रेडियो सुनकर आया 'बुकमाईशो' शुरू करने का आइडिया, बना ली एक हजार करोड़ की कंपनी

'बुकमाईशो' के सीईओ आशीष हेमराजानी की कहानी

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सफलता की यह हैरतअंगेज दास्तान है 'बुकमाईशो' के सीईओ आशीष हेमराजानी की। एक दिन वह अफ्रीका में पेड़ के नीचे बैठकर रेडियो सुन रहे थे, तभी उनका दिमाग कौंधा, लाजवाब आइडिया ने जन्म लिया और कुछ ही साल में वे बन गए करोड़पति।

'बुकमाईशो' के सीईओ आशीष हेमराजानी
'बुकमाईशो' के सीईओ आशीष हेमराजानी
कंपनी का दावा है कि अब तक इसका एप 30 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। हर महीने इससे दस लाख से अधिक टिकट बुक किये जाते हैं और एक महीने में तीन करोड़ से अधिक पेज व्यू मिल जाते हैं।

इंडि‍यन डिजिटल मार्केटिंग अवॉर्ड्स (आईडीएमए) की ओर से कुछ माह पहले 'पर्सन ऑफ द ईयर' के खिताब से नवाजे जाने वाले 'बुकमाईशो' के सीईओ आशीष हेमराजानी की एक कामयाब बिजनेस मैन के रूप में सफलता की बड़ी दिलचस्प दास्तान है। आज ऑनलाइन एंटरटेनमेंट टिकटिंग इंडस्‍ट्री में उनके स्‍टार्टअप का कोई शानी नहीं दिखता है। हेमराजानी अपनी सफलता की कहानी सुनाते हुए बताते हैं कि उनके बिजनेस का सफर आसान नहीं था लेकिन एक एंटरप्रेन्योर के सामने और कोई विकल्प भी तो नहीं होता है।

आज से लगभग दो दशक पहले जब उन्होंने छह सहकर्मियों के साथ ढाई हजार वर्गफुट के एक छोटे से कमरे से अपने काम-धंधे की शुरुआत की थी, एक साल के भीतर ही उनके कर्मचारियों की संख्या बढ़कर डेढ़ सौ हो गई। वह इंटरनेट की तेजी से ग्रोथ का वक्त था। उसी दौरान उन्हें एक कंपनी से जब दो करोड़ फंडिंग मिली, उनका बिजनेस तेजी से चल पड़ा। आज उऩकी कंपनी एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का फंड जुटा कर भारत की सबसे सफल ऑनलाइन टिकट बुकिंग कंपनी बन चुकी है। आज बुकमायशो के 16 लाख से अधिक यूजर्स हैं। यह भारत की सबसे बड़ी एंटरटेनमेंट टिकटिंग वेबसाइट है। यह दुनिया के चार देशों में चल रही है।

हमारे देश में फिल्मों के टिकट की बुकिंग का बाज़ार आज रोचक-रोमांचक दौर में है। टिकट बिक्री के मामले में इवेंट टिकट का बाजार प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपए का हो चुका है जिसमें इवेंट्स और स्पोर्ट्स आदि शामिल हैं। अपने स्टार्टअप के दस वर्षों के अन्दर ही 'बुकमायशो' ने ऑनलाइन एंटरटेनमेंट टिकटिंग के क्षेत्र में 70 प्रतिशत से भी अधिक मार्केट शेयर हासिल कर लिया। इसका मुख्यालय मुंबई में है और यह बिग ट्री एंटरटेनमेंट लिमिटेड के नाम से रजिस्टर्ड है।

कंपनी का दावा है कि अब तक इसका एप 30 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। हर महने इससे दस लाख से अधिक टिकट बुक किये जाते हैं और एक महीने में तीन करोड़ से अधिक पेज व्यू मिल जाते हैं। बुकमाईशो के सीईओ हेमराजानी बताते हैं कि सन् 2000 की शुरुआत में साउथ अफ्रीका और बोत्सवाना की ट्रिप के दौरान हुए एक वाकये ने उनको बिजनेस के लिए प्रेरित किया। उस वक्‍त वह दक्षिण अफ्रीका में छुट्टियां मना रहे थे। वह रोड ट्रिप पर थे। वहां उन्होंने एक पेड़ के नीचे बैठकर रेडियो पर सुना कि लोग ऑनलाइन भी टिकट खरीद सकते हैं। फिर उन्होंने सोचा कि ऐसा तो हम अपने देश में भी कर सकते हैं।

