबेबी
फोटो साभार- रेबेबी
इन तीनों दोस्तों की फर्म ने पिछले साल HAX नाम के एक हार्डवेयर स्टार्ट अप इन्वेस्टर्स से 1.7 करोड़ रुपये की फंडिंग भी मिली है। इस कंपनी ने पहली बार किसी भारतीय स्टार्ट अप में निवेश किया था।

बेंगलुरु में इंटरनेट से जुड़ी चीजों पर आधारित सामान बनाने वाली तीन दोस्त, आरदा कन्नन, सांची पूवाया और रंजना नायर कुछ साल पहले अपने एक दूसरी दोस्त के छोटे से बच्चे को देखने गई थीं, जो कि कुछ ही दिनों पहले इस दुनिया में आया था। उन्होंने पहली नजर में ही देखा कि नन्हे से बच्चे ने सीने पर एक बैंड पहन रखा था। उन्हें पता चला कि यह बैंड इसलिए लगा है ताकि उसकी सांसों की गतिविधियां माता-पिता को आसानी से मालूम चल सके। तीनों दोस्तों को लगा कि इससे बेबी को दिक्कत होती होगी। इसलिए उन्होंने इसका समाधान खोजने का फैसला किया।

तकनीक की दुनिया से जुड़े होने और उसी में लगकर दिन रात काम करने की वजह से उनके लिए यह कोई मुश्किल काम नहीं था। कुछ दिनों में ही उन्होंने एक डिवाइस तैयार कर ली जिसका नाम रे-बेबी रखा गया। यह दुनिया का पहला ऐसा नॉन कॉन्टैक्ट हेल्थ डिवाइस है जो नन्हे बच्चों की सेहत और नींद के बारे में एक मोबाइल ऐप के जरिए ही बता सकता है। द न्यूज मिनट की एक रिपोर्ट के मुताबिक नींद या सांस लेने में किसी भी तरह की परेशानी होने पर यह नॉन इंट्रूसिव डिवाइस तुरंत पैरेंट्स को सूचित कर देता है।

सैन फ्रैंसिस्को में रहकर अपनी टेक फर्म चलाने वाली रंजना ने बताया, 'रे बेबी आसाीन से सांस और नींद से जुड़ी जानकारी साझा कर देता है। इस ऐप का नाम स्मार्ट जर्नल ऐप रखा गया है। इसे इस्तेमाल करना बेहद आसान भी है। जब बेबी सो रहा हो तो उसके पास इसे रख देना होता है। इससे बच्चे के स्वास्थ्य में भी इजाफा होता है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह एकमात्र ऐसा प्रॉडक्ट है जो कि भारतीय बाजार में उपलब्ध है।

सांची ने कहा, 'जब हमने इस प्रॉडक्ट को बनाने के बारे में सोचना शुरू किया तो पाया कि इसके लिए हार्डवेयर मिलना काफी मुश्किल है। श्वशन दर को मापने का कोई अच्छा यंत्र नहीं मौजूद था।' हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यह कोई मेडिकल डिवाइस नहीं है बल्कि यह सिर्फ बेबी के सोने और सांस लेने संबंधित जानकारी मुहैया कराता है। रंजना ने कहा, 'हम कुछ ऐसा तैयार करना चाहते थे जिसमें बच्चे के शरीर पर किसी तरह का इलेक्ट्रॉनिक इक्वीपमेंट न इस्तेमाल हो। साथ ही पैरेंट्स को बच्चे से जुड़ी सटीक जानकारी भी मिल जाए।' रंजना बताती हैं कि कई साल पहले उनकी सांची से मुलाकात एक पार्टी में हुई थी। रंजना और आर्दरा उस वक्त रूममेट हुआ करती थीं। सभी ने मिलकर कई सारे प्रॉजेक्ट्स के लिए काम किया और बाद में उन्हें लगा कि खुद ही कुछ शुरू करना चाहिए।

रंजना कहती हैं, 'यह प्रॉडक्ट बनाने के लिए हम तीनों परफेक्ट थे। इसलिए नहीं कि हममें से एक ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से मकैनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया है या किसी का जॉर्जिया यूनिवर्सिटी में आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस पर आर्टिकल छपा है, बल्कि हम इसलिए परफेक्ट थे क्योंकि हमने अपने दोस्तों और परिवार वालों को बच्चों की देखभाल करते हुए काफी अच्छे से देखा था।' इन तीनों दोस्तों की फर्म ने पिछले साल HAX नाम के एक हार्डवेयर स्टार्ट अप इन्वेस्टर्स से 1.7 करोड़ रुपये की फंडिंग भी मिली है। इस कंपनी ने पहली बार किसी भारतीय स्टार्ट अप में निवेश किया था।

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