आशीष एक वक्त में भारत में देख ही चुके थे कि सिनेमाघरों के बाहर लोग टिकट के लिए लंबी-लंबी लाइनों में घंटों वक्त जाया कर देते हैं। लोगों को टिकट के लिए पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ती हैं। यह सुविधा अगर ऑनलाइन दे दी जाए, फिर तो इसकी मार्केट ग्रोथ को कोई रोकने वाला नहीं होगा। इसके बाद एक हॉस्टल पार्टी के दौरान उन्होंने ठान लिया कि अब वह नौकरी न कर, अपना ऑनलाइन टिकट बुकिंग का काम शुरू करेंगे। केपटाउन में वापस आने के बाद उन्होंने उसी दिन अपनी नौकरी छोड़ दी। इस्तीफा भी उन्होंने अपने बॉस को मैसेज से दिया। इसके बाद बिजनेस प्लान पर काम किया और कुछ इन्वेस्टर्स से बात की। उसके बाद बुकमाईशो की पहली फंडिंग दो करोड़ रुपए की मिली।

जुलाई 1975 में जन्मे आशीष मुंबई यूनिवर्सिटी के सिड्नहैम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के छात्र रहे हैं। एमबीए की पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने जे. वाल्टर थॉम्पसन नामक एडवरटाईजिंग कंपनी के साथ नौकरी की शुरुआत की थी। आशीष बताते हैं कि वह नौकरी के दौरान एडवर्टाइजिंग के लिए काम करते थे, जहां हर किसी के हाथ में चाय और सिगरेट होती थी। बुकमाईशो का सफर स्मोकिंग और अल्कोहल की वजह से शुरू हुआ, यद्यपि खुद वह स्मोकिंग नहीं करते हैं। हां, ये जरूर है कि उनको स्मोकिंग करने वालों से किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है। आशीष बताते हैं कि बुकमायशो की एपीआई तक विशिष्ट पहुंच होती है। जैसेकि मूवी थियेटर्स और मल्टीप्लेक्स की विस्टा ईआरपी तक होती है और वे इनके एप के बैकएंड से जुड़े होते हैं, जो मूवी टिकट एकदम सही समय में अपने ग्राहकों को उपलब्ध करा देते हैं। इवेंट टिकट का क्रमांकन भी कर दिया जाता है।

आज बुकमायशो की कमाई के कई एक स्त्रोत हैं। फिर भी ऑनलाइन टिकटिंग ही मुख्य स्त्रोत है जो कुल कमाई का लगभग साठ प्रतिशत है। यह इंटरनेट के शुल्क और टिकट बुकिंग पर दी जाने वाली छूट से मिलता है। कंपनी, टिकट की कीमत के अतिरिक्त सुविधा शुल्क भी वसूल करती है। बुकमायशो इस प्रकार संचालित होता है। जहां तक गैर फ़िल्मी इवेंट्स का सवाल है, बीएमएस को इन टिकट्स पर कमीशन मिलता है। अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए कंपनियां बीएमएस से संपर्क करती रहती हैं। उनको ऑनलाइन बुकिंग कराने वाले दर्शकों की जरूरत रहती है। आशीष बताते हैं कि वर्ष 2002 से 2006 तक उनको कोई निवेशक नहीं मिला।

डॉट कॉम की सुनामी जाने के बाद भारत में मार्केट पूरी तरह बदल गया और भारत में इंटरनेट सेवाएं, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड जैसी सेवाएं अधिक अच्छी हो गईं और इन्फ्रास्ट्रकचर में भी तेजी से उछाल आया। उसी दौरान भारत में बड़ी संख्या में मल्टीप्लेक्स बनने लगे। मार्च 2007 में नेटवर्क 18 ने बुकमायशो में निवेश किया। वर्ष 2012 में एक्सेल पार्टनर्स ने सौ करोड़ रुपए का निवेश किया। इसके बाद जून 2014 में सैफ पार्टनर्स ने 150 करोड़ रुपए का निवेश कर कंपनी का मार्केट वैल्यू एक हजार करोड़ रूपये तक पहुंचा दिया। अब तक बुकमाईशो तीन राउंड्स में चार निवेशकों से लगभग सवा सौ लाख डॉलर हासिल कर चुकी है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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